आधुनिक समय में इनफर्टिलिटी की समस्या बढ़ती जा रही है। ये समस्या महिलाओं एवं पुरुषों दोनों में होता है। बांझपन का मुख्य कारण शारीरिक संबंध, सेहत और उम्र  होती है। अगर महिला और पुरुष के बीच शारीरिक संबंध सही से स्थापित न हो, या फिर स्पर्म काउंट कम हो तो ऐसी स्थिति में इनफर्टिलिटी की समस्या का खतरा बढ़ जाता है।

वहीं, अगर सेहत सही हो तो स्पर्म काउंट भी सही रहता है। जिससे शारीरिक संबंध भी सही से स्थापित होता है। अगर सेहत ठीक न हो तो शरीर में स्पर्म काउंट का बैलेंस बिगड़ जाता है और स्पर्म काउंट में कमी आ जाती है। जिससे इनफर्टिलिटी की समस्या आ जाती है। इनफर्टिलिटी के लिए उम्र भी प्रमुख कारण है। 

अगर महिला और पुरुष के बीच उम्र में अधिक अंतर हो, या निर्धारित उम्र से अधिक उम्र में शारीरिक संबंध बनाया जाता है तो इस उम्र में स्पर्म काउंट सही नहीं रहता है। ऐसी स्थिति में महिला और पुरुष को इनफर्टिलिटी का सामना करना पड़ता है। वहीं, ये तीनों कारण महिलाओं पर भी लागू होता है। जिसमें अगर महिलाएं अधिक उम्र की हो जाती है तो एग सेल कम बनते हैं। जिससे इनफर्टिलिटी की समस्या आ जाती है। 

साथ ही महिलाओं में शारीरिक संबंध और सेहत इनफर्टिलिटी के लिए उतना ही जरूरी है, जितना पुरुष के लिए जरूरी है। अगर कोई दम्पत्ति संतान सुख से वंचित है तो आज हम आपको आयुर्वेद के जरिये कैसे महिला और पुरुष के बांझपन को दूर किया जा सकता है, इसके बारे में बताने जा रहे हैं। 

इनफर्टिलिटी के कारण- ( Reason of Increase fertility ) इनफर्टिलिटी के लिए जरूरी है कि महिला और पुरष के बीच भावनात्मक संबंध हो जो शारीरिक संबंध में एक साथ दिखे। अगर कोई मजबूरी में शारीरिक संबंध बनाता है तो ऐसी परिस्थिति में इनफर्टिलिटी की समस्या आती है। इसके लिए जरूरी है कि जब शारीरिक संबंध स्थापित हो तो दोनों के बीच भावनात्मक संबंध के तार भी जुड़े। प्रेग्नेंसी के लिए पुरुष शुक्राणु और महिला अंडाशय का गुणसूत्र मिलना चाहिए। ऐसा होने पर प्रेग्नेंसी के चांस बढ़ जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता है तो इनफर्टिलिटी की समस्या बनी रहती है। खान पान में तीखा, तला, नमकीन या प्रिजेटिव फ़ूड को खाने से पित्त बढ़ता है जो इनफर्टिलिटी को बढ़ाता है। 

पुरुषों में इनफर्टिलिटी के कारण- ( Increase fertility in men ) पुरुष में इनफर्टिलिटी के कई कारण होते हैं। जिसमें हार्मोन का असंतुलित होना, अत्यधिक स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, वजन का असंतुलित होना, स्पर्म सेल का असंतुलित होना आदि। 

महिला में इनफर्टिलिटी के कारण- ( Increase fertility in women ) महिला में इनफर्टिलिटी के कई कारण होते हैं। जिसमें हार्मोन का बिगड़ना, अल्कोहल, स्मोकिंग, एग सेल कम प्रोड्यूस होना, ओवेल्यूशन प्रॉब्लम एवं ट्यूबल ब्लॉकेज ( tubal blockage )  आदि । 

आयुर्वेदिक उपचार-  ( Ayurvedic treatments to increase fertility ) फर्टिलिटी की समस्या को दूर करने के लिए जरूरी है कि महिला में एग सेल बनने के लिए पुरुष का स्पर्म काउंट नंबर सही हो। ऐसे में इस तालमेल को सही और सटीक स्थापित करने के लिए आयुर्वेद में कई उपचार है, जिसमें पंचकर्मा प्रमुख है। पंचकर्मा एक ऐसी आयुर्वेदिक पद्धति है। जिसमें टोक्सिन को बॉडी से डेटॉक्स किया जाता है। इसके साथ ही इस उपचार में विटामिन्स, मिनरल्स और हार्मोन्स को संतुलित किया जाता है। इसके लिए बॉडी को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई और बिना टोक्सिन वाली कोशिकाओं को पोषित करने पर ध्यान दिया जाता है। इसके अतिरिक्त बॉडी की इम्युनिटी लेवल को इंक्रीज किया जाता है। जिससे गर्भधारण में मदद मिलें। इस पद्धति में तीन सप्ताह का वक्त लगता है। 

अभ्यंग उपचार- इस उपचार में आयुर्वेदिक तेल का इस्तेमाल शरीर की मालिश के लिए किया जाता है।  इससे शरीर के सभी अंगों की आयुर्वेदिकक तरीके से मालिश कर शरीर में मौजूद कमियों को दूर किया जाता है। ये उपचार महिला और पुरुष दोनों के लिए है। 

स्नेहपनम उपचार- इस उपचार में शरीर में एग सेल और स्पर्म काउंट के लिए आयुर्वेदिक घी का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें महिला और पुरुष को घी पीने के लिए दिया जाता है। जिससे शारीरिक संबंध स्थापित करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। 

