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प्याज का रस आठ मिली. + अदरक का रस छह मिली. + गाय का घी एक ग्राम + शहद दो ग्राम इन सभी चार औषधियों को मिला कर लगातार दो माह तक प्रयोग करा जाए तो मूर्खतापूर्ण कारणों से वीर्य का नाश कर चुके व लगभग नपुंसक हो चुके लोगों में भी नयी पौरुष ऊर्जा का संचार होने लगता है। औषधि सेवन काल में खट्टी चीजों का सेवन न करा जाए, नशीले पदार्थों का भी प्रयोग बंद कर दिया जाए, स्त्री सहवास से भी दूर रहें अन्यथा एक ओर तो ताकत एकत्र करने का जतन करा जाए और दूसरी ओर सारी ताकत को व्यय कर दिया जाए तो परिणाम शून्य ही रहने वाला है इसलिये धैर्य अत्यंत आवश्यक है। औषधि सेवन के दौरान यदि कब्जियत का अनुभव हो तो त्रिफला चूर्ण आदि का सेवन करें ताकि कब्जियत न रहे।

विशेष :-

किसी भी आयुर्वेदिक रसोषधि के सेवन से [पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य करे |

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सर मेरी उम्र उनचास साल है। अपनी सारी रिपोर्ट्स आपको भेज रहा हूँ मैं एक डायबिटीज़ का मरीज़ हूँ। शुगर लेवल ऊपर नीचे होता रहता है खानपान और परिस्थितियों के अनुसार लेकिन मैं जो परेशानी खास तौर पर देख रहा हूँ वो ये है कि मेरी सेक्स लाइफ़ खत्म हो गयी है। डॉक्टर का कहना है कि इस तरह की नपुंसकता मुझे मेरी शुगर की प्रॉब्लम के कारण हुई है क्या आयुर्वेद में मेरे लिये कोई इलाज है? राजशेखर सिंह नई दिल्ली 
राजशेखर जी, आपकी रिपोर्ट्स को देखा और आपकी समस्या को समझा। आप यदि मधुमेह का सही उपचार लेकर अथवा आहार-विहार, आचार-विचार पर नियंत्रण रख कर अपनी शर्करा का स्तर सामान्य रखते हैं तो आपकी परेशानी का आयुर्वेद में सटीक उपचार है आप जरा भी परेशान न हों। आपने लिंग का उत्थान न होना, उत्तेजना का पूरी तरह समाप्त होजाना जैसे लक्षणों को अपने बड़े लम्बे से पत्र में विस्तार से लिखा है जिन्हें मैं समझ सकता हूँ। आपकी मधुमेह जन्य नपुंसकता की समस्या का हल प्रस्तुत है आप निम्न औषधियाँ चालीस दिन तक लीजिये। विश्वास करिये कि न सिर्फ़ आपकी लैंगिक समस्या हल हो जाएगी बल्कि आपकी मधुमेह (डायबिटीज़) के बाकी उपद्रव जैसे बार बार प्यास लगना, पेशाब लगना, भूख का बुरी तरह से प्रभावित करना, भयंकर कमजोरी आ जाना आदि अपने आप खत्म हो जाएंगे और शर्करा का स्तर भी नियंत्रित रहेगा। 
१.प्रमदेभांकुश रस एक गोली + पुष्पधन्वा रस एक गोली + बसंतकुसुमाकर रस एक गोली इन तीनों की एक खुराक बना कर दिन में दो बार नीचे लिखे मिश्रण के दो चम्मच के साथ भोजन के बाद लीजिये
 २.अश्वगंधारिष्ट + दशमूलारिष्ट + अर्जुनारिष्ट + बलारिष्ट बराबर मात्रा(प्रत्येक १०० मिली.) में लेकर इसमें शुद्ध शिलाजीत १० ग्राम घोल दीजिये, शक्ति मिश्रण तैयार है। यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे मोबाइल नंबर Whatsapp: 9911686262 पर संपर्क करें।

सर मेरी समस्या आपके लिये शायद छोटी हो सकती है लेकिन मेरे लिये बड़ी मुसीबत है। मेरा कद पाँच फुट सात इंच है और मैं देखने में स्वस्थ दिखता हूँ। सचमुच मुझे कोई बीमारी नहीं है लेकिन मेरी शादी के बाद से मुझे पता चला कि मेरे लिंग का आकार इतना बड़ा और मोटा नहीं है कि मैं अपनी पत्नी को संतुष्ट कर सकूं। मेरी पत्नी ने मुझसे सीधे सीधे तो कुछ नहीं कहा लेकिन फिर भी दबी जबान में कह ही दिया कि आप तो बच्चे जैसे हैं पहले मैं इस बात का अर्थ नहीं समझ सका लेकिन दो माह गुजरने के बाद उसने बता ही दिया कि वो मुझे बच्चे जैसा क्यों कहती है। अब आप ही बताइये कि मैं क्या करूं क्योंकि शादी से पहले मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है क्योंकि मैं अपने व्यापार आदि में काफ़ी व्यस्त रहा इन सब बातों के लिये समय ही नहीं रहा लेकिन अब आप बताएं कि मैं खुद को पत्नी के सामने कैसे पेश कर पाउंगा मुझे शर्म आती है और वो भी मन मार कर मेरी इच्छा रख लेती है। फ़िलहाल वह एक माह के लिये मायके में है। सुमित जैन, भायंदर 

सुमित जी आपकी समस्या छोटी है ये कहना सही न होगा। आपने काफ़ी लम्बा पत्र लिखा है जिसमें यही समस्या है कि आपके लिंग का आकार आपकी पत्नी के लिये संतुष्टिकारक नहीं है जैसा कि आपने शिथिल व उत्तेजित स्थिति का आकार भी पत्र में बताया है। आपने लिखा है कि समय आदि सब ठीक है तो मैं आपको औषधि बताता हूं आप उसे प्रयोग करें आशा है कि आपको पर्याप्त लाभ होगा- 
रस सिन्दूर २५ मिग्रा.+ मुक्ताशुक्ति भस्म २५ मिग्रा. + जावित्री १० मिग्रा. + स्वर्ण बंग २५ मिग्रा. + कुक्कुटाण्डत्वक भस्म २५ मिग्रा. + अश्वगंधा ५० मिग्रा. + शिलाजीत २५ मिग्रा. + शुद्ध विजया २५ मिग्रा. + गोखरू ५० मिग्रा. + शुद्ध हिंगुल २५ मिग्रा. + बबूल गोंद २५ मिग्रा. + विधारा ५० मिग्रा. + दालचीनी २५ मिग्रा. + कौंच बीज २५ मिग्रा. + तालमखाना २५ मिग्रा. + सफ़ेद मूसली २५ मिग्रा. + जायफल १० मिग्रा. + शतावर ५० मिग्रा. + लौंग १० मिग्रा. + बीजबन्द ५० मिग्रा. + सालम मिश्री ५० मिग्रा. 
इन सभी की एक खुराक बनेगी आप इसी अनुपात में औषधियाँ मिला कर अपनी जरूरत के अनुसार दवा बना लें व सुबह नाश्ते तथा रात्रि भोजन के बाद एक एक खुराक मीठे दूध से लीजिये। दूसरी दवा लिंग पर लगाने के लिये है इससे आपको कोई नुक्सान नहीं होगा इसलिए परेशान न हों। 
अश्वगंधा तेल १० ग्राम + मालकांगनी तेल १० ग्राम + श्रीगोपाल तेल १० ग्राम + लौंग का तेल २ ग्राम + निर्गुण्डी का तेल १० ग्राम इन सब को मिला कर इसमें केशर १ ग्राम + जायफल २ ग्राम + दालचीनी २ ग्राम । इन सबको कस कर घुटाई कर लें तो क्रीम की तरह बन जाएगा। इसे किसी मजबूत ढक्कन की काँच या प्लास्टिक की चौड़े मुँह की शीशी में रख लीजिये। इसे नहाने के बाद अंग सुखा कर भली प्रकार हल्के हाथ से मालिश करते हुए अंग में जाने दें। लगभग दस मिनट में यह क्रीम लिंग में अवशोषित हो जाएगी। इस प्रकार यदि दिन में समय मिले तो दो बार क्रीम लगाएं। ध्यान दीजिये कि औषधि प्रयोग काल में सम्भोग या हस्तमैथुन न करें। यदि आप लगभग तीन माह तक इस प्रयोग को करें तो स्थायी लाभ होगा। यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे मोबाइल नंबर Whatsapp: 9911686262 पर संपर्क करें।