पोडिक्कजी उपचार- इस उपचार में महिला और पुरुष को इन्फर्टिलटी की समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से बनाया गया चूर्ण खाने के लिए दिया जाता है। इस जड़ी बूटी से शारीरिक संबंध की स्पीड और ड्यूरेशन दोनों बढ़ता है। साथ ही ये दवा शरीर में मौजूद डेटॉक्स को बाहर करने में कारगर है। इस जड़ी बूटी में तनाव को दूर करने की भी अद्भुत शक्ति है। 

नजावरा उपचार- इस उपचार में प्राकृतिक रूप को अपनाया जाता है। इसके लिए एक पाक बनाया जाता है। जिसमें लाल पके चावल को दूध और जड़ी बूटी में मिलाकर बनाया जाता है। फिर इस पाक को सूती कपड़े में बांध दिया जाता है और इसके रस को तकरीबन आधे घंटे के लिए कन्धों और कमर पर निचोड़ा जाता है। इस रस से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। इसके बाद आयुर्वेदिक तेल से शरीर की मालिश की जाती है। इस प्रक्रिया से गर्भ धारण की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही खान-पान पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। वहीं स्मोकिंग और ड्रिकिंग से भी दूर रहना जरूरी है। 

योग- इनफर्टिलिटी में योग भी बहुत लाभकारी होता है। इसके लिए योग चिकित्स्क कई आसनों का सुझाव देते हैं। जिसमें जानु शीर्षासन, उत्तानासन, पश्चिमोत्तानासन, भ्रामरी प्राणायाम और बद्ध कोणासन है। जिसे करने से इनफर्टिलिटी की समस्या दूर होती है। इन आसनों को करने से पेट, अंडाशय के साथ साथ प्रेग्नेंसी ऑर्गन्स की मसल्स को आराम मिलता है। साथ ही इनफर्टिलिटी में भी ये बहुत ही लाभकारी है। इन योगों को करने से स्ट्रेस और टैंशन दूर होता है। जिससे ओवरी हेल्दी रहता है। अगर ओवरी हेल्दी रहे तो एग सेल अधिक प्रोड्यूस होते हैं और फिर प्रेग्नेंट होने की संभावना बढ़ जाती है। प्रेग्नेंसी के लिए बॉडी में ब्लड का फ्लो होना बहुत जरूरी है और योग करने से बॉडी में ब्लड सर्कुलशन सही से होता है। जिससे सम्पूर्ण बॉडी को पोषण मिलता और भ्रूण विकास में यह फायदेमंद होता है ।

आयुर्वेद से इनफर्टिलिटी का इलाज सम्भव हैं । अगर कोई चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार नियमित रूप से आयुर्वेद इलाज लेता हैं तो रोगी को सकारात्मक एवं स्थाई परिणाम मिलेंगे ।
COVID-19 के मामले भारत में बढ़ रहे हैं, और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे महामारी की स्थिति के रूप में घोषित किया है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमें संक्रमणों के खिलाफ खुद को सुरक्षित करने की आवश्यकता है। 
आयुर्वेद के अनुसार, यहां कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। 
* आयुर्वेदिक तैयारी, च्यवनप्राश: हम च्यवनप्राश खाने की प्रथा में रहे हैं। एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर आवश्यक जड़ी बूटियों से भरी इस आयुर्वेदिक तैयारी का एक चम्मच कई लोगों के जीवन में एक दिनचर्या है। च्यवनप्राश एक व्यापक हर्बल टॉनिक है जिसमें कई स्वास्थ्य लाभ हैं, जो एक प्राचीन आयुर्वेदिक सूत्र के अनुसार तैयार किया गया है। आज दुनिया भर में लोगों द्वारा उपयोग किया जाता है, यह एक सिद्ध एनर्जाइज़र, प्रतिरक्षा बूस्टर और पूर्व-खाली टॉनिक है। यह प्रतिरक्षा के निर्माण के लिए एक सबसे अच्छा आयुर्वेदिक उपचार माना जाता है। 
* तुलसी अदरक की चाय: एक लीटर पानी में 1 बड़ा चम्मच सूखे अदरक, 4 चम्मच धनिया के बीज, 1 चम्मच काली मिर्च, 4 इंच गिलोय की छड़ी और एक मुट्ठी ताजा तुलसी के पत्तों को उबालें। इसे तनाव और 1 चम्मच शहद या गुड़ के साथ पीएं। 
* दालचीनी और क्रिस्टल चीनी / खांड / शहद के साथ लहसुन का दूध: एक गिलास दूध में चार गिलास पानी मिलाएं और इसमें तीन लौंग डालें। इसे एक गिलास तक कम होने तक उबालें। इसे दालचीनी के साथ शहद / चीनी / खांड के साथ चाय / कॉफी के बजाय इसे पीएं। 
* हल्दी छाछ: हल्दी पाउडर में 1 चम्मच, हींग पाउडर, मेथी और सौंफ के बीज को कुछ करी-पत्तियों के साथ 500 मिलीलीटर छाछ में मिलाएं और इसे पांच मिनट के लिए गर्म करें। रोजाना दो या तीन बार पिएं। ये सभी मनगढ़ंत बातें (क्वाथ / कड़ा) आपके चयापचय पर काम करते हैं, जो हमारी प्रतिरक्षा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, अदरक-लहसुन-मिर्च पेस्ट को अपने करी / उपमा / ग्रेवी / बल्लेबाज में जोड़ने का प्रयास करें। 
* सफाई क्रिया के लिए अपने शरीर में अच्छे जलयोजन स्तर को बनाए रखें। * अपने प्रोबायोटिक्स सेवन को बढ़ाएं - एक दिन में कम से कम 2 सर्विंग दही लेने की सलाह दी जाती है। 
* विटामिन सी वायरल क्रिया के खिलाफ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए शरीर में इस महत्वपूर्ण विटामिन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए नींबू / कीवी / संतरे / मीठा चूना / आंवला- (भारतीय करौदा) का सेवन अच्छा विकल्प है। 
*कुछ घर-आधारित वर्कआउट के साथ जारी रखना भी बहुत महत्वपूर्ण है। चूंकि अधिकांश क्षेत्र बंद हैं, इसलिए कई कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जा रही है। इन तनाव काल के माध्यम से प्राप्त करने के लिए, कोरोनावायरस के खिलाफ अपने परिवार की रक्षा करने में मदद करने के लिए इन युक्तियों को शामिल करना एक अच्छा विचार है। हमेशा याद रखें कि रोकथाम इलाज से बेहतर है। अब यह आपके हाथ में है कि आप क्या चुनना चाहते हैं। 
विशेष :- किसी भी आयुर्वेदिक औषधि के सेवन से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य करे | यदि आपको हमारा यह लेख पसंद आया हो तो कृपया शेयर करे और कमेन्ट के माध्यम से हमे भी अवगत करवाए | 
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प्याज का रस आठ मिली. + अदरक का रस छह मिली. + गाय का घी एक ग्राम + शहद दो ग्राम इन सभी चार औषधियों को मिला कर लगातार दो माह तक प्रयोग करा जाए तो मूर्खतापूर्ण कारणों से वीर्य का नाश कर चुके व लगभग नपुंसक हो चुके लोगों में भी नयी पौरुष ऊर्जा का संचार होने लगता है। औषधि सेवन काल में खट्टी चीजों का सेवन न करा जाए, नशीले पदार्थों का भी प्रयोग बंद कर दिया जाए, स्त्री सहवास से भी दूर रहें अन्यथा एक ओर तो ताकत एकत्र करने का जतन करा जाए और दूसरी ओर सारी ताकत को व्यय कर दिया जाए तो परिणाम शून्य ही रहने वाला है इसलिये धैर्य अत्यंत आवश्यक है। औषधि सेवन के दौरान यदि कब्जियत का अनुभव हो तो त्रिफला चूर्ण आदि का सेवन करें ताकि कब्जियत न रहे।

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सर मेरी उम्र उनचास साल है। अपनी सारी रिपोर्ट्स आपको भेज रहा हूँ मैं एक डायबिटीज़ का मरीज़ हूँ। शुगर लेवल ऊपर नीचे होता रहता है खानपान और परिस्थितियों के अनुसार लेकिन मैं जो परेशानी खास तौर पर देख रहा हूँ वो ये है कि मेरी सेक्स लाइफ़ खत्म हो गयी है। डॉक्टर का कहना है कि इस तरह की नपुंसकता मुझे मेरी शुगर की प्रॉब्लम के कारण हुई है क्या आयुर्वेद में मेरे लिये कोई इलाज है? राजशेखर सिंह नई दिल्ली 
राजशेखर जी, आपकी रिपोर्ट्स को देखा और आपकी समस्या को समझा। आप यदि मधुमेह का सही उपचार लेकर अथवा आहार-विहार, आचार-विचार पर नियंत्रण रख कर अपनी शर्करा का स्तर सामान्य रखते हैं तो आपकी परेशानी का आयुर्वेद में सटीक उपचार है आप जरा भी परेशान न हों। आपने लिंग का उत्थान न होना, उत्तेजना का पूरी तरह समाप्त होजाना जैसे लक्षणों को अपने बड़े लम्बे से पत्र में विस्तार से लिखा है जिन्हें मैं समझ सकता हूँ। आपकी मधुमेह जन्य नपुंसकता की समस्या का हल प्रस्तुत है आप निम्न औषधियाँ चालीस दिन तक लीजिये। विश्वास करिये कि न सिर्फ़ आपकी लैंगिक समस्या हल हो जाएगी बल्कि आपकी मधुमेह (डायबिटीज़) के बाकी उपद्रव जैसे बार बार प्यास लगना, पेशाब लगना, भूख का बुरी तरह से प्रभावित करना, भयंकर कमजोरी आ जाना आदि अपने आप खत्म हो जाएंगे और शर्करा का स्तर भी नियंत्रित रहेगा। 
१.प्रमदेभांकुश रस एक गोली + पुष्पधन्वा रस एक गोली + बसंतकुसुमाकर रस एक गोली इन तीनों की एक खुराक बना कर दिन में दो बार नीचे लिखे मिश्रण के दो चम्मच के साथ भोजन के बाद लीजिये
 २.अश्वगंधारिष्ट + दशमूलारिष्ट + अर्जुनारिष्ट + बलारिष्ट बराबर मात्रा(प्रत्येक १०० मिली.) में लेकर इसमें शुद्ध शिलाजीत १० ग्राम घोल दीजिये, शक्ति मिश्रण तैयार है। यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे मोबाइल नंबर Whatsapp: 9911686262 पर संपर्क करें।