प्रश्न:- सर जी मै मेरी अभी अभी नयी नयी शादी हुई है। मैं जैसे ही संभोग करना शुरू करता हूं कुछ ही सेकेंड में चिपचिपा सा पदार्थ मेरे लिंग से निकलने लगता है जो कि पानी जैसा होता होता है और मेरे लिंग का तनाव बिलकुल समाप्त हो जाता है बिना वीर्य निकले ही लिंग पूरी तरहा शिथिल हो जाता है और फिर मैं संभोग करने में अक्षम हो जाता हूं ये कौन सी बिमारी है और क्या ये ठीक हो सकती है कृपया इलाज बतायें । रमन कुमार उम्र ३२ वर्ष हरियाणा
 

उत्तर :-  भाई रमन कुमार जी ये एक जटिल रोग है जो थोडा लंबा इलाज लेने पर निश्चित रूप से ठीक हो जाता है । वीर्य को होल्ड करने वाली नसे जब अपनी क्षमता खो देती है तो वाह बिना किसी प्रयास के पतला होकर रिसने लगता है वीर्य का रिसावं होते ही लिंग शिथिल हो जाता है और हं सेक्स करने में असमर्थ हो जाते हैं इसमें आपको वीर्य को गाढा करने वाली और लिंग को द्रढ बनाने वाली औषधियों का सेवन करना चाहिये आप जरूर ठीक हो जायेंगे चिंता मत किजीये ।नीचे लिखी हुई दवाये ले कते हैं आप 
१ > आवळा  पाऊडर एक चम्मच रोज पानी से 
२>तालमखाना मिश्री और गोखरू चूर्ण मिळकर एक चम्मच रोज 
३> स्वर्ण युक्त शिलाजीत एक  टेबलेट रोज पानी से 
४>अशवगंधा चांदी युक्त एक गोली पानी से 
५>शुक्रवल्लभ रस वीर्य को गाडा करने के लिये एक गोली  रोज 
६>चंद्रप्रभा वटी शाम को २ गोली 
७>वृष्य वटी नाश्ते के बाद एक गोली 
८>धातुपौष्टिक चूर्ण रोज एक चम्मच 
९>सवर्णयुक्त मकरध्वज एक गोली रोज नाश्ते बाद 
१०> १ग्राम केशर में १० मिलीअशवगंधा तेल ,श्रीगोपाल तेल १० मिली ,मालकांगनी तेल १० मिली ,कलौजी तेल १० मिली ,निर्गुंडी तेल १० मिली ,जायफळ पाऊडर १ग्राम ,दालचिनी पाऊडर १ ग्राम ,लौग तेल ५मिली ,सवर्ण वांगेशवर भसम एक ग्राम सबको मिलाकर घोंट लें और लिंग पर नहाने के बाद १० मिनटं तक मालिश करे यदि दिन में समय मिले तो दो बार क्रीम लगायें,  यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे मोबाइल नंबर Whatsapp-9911686262 पर संपर्क करें।
यौनशक्ति और कामशक्ति बढ़ाने के उपाय लिंग में कड़ापन और वीर्य गाढ़ा करने के सरल नुस्खे Enjoy married life must adopt it 
यौन-संबध बनाने के लिए जितना ध्यान मानसिक तैयारी और कामात्तेजना को देना चाहिए उतना ही ध्यान अपनी यौन-शाक्ति पर भी देना आवश्यक है। यौन-शक्ति के अभाव मे एक बेहतरीन रोमांटिक माहौल में भरपूर तैयारी के साथ बनाया गया संबंध कारगर साबित नही होता है और आप यौन-सुख से वंचित रह जाते है। जिन व्यक्तियों में यौन-शक्ति का अभाव होता है वह सेक्स के दौरान थो़डी देर मे ही खुद को कमजोर महसूस करने लगते है। इस अभाव के कारण अधिकतर लोगो में शामिदंर्गी का बोध बढ़ जाता है और वह अपने साथी के साथ यौन-संबंध बनाने मे झिझकने लगते है। हाल ही मे वैज्ञानिको द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार यह पाया गया है कि शारीरिक रूप से कमजोर और अस्वस्थ लोगो मे यौन-शक्ति की कमी होने की संभावना अधिक होती है। आइए इसके अन्य कारणो तथा निवारणो पर विचार करते है
यौन-शक्ति क्षीण होने के कारण -
डिपरेशन: बहुत अधिक तनाव से होने वाले हार्मोनल परिवर्तन, पौष्टिक विकार, यौन-शाक्ति कम करने के मुख्य कारणों मे से एक है।
भारी व जटिल व्यायाम: आवश्यकता से अधिक भारी-भरकम व्यायामो का प्रशिक्षण शरीर मे उपस्थित आवश्यक वसा को कम कर देता है, जिसका असर शरीर मे जरूरी मेटाबोलिजम तथा अन्य हार्मोनो पर प़डता है और यौन-शक्ति मे कमी आने लगती है
आहार: गर्म तथा अधिक मसालेदार आहर का प्रयोग भी इसका एक कारण है
शराब का दुरूपयोग: शराब-सिगरेट तथा तंबाकु के अत्याधिक सेवन से जननांग की कोशिकाए शीथल प़ड जाती है। जो यौन-शक्ति कमजोर होने का मुख्य कारण है। एक लौंग को चबाकर उसकी लार को लिंग के पिछले भाग पर लगाने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है। लगभग 10-10 ग्राम सफेद प्याज का रस और शहद, 2 अंडे की जर्दी और 25 मिलीलीटर शराब को एक साथ मिलाकर रोजाना शाम के समय लेने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है। लगभग 5 बादाम की गिरी, 7 कालीमिर्च और 2 ग्राम पिसी हुई सोंठ तथा जरूरत के अनुसार मिश्री को एक साथ मिलाकर पीस लें और फंकी लें। इसके ऊपर से दूध पी लें। इस क्रिया को कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से संभोगक्रिया के समय जल्दी वीर्य निकलने की समस्या दूर हो जाती है। उड़द की दाल को पानी में पीसकर पिट्ठी बनाकर कढ़ाई में लाल होने तक भून लें। इसके बाद गर्म दूध में इस पिसी हुई दाल को डालकर खीर बना लें। अब इसमें मिश्री मिलाकर किसी कांसे या चांदी की थाली में परोसकर सेवन करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है। इस खीर को लगभग 40 दिनों तक प्रयोग करने से लाभ होता है।