सर मेरी समस्या आपके लिये शायद छोटी हो सकती है लेकिन मेरे लिये बड़ी मुसीबत है। मेरा कद पाँच फुट सात इंच है और मैं देखने में स्वस्थ दिखता हूँ। सचमुच मुझे कोई बीमारी नहीं है लेकिन मेरी शादी के बाद से मुझे पता चला कि मेरे लिंग का आकार इतना बड़ा और मोटा नहीं है कि मैं अपनी पत्नी को संतुष्ट कर सकूं। मेरी पत्नी ने मुझसे सीधे सीधे तो कुछ नहीं कहा लेकिन फिर भी दबी जबान में कह ही दिया कि आप तो बच्चे जैसे हैं पहले मैं इस बात का अर्थ नहीं समझ सका लेकिन दो माह गुजरने के बाद उसने बता ही दिया कि वो मुझे बच्चे जैसा क्यों कहती है। अब आप ही बताइये कि मैं क्या करूं क्योंकि शादी से पहले मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है क्योंकि मैं अपने व्यापार आदि में काफ़ी व्यस्त रहा इन सब बातों के लिये समय ही नहीं रहा लेकिन अब आप बताएं कि मैं खुद को पत्नी के सामने कैसे पेश कर पाउंगा मुझे शर्म आती है और वो भी मन मार कर मेरी इच्छा रख लेती है। फ़िलहाल वह एक माह के लिये मायके में है। सुमित जैन, भायंदर 

सुमित जी आपकी समस्या छोटी है ये कहना सही न होगा। आपने काफ़ी लम्बा पत्र लिखा है जिसमें यही समस्या है कि आपके लिंग का आकार आपकी पत्नी के लिये संतुष्टिकारक नहीं है जैसा कि आपने शिथिल व उत्तेजित स्थिति का आकार भी पत्र में बताया है। आपने लिखा है कि समय आदि सब ठीक है तो मैं आपको औषधि बताता हूं आप उसे प्रयोग करें आशा है कि आपको पर्याप्त लाभ होगा- 
रस सिन्दूर २५ मिग्रा.+ मुक्ताशुक्ति भस्म २५ मिग्रा. + जावित्री १० मिग्रा. + स्वर्ण बंग २५ मिग्रा. + कुक्कुटाण्डत्वक भस्म २५ मिग्रा. + अश्वगंधा ५० मिग्रा. + शिलाजीत २५ मिग्रा. + शुद्ध विजया २५ मिग्रा. + गोखरू ५० मिग्रा. + शुद्ध हिंगुल २५ मिग्रा. + बबूल गोंद २५ मिग्रा. + विधारा ५० मिग्रा. + दालचीनी २५ मिग्रा. + कौंच बीज २५ मिग्रा. + तालमखाना २५ मिग्रा. + सफ़ेद मूसली २५ मिग्रा. + जायफल १० मिग्रा. + शतावर ५० मिग्रा. + लौंग १० मिग्रा. + बीजबन्द ५० मिग्रा. + सालम मिश्री ५० मिग्रा. 
इन सभी की एक खुराक बनेगी आप इसी अनुपात में औषधियाँ मिला कर अपनी जरूरत के अनुसार दवा बना लें व सुबह नाश्ते तथा रात्रि भोजन के बाद एक एक खुराक मीठे दूध से लीजिये। दूसरी दवा लिंग पर लगाने के लिये है इससे आपको कोई नुक्सान नहीं होगा इसलिए परेशान न हों। 
अश्वगंधा तेल १० ग्राम + मालकांगनी तेल १० ग्राम + श्रीगोपाल तेल १० ग्राम + लौंग का तेल २ ग्राम + निर्गुण्डी का तेल १० ग्राम इन सब को मिला कर इसमें केशर १ ग्राम + जायफल २ ग्राम + दालचीनी २ ग्राम । इन सबको कस कर घुटाई कर लें तो क्रीम की तरह बन जाएगा। इसे किसी मजबूत ढक्कन की काँच या प्लास्टिक की चौड़े मुँह की शीशी में रख लीजिये। इसे नहाने के बाद अंग सुखा कर भली प्रकार हल्के हाथ से मालिश करते हुए अंग में जाने दें। लगभग दस मिनट में यह क्रीम लिंग में अवशोषित हो जाएगी। इस प्रकार यदि दिन में समय मिले तो दो बार क्रीम लगाएं। ध्यान दीजिये कि औषधि प्रयोग काल में सम्भोग या हस्तमैथुन न करें। यदि आप लगभग तीन माह तक इस प्रयोग को करें तो स्थायी लाभ होगा। यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे मोबाइल नंबर Whatsapp: 9911686262 पर संपर्क करें।

प्रश्न:- सर जी मै मेरी अभी अभी नयी नयी शादी हुई है। मैं जैसे ही संभोग करना शुरू करता हूं कुछ ही सेकेंड में चिपचिपा सा पदार्थ मेरे लिंग से निकलने लगता है जो कि पानी जैसा होता होता है और मेरे लिंग का तनाव बिलकुल समाप्त हो जाता है बिना वीर्य निकले ही लिंग पूरी तरहा शिथिल हो जाता है और फिर मैं संभोग करने में अक्षम हो जाता हूं ये कौन सी बिमारी है और क्या ये ठीक हो सकती है कृपया इलाज बतायें । रमन कुमार उम्र ३२ वर्ष हरियाणा
 