वीर्य को बढ़ाना 
इमली के बीजों को पानी में छिलका उतरने तक भिगो लें। इसके बाद इन बीजों का छिलका उतारकर चूर्ण बना लें। इसके लगभग आधा किलो चूर्ण में इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें। इसमें से लगभग 2 ग्राम चूर्ण को लगभग 40 दिनों तक नियमित रूप से फांकने के बाद ऊपर से दूध पीने से वीर्य गाढ़ा होता है और शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है।
बरगद के पके हुए फलों को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और इसमें मिश्री मिलाकर रख लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में रोजाना शाम को दूध के साथ लेने से एक सप्ताह के बाद ही वीर्य गाढ़ा होना शुरू हो जाता है। इस चूर्ण को लगभग 40 दिनों तक सेवन किया जा सकता है। लगभग आधा किलो देशी फूल की कच्ची कलियों को डेढ़ लीटर पानी में डालकर उबाल लें। पानी उबलने के बाद जल जाने पर इस मिश्रण को बारीक पीसकर 5-5 ग्राम की गोलियां बनाकर एक कांच के बर्तन में रखकर ऊपर से ढक्कन लगा दें। इसमें से 1 गोली को रोजाना सुबह के समय दूध के साथ लेने से संभोग करने की शक्ति बढ़ती है और वीर्य भी मजबूत होता है।
लगभग 10 ग्राम बिदारीकंद के चूर्ण को गूलर के रस में मिलाकर चाट लें। इसके ऊपर से घी मिला हुआ दूध पीने से जो व्यक्ति संभोग क्रिया में पूरी तरह से सक्षम नहीं होते उनके शरीर में भी यौन शक्ति का संचार होने लगता है। देशी फूल की तुरंत उगी अर्थात नई कोंपलों को सुखाकर और पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को रोजाना 6 ग्राम की मात्रा में फांककर ऊपर से मिश्री मिला हुआ दूध पीने से वीर्य पुष्ट होता है। इसके अलावा इसका सेवन करने से पेशाब के साथ वीर्य का आना और स्वप्नदोष जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।
चिरौंजी, मुलहठी और दूधिया बिदारीकंद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को लगभग 1 सप्ताह तक लेने से और ऊपर से दूध पीने से वीर्य के सारे दोष दूर होते हैं और वीर्य बढ़ जाता है।
सोंठ, सतावर, गोरखमुंडी, थोड़ी सी हींग और देशी खांड को एक साथ मिलाकर सेवन करने से लिंग मजबूत और सख्त होता है और बुढ़ापे तक ऐसा ही रहता है। इसके अलावा इसको लेने से वीर्य बढ़ता है और शीघ्रपतन जैसे रोग दूर हो जाते हैं। इस चूर्ण का सेवन करते समय गुड़ और खट्टे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
सिंघाड़े के आटे का हलुआ, उड़द और चने की दाल का हलुआ, अंडों की जर्दी का गाय के घी में तैयार किया हुआ हलुआ, मेथी और उड़द की दाल के लडडू, आंवले की चटनी, गेहूं, चावल, बराबर मात्रा में जौ और उड़द का आटा और उसमें थोड़ी सी पीपल को डालकर तैयार की गई पूडि़यां और नारियल की खीर आदि का सेवन करने से हर तरह के धातु रोग नष्ट हो जाते हैं, वीर्य पुष्ट होता है और संभोग करने की शक्ति बढ़ती है।
लिंग को मजबूत करना 
  • सुअर की चर्बी और शहद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर लिंग पर लेप करने से लिंग में मजबूती आती है। 
  • हींग को देशी घी में मिलाकर लिंग पर लगा लें और ऊपर से सूती कपड़ा बांध दें। इससे कुछ ही दिनों में लिंग मजबूत हो जाता है। 
  • भुने हुए सुहागे को शहद के साथ पीसकर लिंग पर लेप करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है। 
  • जायफल को भैंस के दूध में पीसकर लिंग पर लेप करने के बाद ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं। सुबह इस पत्ते को खोलकर लिंग को गर्म पानी से धो लें। इस क्रिया को लगभग 3 सप्ताह करने से लिंग पुष्ट हो जाता है। 
  • शहद को बेलपत्र के रस में मिलाकर लेप करने से हस्तमैथुन के कारण होने वाले विकार दूर हो जाते हैं और लिंग मजबूत हो जाता है। 
  • रीठे की छाल और अकरकरा को बराबर मात्रा में लेकर शराब में मिलाकर खरल कर लें। इसके बाद लिंग के आगे के भाग को छोड़कर लेप करके ऊपर से ताजा साबुत पान का पत्ता बांधकर कच्चे धागे से बांध दें। इस क्रिया को नियमित रूप से करने से लिंग मजबूत हो जाता है। 
  • बकरी के घी को लिंग पर लगाने से लिंग मजबूत होता है और उसमें उत्तेजना आती है। बेल के ताजे पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर लगाने से लिंग में ताकत पैदा हो जाती है। 
  • धतूरा, कपूर, शहद और पारे को बराबर मात्रा में मिलाकर और बारीक पीसकर इसके लेप को लिंग के आगे के भाग (सुपारी) को छोड़कर बाकी भाग पर लेप करने से संभोग शक्ति तेज हो जाती है। 
  • असगंध, मक्खन और बड़ी भटकटैया के पके हुए फल और ढाक के पत्ते का रस, इनमें से किसी भी एक चीज का प्रयोग लिंग पर करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली बनता है।
  • पालथ लंगी का तेल, सांडे का तेल़, वीर बहूटी का तेल, मोर की चर्बी, रीछ की चर्बी, दालचीनी का तेल़, आधा भाग लौंग का तेल, 4 भाग मछली का तेल को एकसाथ मिलाकर कांच के चौड़े मुंह में भरकर रख लें। इसमें से 8 से 10 बूंदों को लिंग पर लगाकर ऊपर से पान के पत्ते को गर्म करके बांध लें। इस क्रिया को लगातार 1 महीने तक करने से लिंग का ढीलापन समाप्त हो जाता है़, लिंग मजबूत बनता है। इस क्रिया के दौरान लिंग को ठंडे पानी से बचाना चाहिए। 
  • जानकारी लिंग की मालिश या लेप करते समय एक बात का ध्यान रखें कि लिंग के मुंह के नीचे सफेद रंग का बदबूदार मैल जमा हो जाता है। इस मैल को समय-समय ठंडे पानी से धोकर साफ करते रहने चाहिए। 

यौन-शक्ति बढ़ाने के प्रभावी घरेलु उपाय: 
1) लहुसन:- कच्चे लहसुन की 2-3 कलियो का प्रतिदिन सेवन करना यौन-शाक्ति बढ़ाने का बेहतरीन घरेलु उपचार है
2) प्याज:- लहसुन के बाद प्याज एक और कारगर उपाय है। सफेद कच्चे प्याज का प्रयोग अपने नित्य आहार मे करें
3) काले चने:- काले-चने से बने खाद्य-पदार्थ जैसे डोसा आदि का हफ्ते मे 2-3 बार प्रयोग काफी लाभकारी होता है
4) गाजर:- 150 ग्राम बारीक कटी गाजर को एक उबले हुए अंडे के आधे हिस्से मे एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में एक बार सेवन करे। इसका प्रयोग लगातार 1-2 महीने तक करें
5) भिंडी:- प्राचीन भारतीय साहित्य के अनुसार 5-10 ग्राम भिंडी की ज़ड के पाउडर को एक गिलास दूध तथा दो चम्मच मिश्री मे मिलाकर नित्य सेवन करने से आपकी यौन-शक्ति कभी कम नही प़डेगी
6) सफे द मूसली:- यूनानी चिकित्सा के अनुसार सफेद मूसली का प्रयोग भी बेहद लाभदायक होता है। 15 ग्राम सफेद मूसली को एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से यौन-शक्ति बढ़ती है।
7) सहजन:- 15 ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। यौन-टौनिक के रूप मे इसका सेवन करे
8) अदरक:- आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा, सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करे
9) खजूद:- बादाम, पिस्ता खजूर तथा श्रीफल के बीजो को बराबर मात्रा मे लेकर मिश्रण बनाए। प्रतिदिन 100 ग्राम सेवन करे
10) किशमिश:- 30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन करे। ध्यान रखिए की प्रत्येक बार ताजा मिश्रण तैयार करे। धीरे धीरे 30 ग्राम किशमिश की मात्रा को 50 ग्राम तक करें।
11) ताजे फलो का सेवन:- यौन-शक्ति कमजोरी से पीडित रोगियो को शुरू में 5-5 घंटे के अंतराल से विशेष रूप से ताजा फलो का आधार लेना चाहिए उसके बाद वह पुन: अपनी नियमित खुराक धीरे-धीरे प्रारंभ कर सकते है। रोगी को धूम्रपान , शराब चाय तथा कॉफी के सेवन से बचना चाहिए, और विशेष रूप से सफेद चीनी तथा मैदे या उनसे बने उत्पादो का परहेज करना चाहिए।
यौन-शाक्ति बढ़ाने के अन्य उपाय:- 
1) मालिश: सारे शरीर पर एक जोरदार मालिश, शरीर की सुस्त प़डी मांसपेशियो तथा तंत्रिकाओ को ऊर्जा प्रदान कर पुन:जीवित करने मे मदद करती है।
2) ठंडा हिप स्त्रान: यौन अंगो की नसे श्रोणि क्षेत्र से नियत्रिंत होती है, इसलिए सुबह या शाम को दस मिनट के लिए ठंडा हिप स्त्रान अवश्य ले।
3) योगासन: योगा, ध्यान और ऎसी कई अन्य सकारात्मक ऊर्जा तकनीकियों का प्रयोग करे जो आपके दिमाग को तनाव से मुक्त करता है तथा यौन ऊर्जा बढ़ाता है। द्रोणासन, सर्वागआसन, हलासन जैसे योगसान यौन-शक्ति बढ़ाने मे अत्यधिक लाभदायक होते है।
4) अंतराल: सेक्स दैनिस दिनचर्या का अभिन्न अंग है, हो सकता है कि आप इससे उबाऊ महसूस करने लगे इसलिए यौन-संबंध रोजाना ना बनाए, एक या दो दिन का अंतराल अवश्य रखे।
5) मुद्राऎं : सेक्स भी एक कला है जिसे हमारी ऎतिहासिक पुस्तको मे विस्तार से समझाया गया है, जिस प्रकार नृत्यकला की मुद्राए होती है। उसी प्रकार यौन क्रियाओं क भी विभिन्न मुद्राऎं होती है। नित्य नई मुद्राओं का प्रयोग आपके यौन-जीवन मे नयेपन के साथ-साथ आपको फिट भी रखेगा। किसी मनोचिकित्सक की सलाह अवश्य ले इस बात का विशेष ध्यान रखिए कि आपक कोई भी उपाय चुने परन्तु उसका पूरी नियमितता के साथ प्रयोग करे ये अवश्य लाभदायक सिद्ध होगा और आप अपने यौन-जीवन को और अधिक सुखमय बना पायेगे।
https://www.jantaayurved.in/p/blog-page_9.html

यह सभी वर्गों के पुरुषों के लिये अत्यंत उत्तम स्वास्थ्यवर्धक वटी ( टैबलेट) है जो कि बेहद प्रभावी तथा बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का बेहतरीन मिश्रण करके बनाई गयी है। इसमें शुद्ध शिलाजीत, मकरध्वज, बंग भस्म, अभ्रक भस्म २०० पुटी, जायफल, लवंग, कर्पूर, इलायची, अश्वगंधा, शुद्ध व उच्च कोटि के काश्मीरी केसर(ज़ाफ़रान) का योग दुर्लभ व बिजली जैसी ताकत प्रदान करने वाला महाशक्तिशाली योग है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को जिन चमत्कारिक औषधियों के कारण संसार भर में जाना व सम्मान करा जाता है उनमें से शिलाजीत तथा मकरध्वज प्रमुख हैं। इन्हीं अनुपम रसायनों के मिश्रण से इस महौषधि को तैयार करा गया है। इनके अतिरिक्त जिन औषधियों का व्यवहार इसमें करा गया है वे भी अत्यंत प्रभावशाली व असरकारक हैं। इस योग के प्रभाव से वीर्य संबंधी सारे विकारों एवं रोगों में आश्चर्यजनक लाभ होता है। ये जादुई असर समेटे गोलियां भोजन को पचाकर रस आदि शरीर की सप्त धातुओं को क्रमशः सुधारती हुई देह की अंतिम धातु "वीर्य" का शुद्ध स्थिति में निर्माण करती हैं जिससे कि शरीर में नवजीवन व स्फूर्ति का संचार होता है। जो व्यक्ति शिलाजीत और मकरध्वज के गुणों के बारे में जानते हैं वे इस औषधि के प्रभाव के बारे में जरा भी संदेह नहीं कर सकते हैं। ये अनुपान भेद(दवा लेने के तरीके से यानि दूध, शहद, पानी, मलाई, मक्खन आदि) से अनेक रोगों को तत्काल दूर करने में सहायक हैं। प्रमेह के साथ होने वाली खांसी, सर्दी, जुकाम, कमर दर्द, भूख की एकदम कमी, स्मरण शक्ति यानि याददाश्त की कमी जैसी व्याधियां इस महौषधि के सेवन से दूर हो जाती हैं। इसके सेवन से शरीर पुष्ट हो जाता है साथ ही भूख लगने लगती है व पाचन सही तरीके से होने लगता है। इस प्रकार जो व्यक्ति अनेक औषधियां लगातार सेवन कर करके दवाओं का गोदाम बन गये हैं वे सभी बाजारू दवाएं छोड़ कर यदि मात्र इसी दवा का सर्दियों से मौसम में नियमित रूप से सेवन कर लें तो किसी दूसरी दवा की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है। चढ़ती जवानी में जब शरीर में हारमोनल परिवर्तन होते हैं यानि कि बचपन से जवानी में इन्सान कदम रखता है तो जब शरीर में वीर्य का प्रत्यक्ष प्रादुर्भाव होता है तो मानव देह में वह ताकत है जो कि शरीर में एक नए निर्माण की क्षमता पैदा करती है तो उसे सम्हाल पाना एक कठिन कार्य होता है जो कि सभी के वश में नहीं होता इसी कारण यह महाशक्ति हस्तमैथुन आदि के द्वारा देह से बाहर निकल जाती है। जब पारिवारिक जीवन को सही ढंग से चलाने के लिये उस वीर्य रूपी महाशक्ति की आवश्यकता पड़ती है तब तक खजाना खाली हो चुका होता है यानि जवानी आते-आते ही अच्छे-खासे जवान के चेहरे की रौनक और चमक गायब हो जाती है, संभोग के समय वीर्य संबंधी परेशानियां मुंह फाड़ कर सुरसा की भांति खड़ी हो जाती हैं और वैवाहिक जीवन का सत्यानाश हो जाता है। उम्र बढ़ने पर देह में निर्बलता का आना एक सहज सी प्रक्रिया है जो कि मेटाबालिक क्रियाओं के फलस्वरूप होता है और रोग प्रतिरोध क्षमता कम होने लगती है किन्तु यह महौषधि उस लुप्त होती शक्ति को पुनः उत्तेजित कर मनुष्य को सबल और निरोगी बनाए रखती है।इस महौषधि को अनेक समस्याओं में प्रयोग करा जा सकता है जैसे कि स्वप्न दोष(Night fall)या रात्रि में सोते समय अपने आप ही अंडकोश के स्राव का निकल जाने पर इसे सुबह-शाम दो गोली गुनगुने गर्म दूध में मिश्री(खड़ी साखर) मिला कर लेने से कुछ समय में यह रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। शीघ्रपतन(Premature ejaculation) यानि संभोग काल में बहुत जल्दी ही बिना संतुष्टि हुए वीर्य का निकल जाने पर इस महौषधि की दो गोली को रूमी मस्तंगी एक रत्ती(१२५ मिलीग्राम) + छह रत्ती सफेद मूसली के साथ गुठली निकाले छुहारे के बीच रख कर चबा लें और ऊपर से मिश्री मिला गुनगुना गर्म दूध पिएं तो मात्र कुछ ही समय में चमत्कार हो जाता है और निर्बल सा महसूस करने वाला रोगी बलिष्ठ बन जाता है।इसी प्रकार इस महान औषधि को अपने वैद्यजी या डाक्टर की सलाह से तमाम रोगों में प्रयोग करके एक नया ऊर्जा से भरा जीवन जी सकते हैं। यदि स्वस्थ व्यक्ति भी एक-एक गोली दूध के साथ रोजाना ले तो एक अत्युत्तम सर्वश्रेष्ठ अनुपम टानिक की तरह से यह औषधि कार्य करती है।