उत्तर :-  भाई रमन कुमार जी ये एक जटिल रोग है जो थोडा लंबा इलाज लेने पर निश्चित रूप से ठीक हो जाता है । वीर्य को होल्ड करने वाली नसे जब अपनी क्षमता खो देती है तो वाह बिना किसी प्रयास के पतला होकर रिसने लगता है वीर्य का रिसावं होते ही लिंग शिथिल हो जाता है और हं सेक्स करने में असमर्थ हो जाते हैं इसमें आपको वीर्य को गाढा करने वाली और लिंग को द्रढ बनाने वाली औषधियों का सेवन करना चाहिये आप जरूर ठीक हो जायेंगे चिंता मत किजीये ।नीचे लिखी हुई दवाये ले कते हैं आप 
१ > आवळा  पाऊडर एक चम्मच रोज पानी से 
२>तालमखाना मिश्री और गोखरू चूर्ण मिळकर एक चम्मच रोज 
३> स्वर्ण युक्त शिलाजीत एक  टेबलेट रोज पानी से 
४>अशवगंधा चांदी युक्त एक गोली पानी से 
५>शुक्रवल्लभ रस वीर्य को गाडा करने के लिये एक गोली  रोज 
६>चंद्रप्रभा वटी शाम को २ गोली 
७>वृष्य वटी नाश्ते के बाद एक गोली 
८>धातुपौष्टिक चूर्ण रोज एक चम्मच 
९>सवर्णयुक्त मकरध्वज एक गोली रोज नाश्ते बाद 
१०> १ग्राम केशर में १० मिलीअशवगंधा तेल ,श्रीगोपाल तेल १० मिली ,मालकांगनी तेल १० मिली ,कलौजी तेल १० मिली ,निर्गुंडी तेल १० मिली ,जायफळ पाऊडर १ग्राम ,दालचिनी पाऊडर १ ग्राम ,लौग तेल ५मिली ,सवर्ण वांगेशवर भसम एक ग्राम सबको मिलाकर घोंट लें और लिंग पर नहाने के बाद १० मिनटं तक मालिश करे यदि दिन में समय मिले तो दो बार क्रीम लगायें,  यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे मोबाइल नंबर Whatsapp-9911686262 पर संपर्क करें।
यौनशक्ति और कामशक्ति बढ़ाने के उपाय लिंग में कड़ापन और वीर्य गाढ़ा करने के सरल नुस्खे Enjoy married life must adopt it 
यौन-संबध बनाने के लिए जितना ध्यान मानसिक तैयारी और कामात्तेजना को देना चाहिए उतना ही ध्यान अपनी यौन-शाक्ति पर भी देना आवश्यक है। यौन-शक्ति के अभाव मे एक बेहतरीन रोमांटिक माहौल में भरपूर तैयारी के साथ बनाया गया संबंध कारगर साबित नही होता है और आप यौन-सुख से वंचित रह जाते है। जिन व्यक्तियों में यौन-शक्ति का अभाव होता है वह सेक्स के दौरान थो़डी देर मे ही खुद को कमजोर महसूस करने लगते है। इस अभाव के कारण अधिकतर लोगो में शामिदंर्गी का बोध बढ़ जाता है और वह अपने साथी के साथ यौन-संबंध बनाने मे झिझकने लगते है। हाल ही मे वैज्ञानिको द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार यह पाया गया है कि शारीरिक रूप से कमजोर और अस्वस्थ लोगो मे यौन-शक्ति की कमी होने की संभावना अधिक होती है। आइए इसके अन्य कारणो तथा निवारणो पर विचार करते है
यौन-शक्ति क्षीण होने के कारण -
डिपरेशन: बहुत अधिक तनाव से होने वाले हार्मोनल परिवर्तन, पौष्टिक विकार, यौन-शाक्ति कम करने के मुख्य कारणों मे से एक है।
भारी व जटिल व्यायाम: आवश्यकता से अधिक भारी-भरकम व्यायामो का प्रशिक्षण शरीर मे उपस्थित आवश्यक वसा को कम कर देता है, जिसका असर शरीर मे जरूरी मेटाबोलिजम तथा अन्य हार्मोनो पर प़डता है और यौन-शक्ति मे कमी आने लगती है
आहार: गर्म तथा अधिक मसालेदार आहर का प्रयोग भी इसका एक कारण है
शराब का दुरूपयोग: शराब-सिगरेट तथा तंबाकु के अत्याधिक सेवन से जननांग की कोशिकाए शीथल प़ड जाती है। जो यौन-शक्ति कमजोर होने का मुख्य कारण है। एक लौंग को चबाकर उसकी लार को लिंग के पिछले भाग पर लगाने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है। लगभग 10-10 ग्राम सफेद प्याज का रस और शहद, 2 अंडे की जर्दी और 25 मिलीलीटर शराब को एक साथ मिलाकर रोजाना शाम के समय लेने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है। लगभग 5 बादाम की गिरी, 7 कालीमिर्च और 2 ग्राम पिसी हुई सोंठ तथा जरूरत के अनुसार मिश्री को एक साथ मिलाकर पीस लें और फंकी लें। इसके ऊपर से दूध पी लें। इस क्रिया को कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से संभोगक्रिया के समय जल्दी वीर्य निकलने की समस्या दूर हो जाती है। उड़द की दाल को पानी में पीसकर पिट्ठी बनाकर कढ़ाई में लाल होने तक भून लें। इसके बाद गर्म दूध में इस पिसी हुई दाल को डालकर खीर बना लें। अब इसमें मिश्री मिलाकर किसी कांसे या चांदी की थाली में परोसकर सेवन करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है। इस खीर को लगभग 40 दिनों तक प्रयोग करने से लाभ होता है।

वीर्य को बढ़ाना 
इमली के बीजों को पानी में छिलका उतरने तक भिगो लें। इसके बाद इन बीजों का छिलका उतारकर चूर्ण बना लें। इसके लगभग आधा किलो चूर्ण में इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें। इसमें से लगभग 2 ग्राम चूर्ण को लगभग 40 दिनों तक नियमित रूप से फांकने के बाद ऊपर से दूध पीने से वीर्य गाढ़ा होता है और शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है।
बरगद के पके हुए फलों को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और इसमें मिश्री मिलाकर रख लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में रोजाना शाम को दूध के साथ लेने से एक सप्ताह के बाद ही वीर्य गाढ़ा होना शुरू हो जाता है। इस चूर्ण को लगभग 40 दिनों तक सेवन किया जा सकता है। लगभग आधा किलो देशी फूल की कच्ची कलियों को डेढ़ लीटर पानी में डालकर उबाल लें। पानी उबलने के बाद जल जाने पर इस मिश्रण को बारीक पीसकर 5-5 ग्राम की गोलियां बनाकर एक कांच के बर्तन में रखकर ऊपर से ढक्कन लगा दें। इसमें से 1 गोली को रोजाना सुबह के समय दूध के साथ लेने से संभोग करने की शक्ति बढ़ती है और वीर्य भी मजबूत होता है।
लगभग 10 ग्राम बिदारीकंद के चूर्ण को गूलर के रस में मिलाकर चाट लें। इसके ऊपर से घी मिला हुआ दूध पीने से जो व्यक्ति संभोग क्रिया में पूरी तरह से सक्षम नहीं होते उनके शरीर में भी यौन शक्ति का संचार होने लगता है। देशी फूल की तुरंत उगी अर्थात नई कोंपलों को सुखाकर और पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को रोजाना 6 ग्राम की मात्रा में फांककर ऊपर से मिश्री मिला हुआ दूध पीने से वीर्य पुष्ट होता है। इसके अलावा इसका सेवन करने से पेशाब के साथ वीर्य का आना और स्वप्नदोष जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।
चिरौंजी, मुलहठी और दूधिया बिदारीकंद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को लगभग 1 सप्ताह तक लेने से और ऊपर से दूध पीने से वीर्य के सारे दोष दूर होते हैं और वीर्य बढ़ जाता है।
सोंठ, सतावर, गोरखमुंडी, थोड़ी सी हींग और देशी खांड को एक साथ मिलाकर सेवन करने से लिंग मजबूत और सख्त होता है और बुढ़ापे तक ऐसा ही रहता है। इसके अलावा इसको लेने से वीर्य बढ़ता है और शीघ्रपतन जैसे रोग दूर हो जाते हैं। इस चूर्ण का सेवन करते समय गुड़ और खट्टे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
सिंघाड़े के आटे का हलुआ, उड़द और चने की दाल का हलुआ, अंडों की जर्दी का गाय के घी में तैयार किया हुआ हलुआ, मेथी और उड़द की दाल के लडडू, आंवले की चटनी, गेहूं, चावल, बराबर मात्रा में जौ और उड़द का आटा और उसमें थोड़ी सी पीपल को डालकर तैयार की गई पूडि़यां और नारियल की खीर आदि का सेवन करने से हर तरह के धातु रोग नष्ट हो जाते हैं, वीर्य पुष्ट होता है और संभोग करने की शक्ति बढ़ती है।
लिंग को मजबूत करना 
  • सुअर की चर्बी और शहद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर लिंग पर लेप करने से लिंग में मजबूती आती है। 
  • हींग को देशी घी में मिलाकर लिंग पर लगा लें और ऊपर से सूती कपड़ा बांध दें। इससे कुछ ही दिनों में लिंग मजबूत हो जाता है। 
  • भुने हुए सुहागे को शहद के साथ पीसकर लिंग पर लेप करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है। 
  • जायफल को भैंस के दूध में पीसकर लिंग पर लेप करने के बाद ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं। सुबह इस पत्ते को खोलकर लिंग को गर्म पानी से धो लें। इस क्रिया को लगभग 3 सप्ताह करने से लिंग पुष्ट हो जाता है। 
  • शहद को बेलपत्र के रस में मिलाकर लेप करने से हस्तमैथुन के कारण होने वाले विकार दूर हो जाते हैं और लिंग मजबूत हो जाता है। 
  • रीठे की छाल और अकरकरा को बराबर मात्रा में लेकर शराब में मिलाकर खरल कर लें। इसके बाद लिंग के आगे के भाग को छोड़कर लेप करके ऊपर से ताजा साबुत पान का पत्ता बांधकर कच्चे धागे से बांध दें। इस क्रिया को नियमित रूप से करने से लिंग मजबूत हो जाता है। 
  • बकरी के घी को लिंग पर लगाने से लिंग मजबूत होता है और उसमें उत्तेजना आती है। बेल के ताजे पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर लगाने से लिंग में ताकत पैदा हो जाती है। 
  • धतूरा, कपूर, शहद और पारे को बराबर मात्रा में मिलाकर और बारीक पीसकर इसके लेप को लिंग के आगे के भाग (सुपारी) को छोड़कर बाकी भाग पर लेप करने से संभोग शक्ति तेज हो जाती है। 
  • असगंध, मक्खन और बड़ी भटकटैया के पके हुए फल और ढाक के पत्ते का रस, इनमें से किसी भी एक चीज का प्रयोग लिंग पर करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली बनता है।
  • पालथ लंगी का तेल, सांडे का तेल़, वीर बहूटी का तेल, मोर की चर्बी, रीछ की चर्बी, दालचीनी का तेल़, आधा भाग लौंग का तेल, 4 भाग मछली का तेल को एकसाथ मिलाकर कांच के चौड़े मुंह में भरकर रख लें। इसमें से 8 से 10 बूंदों को लिंग पर लगाकर ऊपर से पान के पत्ते को गर्म करके बांध लें। इस क्रिया को लगातार 1 महीने तक करने से लिंग का ढीलापन समाप्त हो जाता है़, लिंग मजबूत बनता है। इस क्रिया के दौरान लिंग को ठंडे पानी से बचाना चाहिए। 
  • जानकारी लिंग की मालिश या लेप करते समय एक बात का ध्यान रखें कि लिंग के मुंह के नीचे सफेद रंग का बदबूदार मैल जमा हो जाता है। इस मैल को समय-समय ठंडे पानी से धोकर साफ करते रहने चाहिए। 