घर बैठे ऑनलाइन खरीदें-https://www.jantaayurved.in/p/blog-page_9.html#!/Sidh-Makardhwaj-Ras-with-Gold-30-Tablet/p/194271026/category=49698043
पुरुषो को होने वाले रोगों की आयुर्वेदिक औषधि 
जानिए पुरुषो के रोगों के इलाज में उपलब्ध आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में | साथ ही यह जानिए की इन औषधियों का सेवन कैसे करें और क्या परहेज रखें |
इस लेख में निम्नलिखित बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक औषधियां बताई गई है |
पुरुष बांझपन 
पेशाब में जलन 
पथरी, किडनी स्टोन
किडनी रोग
नपुंसकता 
सफेद पानी 
थैलेसीमिया 
पुरुषो के विभिन्न रोगों के इलाज 
आयुर्वेद में मूत्रक्कृच्छ्, पेशाब में जलन ( Dysuria ) का इलाज-
गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम चन्द्रप्रभावटी – 40 ग्राम गिलोयघन वटी – 60 ग्राम 1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।
चन्दनासव – 450 मिली 4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।
(Urolythiasis/ Stone in Bladder) पथरी, किडनी स्टोन का इलाज-
अश्मरीहर क्वाथ – 300 ग्राम 1 चम्मच औषधि को 400 मिली पानी में पकाएं और जब 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात: सायं खाली पेट पिएं।
अश्मरीहर रस – 50 ग्राम 1-1 ग्राम औषधि को अश्मरीहर क्वाथ के साथ सेवन कराएं। गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम चन्द्रप्रभा वटी – 60 ग्राम 1-1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें। नोट– पत्थरचट्टे का पत्ता रोज प्रात: खाली पेट चबाकर खाए।
किडनी, वृक्क की निष्क्रियता (CRF) एवं किडनी रोग का इलाज-
सर्वकल्प क्वाथ – 100 ग्राम + वृक्कदोषहर क्वाथ – 200 ग्राम + नीम छाल – 5 ग्राम + पीपल छाल 5 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5–7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पियें।
गिलोयघन वटी – 60 ग्राम 2–2 गोली प्रात: व सायं खाली पेट सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।
वसन्तकुसुमाकर रस – 1 ग्राम + गिलोय सत् -10 ग्राम + हजरुल यहूद भस्म – 10 ग्राम + पुनर्नवादि मण्डूर – 20 ग्राम + शवेत पर्पष्टी – 5 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम चन्द्रप्रभा वटी – 60 ग्राम वृक्कदोषहर वटी – 60 ग्राम 1–1 गोली दिन में 2-3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे – घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।
नोट- उच्चरक्तचाप होने की स्थिति में मुक्तावटी की 1-1 या 2-2 गोली प्रात: एवं सायं खाली पेट पानी या काढ़े से लें।
नपुंसकता, शुक्राल्पता (Oligospermia , fertility ) नामर्दी का इलाज-
वसन्तकुसुमाकर रस – 1-3 ग्राम + त्रिवंगा भस्म – 5 ग्राम + अभ्रकं भस्म – 10 ग्राम + गिलोय सत् – 10 ग्राम + सिद्ध मकरध्वज – 2 ग्राम + प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।
शिलाजीत सत् – 20 ग्राम 2-2- बूँद दूध में मिलाकर सेवन करें।
यौवनामृत वटी – 5 ग्राम ,चन्द्रप्रभावटी- 40 ग्राम 2–2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद दूध से सेवन करें।
अश्वगन्धा चूर्ण – 100 ग्राम, शतावरी चूर्ण – 100 ग्राम, श्वेतमूसली चूर्ण – 100 ग्राम
1- 1 चम्मच चूर्ण को प्रात: एवं सायं भोजन के बाद गुनगुने जल के साथ सेवन करें।
शुक्राल्पता में उपरोक्त औषधियों के साथ -कौंच, बीज – 250 ग्राम+ सफेद गुञ्जा – 250 ग्राम कौंच बीज तथा सफेद गुज्जा को कुटकर 1-1 चम्मच की मात्रा में प्रात: एवं सायं । दूध के साथ सेवन करने पर शुक्राणुओं की वृद्धि तथा शरीर का पोषण होता है। (कौंच बीज तथा सफेद गुञ्जा का प्रयोग शोधन के पश्चात् ही करना चाहिए । इसका शोधन दोला यन्त्र विधि से किया जाता है। बीजों को 1 पोटली में लटकाकर 4 ली दूध में पकाएं, जब पकते-पकते दूध गाढ़ा हो जाए तो पोटली को निकालकर, छिलका उतारकर बीजों को पीसकर कर सुरक्षित रख लें।
शुक्राणुहीनता, पुरुष बांझपन ( Azoospermia ) का इलाज-
हीरक भस्म – 300 मि.ग्राम + वसन्तकुसुमाकर रस – 2-3 ग्राम + दिव्य सिद्धमकरध्वज – 2–3 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।
प्रमेह तथा शुक्रमेह, धातु गिरना  और सफेद पानी का इलाज-
सर्वकल्प क्वाथ – 100 ग्राम+ वृक्कदोषहर क्वाथ – 200 ग्राम , दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5-7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं।
गिलोयघन वटी – 60 ग्राम 2-2 गोली उपरोक्त क्वाथ से सेवन करें।
आंवला चूर्ण – 100 ग्राम +वंगभस्म – 5 ग्राम +प्रवाल पंचामृत – 5 ग्राम +हजरुल यहूद भस्म – 5 ग्राम + गिलोय सत् – 20 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 1-1 चम्मच प्रात:, नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।
गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम , चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम, शिलाजीत रसायन वटी – 60 ग्राम 1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद जल से सेवन करें।
अन्य व्याधिष्य थैलेसीमिया (Thalessemia) का इलाज-
सर्वकल्प क्वाथ – 300 ग्राम 1 चम्मच औषध को 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं। कुमारकल्याण रस – 1-2 ग्राम+ प्रवाल पिष्टी – 5 ग्राम +कहरवा पिष्टी – 5 ग्राम + मुक्ता पिष्टी – 5 ग्राम +गिलोयसत् – 10 ग्राम + प्रवालपंचामृत – 5 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।
कैशोर गुग्गुल – 40 ग्राम + आरोग्यवर्धिनी वटी – 20 ग्राम 1–1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें। धृतकुमारी स्वरस – 10 मिली + गिलोय स्वरस – 10 मिली इसमें (उपरोक्त दोनों स्वरसों में) गेंहूँ के ज्वारे का रस मिलाकर प्रात: एवं सायं खाली पेट सेवन करें।
Disclaimer – यह जानकारी केवल आपके ज्ञान वर्धन और जागरूकता के लिए है | इसे बताने का औचित्य सिर्फ आपको इस बारे में जागरूक बनाना है | बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए | Never Take Medicines without Consulting the Doctor.
यौन दुर्बलता एक गंभीर समस्या 
आज के युग में हमारे प्रदूषित खान -पान की वजह से और स्वयं के गलत हरकतों के कारण युवक-युवतियां असमय ही दुर्बलता के शिकार होते जा रहे है ..और इस तरह की समस्याओं में डॉक्टर के पास जाने से घबराते हैं।
ऐसे में घरेलू उपाय को अपनाकर सेक्स लाइफ को बुस्टअप कर सकते हैं:-