यौन-शक्ति बढ़ाने के प्रभावी घरेलु उपाय: 
1) लहुसन:- कच्चे लहसुन की 2-3 कलियो का प्रतिदिन सेवन करना यौन-शाक्ति बढ़ाने का बेहतरीन घरेलु उपचार है
2) प्याज:- लहसुन के बाद प्याज एक और कारगर उपाय है। सफेद कच्चे प्याज का प्रयोग अपने नित्य आहार मे करें
3) काले चने:- काले-चने से बने खाद्य-पदार्थ जैसे डोसा आदि का हफ्ते मे 2-3 बार प्रयोग काफी लाभकारी होता है
4) गाजर:- 150 ग्राम बारीक कटी गाजर को एक उबले हुए अंडे के आधे हिस्से मे एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में एक बार सेवन करे। इसका प्रयोग लगातार 1-2 महीने तक करें
5) भिंडी:- प्राचीन भारतीय साहित्य के अनुसार 5-10 ग्राम भिंडी की ज़ड के पाउडर को एक गिलास दूध तथा दो चम्मच मिश्री मे मिलाकर नित्य सेवन करने से आपकी यौन-शक्ति कभी कम नही प़डेगी
6) सफे द मूसली:- यूनानी चिकित्सा के अनुसार सफेद मूसली का प्रयोग भी बेहद लाभदायक होता है। 15 ग्राम सफेद मूसली को एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से यौन-शक्ति बढ़ती है।
7) सहजन:- 15 ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। यौन-टौनिक के रूप मे इसका सेवन करे
8) अदरक:- आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा, सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करे
9) खजूद:- बादाम, पिस्ता खजूर तथा श्रीफल के बीजो को बराबर मात्रा मे लेकर मिश्रण बनाए। प्रतिदिन 100 ग्राम सेवन करे
10) किशमिश:- 30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन करे। ध्यान रखिए की प्रत्येक बार ताजा मिश्रण तैयार करे। धीरे धीरे 30 ग्राम किशमिश की मात्रा को 50 ग्राम तक करें।
11) ताजे फलो का सेवन:- यौन-शक्ति कमजोरी से पीडित रोगियो को शुरू में 5-5 घंटे के अंतराल से विशेष रूप से ताजा फलो का आधार लेना चाहिए उसके बाद वह पुन: अपनी नियमित खुराक धीरे-धीरे प्रारंभ कर सकते है। रोगी को धूम्रपान , शराब चाय तथा कॉफी के सेवन से बचना चाहिए, और विशेष रूप से सफेद चीनी तथा मैदे या उनसे बने उत्पादो का परहेज करना चाहिए।
यौन-शाक्ति बढ़ाने के अन्य उपाय:- 
1) मालिश: सारे शरीर पर एक जोरदार मालिश, शरीर की सुस्त प़डी मांसपेशियो तथा तंत्रिकाओ को ऊर्जा प्रदान कर पुन:जीवित करने मे मदद करती है।
2) ठंडा हिप स्त्रान: यौन अंगो की नसे श्रोणि क्षेत्र से नियत्रिंत होती है, इसलिए सुबह या शाम को दस मिनट के लिए ठंडा हिप स्त्रान अवश्य ले।
3) योगासन: योगा, ध्यान और ऎसी कई अन्य सकारात्मक ऊर्जा तकनीकियों का प्रयोग करे जो आपके दिमाग को तनाव से मुक्त करता है तथा यौन ऊर्जा बढ़ाता है। द्रोणासन, सर्वागआसन, हलासन जैसे योगसान यौन-शक्ति बढ़ाने मे अत्यधिक लाभदायक होते है।
4) अंतराल: सेक्स दैनिस दिनचर्या का अभिन्न अंग है, हो सकता है कि आप इससे उबाऊ महसूस करने लगे इसलिए यौन-संबंध रोजाना ना बनाए, एक या दो दिन का अंतराल अवश्य रखे।
5) मुद्राऎं : सेक्स भी एक कला है जिसे हमारी ऎतिहासिक पुस्तको मे विस्तार से समझाया गया है, जिस प्रकार नृत्यकला की मुद्राए होती है। उसी प्रकार यौन क्रियाओं क भी विभिन्न मुद्राऎं होती है। नित्य नई मुद्राओं का प्रयोग आपके यौन-जीवन मे नयेपन के साथ-साथ आपको फिट भी रखेगा। किसी मनोचिकित्सक की सलाह अवश्य ले इस बात का विशेष ध्यान रखिए कि आपक कोई भी उपाय चुने परन्तु उसका पूरी नियमितता के साथ प्रयोग करे ये अवश्य लाभदायक सिद्ध होगा और आप अपने यौन-जीवन को और अधिक सुखमय बना पायेगे।
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सर्दी का लगना बेहद खतरनाक होता है। सर्दी के असर से सभी लोग प्रभावित होते हैं। लेकिन छोटे बच्चों को ठंड बड़ी जल्दी लग जाती है। जिसकी वजह से वे कई तरह के रोगों से ग्रसित हो जाते हैं। ऐसा ही एक रोग है निमोनिया । यह एक खतरनाक रोग है जिससे जान तक जाने का खतरा हो सकता है। निमोनिया बच्चे को हो जाने के बाद उसे तरह-तरह की परेशानिया आने लगती है। इसलिए आपको इस बात की जानकारी का होना जरूरी है कि कैसे निमोनिया के रोग से बच्चों का बचाया जा सकता है।
निमोनिया क्या है
यह एक तरह का वायरस है जो फेफड़ों में तरल पदार्थ को जमा करके खून और हवा के बहाव को रोकता है जिससे तेज बुखार, बलगम वाली खांसी, सीने में दर्द और सांस का तेजी से चलना आदि प्रमुख लक्षण होते हैं।
बच्चों में न्यूमोनिया के कई लक्षण होते हैं-
  • बच्चे को सांस लेने में परेशानी का होना।
  • घरघराहट की आवाज आना।
  • पेट और छाती में दर्द।
  • नाखूनों का रंग नीला पड़ना ।
  • उल्टी आना।
  • जोड़ों में दर्द होना।
  • थकान।