  1. आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी शीशी में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।
  2. लहसुन आपके खाने का स्वाद ही नहीं बढाता है बल्कि आपकी सेक्स लाइफ को भी बढाता है| ऐसे में अगर आप लहसुन नहीं खा रहे हैं तो आज से ही खाना शुरू कर दीजिये| क्योंकि लहसुन की 2-3 कलियां और प्याज का प्रतिदिन सेवन से यौन- शाक्ति बढ़ती है। ऐसे में अगर आप सप्ताह में दो से तीन बार काले चने से बने खाद्य पदार्थों को प्रयोग में ला रहे है तो आपके लिए यह लाभकारी है|
  3. 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।
  4. एक सेब में हो सके जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।
  5. 15 ग्राम सफेद मूसली को एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से ज्यादा शक्तिशाली महसूस करेंगे।
  6. कच्चा गाजर या इसका जूस भी यौन शक्ति को बढ़ाने में मददगार है। हफ्ते में दो बार भिंडी और सहजन खाने से काफी फायदा होता है।
  7. 15 ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। इसे यौन-टौनिक के रूप मे इस्तेमाल करें। इसके अलावा आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा, सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करें। 
  8. बादाम, पिस्ता खजूर तथा श्रीफल के बीजो को बराबर मात्रा मे लेकर मिश्रण बनाए। प्रतिदिन 100 ग्राम सेवन करें।
  9. इसके अलावा आप 30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन लें।
  10. घी के साथ उड़द की दाल को भूनकर और इसके अंदर दूध को मिलाकर तथा अच्छी तरह से पकाकर इसकी खीर तैयार कर लें। इसके बाद इसमें चीनी या खांड मिलाकर इसका इस्तेमाल करने से वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है तथा संभोग करने की शक्ति भी बढ़ जाती है।
  11. 5 मिलीलीटर से 10 मिलीलीटर के आसपास पुराने सेमल की जड़ का रस निकालकर व इसका काढ़ा बना लें तथा इसके अंदर चीनी मिला लें। इस मिश्रण को 7 दिनों तक पीने से वीर्य की बहुत ही अधिक बढ़ोत्तरी होती है|
  12. 100 ग्राम आंवले के चूर्ण को लेकर आंवले के रस में 7 बार भिगों लें इसके बाद इसे छाया में सूखने के लिए रख दें। इसके सूख जाने के बाद इसको इमामदस्ते से कूट-पीसकर रख लें। रोजाना इस चूर्ण को एक चम्मच लेकर शहद के साथ मिलाकर चाट लें तथा इसके ऊपर से एक गिलास दूध पी लें। इसका सेवन करने से आपकी यौन शक्ति में आई दुर्बलता दूर हो जायेगी|
  13. सूर्यास्त से पहले बरगद के पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे पर
  14. रखकर खाएं। इसके प्रयोग से आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स शक्ति भी अधिक हो जाएगी।
  15. चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू तथा दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है।
  16. वीर्य अधिक पतला होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है। 

आयुर्वेद में भी क्रियात्मक क्षमता बनाए रखने की बहुत सी दवाएं हैं:-

  1. वसंत मालती:-स्त्री-पुरूष् दोनों में शारीरिक क्षमता और दुर्बलता, चाहे किसी कारण भी हो, नाशक स्वर्ण तथा मोती युक्त ओैषधि है। ज्वरों के पश्चात के दौर्बल्य में भी अत्यंत उपयोगी है।
  2. वसंत कुसुमाकर:-बलवर्घक, कामोत्तेजक, मधुमेह नियंत्रक के रूप में प्रयुक्त होता है। इसमें सोना, मोती, कस्तूरी, चांदी आदि प्रयुक्त होते हैं।
  3. वसंत तिलकरस:-विशेष् रूप से पुरूष् द्वारा उपयुक्त बलवर्घक वाजीकरण तथा कामोद्दीपक, स्वर्णमुक्ता आदि प्रधान औष्धियां हैं। वृहऊंगेश्वस, वंगेश्वर दोनों ही मूल्यवान दवाइयां हैं। स्त्रियों के जननांगों के रोगों, श्वेत प्रदर, कामशीतलता आदि तथा पुरुषों के दुर्बलता शीघ्रपतन, शुक्रमेह आदि में लाभदायक दवाएं हैं।
  4. शक्रवल्लभ रस:-पुरुषों द्वारा अधिक सेवनीय बलवर्घक पौष्टिक उत्तेजक वाजीकर औष्ाधियां हैं। इसमें भी सोना, मोती आदि मूल्यवान दवाएं डाली जाती हैं।
  5. शतावरी मोदक:-प्रमुख रूप से स्त्रियों द्वारा सेवन की जाने वाली यह औषधि शक्तिवर्घक स्तन रोग नाशक जननांगों के प्रदरों व गर्भाशय शिथिलता नाशक है।
  6. शिलाजीत शुद्ध:-स्त्रियों व पुरुषों के सभी रोगों में उपयोगी। निरंतर प्रयोग से सभी रोग होने से रोकता है। बुढ़ापा थामता है दीर्घजीवन देता है।
  7. शुक्रमातृकावटी व शिवा गुटिका:-अधिकतर पुरुषों को वीर्यविकारों, मूत्ररोगों, वायुविकारों, प्रोस्टेट वृद्धि आदि में दिया जाता है। शिव गुटिका स्त्रियों के कमरदर्द, थकान और मूत्र रोगों में उपयोगी है।
मदनानंद मोदक, कौंचपाक, मूसलीपाक, मदनमोदक ये दवाइयां पुरुषों द्वारा विशेष कर यौन शक्ति वृद्धि बनाए रखने व पूरे वर्ष के लिए पुष्टि प्रदान के लिए प्रयुक्त होती है। इनमें कुछ नशीले पदार्थ भांग, अफीम आदि में प्रयुक्त किए जाते हैं। कामेश्वर, कामचूड़ामणि, मन्मथ रस ये स्त्री व पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है। शक्ति, बल सामथ्र्य तथा कार्यक्षमता वर्घक बलवर्घक दवाइयां हैं।ये सामान्यत: नीम-हकीम तथा बिना चिकित्सक के परामर्श से इनका प्रयोग नौजवान लड़के ज्यादा करते हैं। 


रतिवल्लभ मूंगपाक, सौभाग्यशुंठी ये दोनों दवाइयां मुख्यत: स्त्रियों के सेवनार्थ बनी हैं। प्रथम ये दवाये जननांगों को शक्ति, पुष्टि संकोच, गर्भाधान योग्य बनाती हैं। सोहाग सोंठ प्रसव के बाद की दुर्बलता, पीड़ा कमरदर्द, थकान, ज्वर को मिटाती है। आयुर्वेद में कामोत्तेजक, स्तंभक, वाजीकरण शक्तिवर्घक तथा स्त्री के स्त्रीत्व को पुष्पित और प्रशस्त रखने वाली दवाओं की कमी नहीं है।


नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |

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बसंतकुसुमाकर रस क्या है ? : Basantkusmakar Ras in Hindi
वसंत कुसुमाकर रस टेबलेट या पाउडर के रूप में एक आयुर्वेदिक दवा है, जिसका उपयोग मधुमेह के उपचार, मूत्र मार्ग से संबंधित रोग, स्मृति हानि आदि के लिए किया जाता है। इस दवा को आयुर्वेद चिकित्सक से मिले नुस्खे के साथ चिकित्सकीय देखरेख में लेना चाहिए।

बसंतकुसुमाकर रस के घटक द्रव्य : Basantkusmakar Ras Ingredients in Hindi
✥ प्रवाल भस्म
✥रससिन्दूर
✥मोती पिष्टी
✥अभ्रक भस्म
✥रौप्य (चाँदी) भस्म
✥सुवर्ण भस्म
✥लौह भस्म,
✥नाग भस्म
✥बंग भस्म
✥अडूसा
✥हल्दी
✥गन्ने का रस
✥चन्दन

बसंतकुसुमाकर रस बनाने की विधि : Preparation Method of Basantkusmakar Ras- प्रवाल भस्म या पिष्टी, चन्द्रोदय या रससिन्दूर, मोती पिष्टी या भस्म, अभ्रक भस्म- प्रत्येक ४-४ तोला, रौप्य (चाँदी) भस्म, सुवर्ण भस्म २-२ तोला, लौह भस्म, नाग भस्म और बंग भस्मप्रत्येक ३-३ तोला लेकर सबको पत्थर के खरल में डालकर अडूसे की पत्ती का रस, हल्दी का रस, गन्ने का रस, कमल के फूलों का रस, मालती के फूलों का रस, शतावरी का रस, केले के कन्द का रस, और चन्दन भिंगोया हुआ जल या चन्दन-क्वाथ प्रत्येक की सात-सात भावना दें। प्रत्येक भावना में ३-६ घण्टा मर्दन करना चाहिए। अन्त की भावना के समय उसमें २ तोला अच्छी कस्तूरी मिलाकर ३ घण्टा मर्दन कर १-१ रत्ती की गोलियाँ बना, छाया में सुखा लें। इस योग में यदि २ तोला अम्बर भी मिला दें, तो यह विशेष गुणकारक होता है।

उपलब्धता : यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

सेवन विधि ,मात्रा और अनुपान :

१-१ गोली, सुबह-शाम।

• नपुंसकता और वीर्य श्राव में धारोष्ण गोदुग्ध के साथ दें।
• मस्तिष्क के विकारों में आँवले के मुरब्बे के साथ दें।
• रक्त-पित्त और रक्त प्रदर में वासा-रस और मधु के साथ दें।
• कास-श्वास और क्षय में चौसठ प्रहर पीपल के साथ मधु मिलाकर दें।
• अम्लपित्त में कुष्माण्ड अवलेह के साथ हृदयरोग में अर्जुन छाल के क्वाथ से दें।
• प्रमेह में गुडूची स्वरस और मधु के साथ दें।
• मधुमेह में जामुन की गुठली का चूर्ण और शिलाजीत के साथ दें।

बसंतकुसुमाकर रस के फायदे और उपयोग : Basantkusmakar Ras Benefits in Hindi

1- यह हुद्य, बल्य (बलवर्धक) उत्तेजक, वृष्य, बाजीकरण और रसायन है।

2-स्वर्ण, मोती, अभ्रक, रससिन्दूर आदि बलवर्द्धक द्रव्यों के संयोग से बनने के कारण यह सभी रोगों के लिए बहुत फायदेमन्द है।

3- स्त्री-पुरुषों के जननेन्द्रिय सम्बन्धी विकारों पर इसका बहुत अच्छा और तात्कालिक प्रभाव पड़ता है।

4-मधुमेह बहुमूत्र और हर तरह के प्रमेह, नामर्दी, सोमरोग, श्वेतप्रदर, योनि तथा गर्भाशय की खराबी, वीर्य का पतला होना या गिरना व वीर्यसम्बन्धी शिकायतों को जल्दी दूर कर शरीर में नयी स्फूर्ति पैदा करता है।

5-वीर्य की कमी से होनेवाले क्षयरोग को यह बहुत उत्तम दवा है।

6-हृदय और फेफड़े को इससे बल मिलता है।

7- हृदय की कमजोरी, शूल तथा मस्तिष्क की निर्बलता, भ्रम, याददास्त की कमी, नींद न आना आदि विकारों को दूर करता है।

8-पुराने रक्तपित्त, कफ खाँसी, श्वास, संग्रहणी क्षय, रक्तप्रदर, श्वेत प्रदर, खून की कमी और बुढ़ापे तथा रोग छूटने के बाद की कमजोरी में इस रसायन का प्रयोग बहुत लाभदायक है।