कैसे फैलता है निमोनिया
निमोनिया का रोग कई तरह से फैल सकता है। इस रोग का वायरस बच्चे के गले या नाक में पाए जाते हैं और वे सांस के जरिए फेफड़ों में जा सकते हैं। कुपोषण, स्तनपान की कमी और अस्वस्थ वातावरण की वजह से निमोनिया से ग्रसित बच्चे की मौत तक हो सकती है। इसलिए इस बारे में सभी लोगों को जागरूक होना चाहिए।
निमोनिया छींक व खांसी से हवा नली के द्वारा भी फैल सकता है।
उचित पौष्टिक आहार, स्वच्छ पर्यावरण और वैक्सीन के द्वारा इस रोग को रोका जा सकता है।
कवर रखना
बच्चे को निमोनिया की मुख्य वजह सर्दी का लगना होता है। ऐसे में ठंड बच्चे को दो तरह से वार करती है पहला पैरों के रास्ते और दूसरा सिर के रास्ते। इन दोनों जगह पर सर्दी का असर बच्चे को बड़ी जल्दी होता है। इसलिए सिर और पैरों को ढ़क के रखना जरूरी है।
बादाम व मुनक्का
निमोनिया से बचने के लिए बच्चे को बादाम और मुनक्का को मिलाकर देना चाहिए। इससे बच्चों की इमयूनिटी पावर बढ़ती है और वे तन्दरूस्त रहते हैं। मुनक्के और बादाम के इस्तेमाल से बच्चे के खून मे गर्मी पैदा होती है और वे इस बीमारी से आसानी से बच जाते हैं।
शहद
बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए शहद महत्वपूर्ण औषधि है। शहद में हर फूल का रस मौजूद होता है जिससे शरीर का बीमार होने की संभावना कम हो जाती है। कलौंजी के तेल में शहद को मिलाकर बच्चे को देने से निमोनिया रोग दूर हो जाता है।
जैतून का तेल
जैतून का तेल अधिक गर्म होता है। रात को सोते समय बच्चों के सिर पर जैतून के तेल से मालिश करनी चाहिए। जिससे बच्चे का शरीर गर्म बना रहता है। जैतून के तेल की मालिश बच्चे के पैरों के तलवों पर भी करनी चाहिए इससे बच्चे निमोनिया की बीमारी से बचे रहते हैं।
वैक्सीन
निमोनिया को रोकने के लिए हायमोफील्स एनफलुएंजा टाईप बी और नियूमोकोकल कोंजूगेट टीके मौजूद हैं। जो बच्चे को निमोनिया से बचाते हैं। भारत में जानकारी न होने की वजह से और मंहगी कीमत से बच्चों को ये टीके नहीं लगाए जाते हैं।
निमोनिया से बचने के अन्य उपचार
  • पांच हरे पत्ते तुलसी के, तीन ग्राम मिश्री और पांच काली मिर्च को एक साथ मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। सुबह और शाम पानी के साथ एक गोली जरूर लें।
  • निमोनिया से ग्रसित बच्चे को गर्म पानी व फलों का रस बीच-बीच में पिलाते रहना चाहिए।
  • लहसुन की 4 कलियों को सरसों के तेल के साथ गर्म करके बच्चे की मालिश करें।
  • तुलसी के तीन पत्तों को पीसकर सुबह-सुबह पानी के साथ सेवन करें। यह भी निमोनिया से बचाव करता है।
  • दूध में थोड़ा केसर मिलाकर बच्चे को दिन में दो बार पिलाएं।
  • सर्दियों के मौसम में बच्चे को धूप में रखना चाहिए।
  • यदि इन उपचारों से बच्चे की हालत नहीं सुधरती है तो उसे तनिक भर की देर किए बिना डाक्टर को दिखा लेना चाहिए।
  • बच्चे को इस बीमारी से बचाने के लिए उसे वैक्सीन यानी टीका जरूर लगवाना चाहिए। यह न्यूमोनिया के खतरे को कम कर देता है।
  • वे बच्चे जो समय से पहले हो जाते हैं उन्हं न्यूमोनिया खतरा अधिक रहता है। इसलिए समय-समय पर बच्चों की डाक्टरी जांच जरूर करवानी चाहिए।

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