9-अनुपान भेद से अनेक प्रकार के रोगों को नष्ट करता है।

10- मधुमेह रोग की यह प्रसिद्ध औषध है।

11-छोटी आयु में अप्राकृतिक ढंग (हस्तमैथुन, गुदामैथुन आदि) से वीर्य नाश करने से अथवा ज्यादा स्त्री-प्रसंग (मैथुन) करने से वीर्य पतला हो जाता है, ऐसे मनुष्य का स्त्री-विषयक चिन्ता करने मात्र से वीर्य-पतन हो जाता है। ऐसी स्थिति में बसन्तकुसुमाकर के सेवन से बहुत शीघ्र फायदा होता है, क्योंकि यह रसायन और वृष्य होने के कारण वीर्यवाहिनी शिरा तथा अण्डकोष में ताकत पहुँचाता है, जिससे वीर्यवाहिनी शिरा में वीर्य धारण करने की शक्ति उत्पन्न होती है।

12-पुराने नकसीर रोग में इसका उपयोग किया जाता है।

13-किसी-किसी मनुष्य की आदतसी हो जाती है कि अधिक गर्म पदार्थ के सेवन या धूप में विशेष चलने-फिरने आदि से नाक फूटकर रक्त निकलने लगता है। इसे भाषा में नकसीर या नक्की छूटना कहते हैं। इसमें भी इसको शर्बत अनार, दाडिमावलेह, आँवला-मुरब्बा या गुलकन्द के साथ देने से शीघ्र लाभ होता है। साथ ही दूर्वादि घृत की मालिश भी सिर में करनी चाहिए।

14-जिस स्त्री को समय से ज्यादा दिन तक और अधिक मात्रा में रज: स्त्राव होता हो, उसके लिए भी यह दवा बहुत उपयोगी है।

15-शरीर में खून (रक्त) ज्यादा पतला हो जाने से ऐसा होता है। ऐसी स्त्री को शरीर के किसी अंग में जरा-सा कट जाने या खुर्च जाने अथवा सूई आदि चुभ जाने से बहुत खून निकलता है, जो बहुत देर में बन्द होता है। ऐसी स्थिती में रक्त गाढ़ा करने के लिये बसन्तकुसुमाकर रस का प्रवालपिष्टी के साथ उपयोग करना लाभप्रद है।

16-बुढ़ापे में सब इन्द्रियाँ प्रायः शिथिल हो जाती हैं, किन्तु सबसे ज्यादा शरीर के अन्तरवयवों में आँतों की शिथिलता होने से यह अपने कार्य करने में असमर्थ हो जाती है, जिससे अन्नादिकों का पचन-कार्य ठीक से नहीं हो पाता। इसका प्रभाव हृदय और फुफ्फुसों पर विशेष पड़ता है। फिर कास और श्वास की उत्पत्ति होती है। यह वृद्धों के लिये बहुत भयंकर व्याधि है। इसमें बसन्तकुसुमाकर रस का अभ्रक भस्म के साथ प्रयोग जादू-सा असर करता है।

17-इन्द्रियों की शक्ति बढ़ाने, रसरक्तादि धातुओं की वृद्धि कर हृदय, मस्तिष्क को बल प्रदान करने, शारीरिक कान्ति बढ़ाने, शुक्र और ओज को बढ़ाकर स्वास्थ्य को स्थिर बनाने में यह रस परमोत्तम रसायन का कार्य करता है।

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आज कल की भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में लोग कमज़ोर होते जा रहे है. काम की वजह से लोग अपने खाने पिने पर सही से ध्यान नहीं दे पाते है और ना चाहते हुए भी कमज़ोरी का सामना करना पड़ता है और कमजोर होने पर फिर से शरीर की शक्ति बढ़ाने के लिए कई सारी दवाइयों का इस्तेमाल करते है लेकिन उन दवाइयों से कुछ खास असर नहीं मिलता, लेकिन आज मै आपको कुछ ऐसी घरेलु और आयुर्वेदिक नुस्खे बताने जा रही हु जिससे आप अपनी शारीरिक शक्ति को बड़ा सकते है.

  1. किशमिश और शहद- सबसे पहले किसी कांच के बर्तन में 300 ग्राम किशमिश के दाने डाल दीजिए उसके बाद आपको शहद डालना है शहद आपको इतना डालना है कि किशमिश अच्छी तरह डूबे रहे उसके बाद इस पेस्ट को किसी बर्तन या डिब्बे में भर कर रख दे और रखने के बाद कम से कम 48 घंटो तक इस पेस्ट को ऐसी ही रहने दे. 48 घंटो तक पेस्ट को रखने के बाद अब रोज़ सुबह इस पेस्ट में से 4 किशमिश निकल कर खाये। सुबह खाली पेट खाते वक़्त ये बात ध्यान रखे की इसे खाने के बाद और खाने से पहले आपको कम से कम 30 मिनट तक कुछ खाना और कुछ पीना नहीं है. इस पेस्ट को सुबह खाने से पहले दिन से ही आपको अपने अंदर फरक दिखने लगेगा और अच्छे परिणाम के लिए इस पेस्ट को 30 दिन तक ज़रूर खाये.
  2. अश्वगंधा और दूध- शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए आप एक आसान नुस्खा अश्वगंधा का भी इस्तेमाल कर सकते है. अश्वगंधा पहले से ही आयुर्वेदिक की सबसे पुरानी और असरदार दवाई मानी जाती है.अश्वगंधा कई तरह की बीमारियों से भी छुटकारा दिलाता है और आप अश्वगंधा का इस्तेमाल शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए भी कर सकते है.अश्वगंधा का इस्तेमाल आप बड़े आसानी से कर सकते है बस सोने से पहले एक गिलास दूध में एक चम्मच अश्वगंधा मिला कर दूध पिले। दूध में अश्वगंधा मिला कर कम से कम 40 दिन तक पिए.

  • नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |
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कामिनी विद्रावण रस जैसा की नाम से ही प्रतीत हो जाता है की कामवासना के शौकीन पुरुषों स्त्रियों की पसंदीदा आयुर्वेद औषधि | किन्तु जिन पुरुषो में शुक्राणुओं की कमी और कमजोर शुक्राणुओं की उपस्तिथि के कारण वो सम्भोग का आनंद नही ले पाते है, और ना ही अपने जीवनसाथी को आनंदित कर पाते है | साथ ही शीघ्रपतन की समस्या के चलते वो अपने जीवनसाथी को भी वैवाहिक जीवन का सम्पूर्ण सुख नही दे पाते है और ऐसे में वो अपने आपमें शर्मिंदगी महसूस करते है ऐसे लोगो के लिए कामिनी विद्रावण रस शीघ्रपतन में रामबाण औषधि का काम करता है |

घटक द्रव्य-
आकारकरभं शुण्ठी लवंगं कुंकुंमं कणाम | जातिफल जातिकोषम चंदनं कार्षिकं पृथक् ||
हिंगुलं गंधकं शाणम फणीफेनं पलोंन्मितं | गुन्जात्र्यमिताम कुर्यात सम्मर्ध वटिकाम भिषक || (भैषज्य रत्नावली )
अकरकरा, सोंठ, लोंग, केशर, पिप्पली, जायफल, जावित्री, सफेद चन्दन, शुद्ध हिंगुल, शुद्ध गंधक, शुद्ध अफीम

कामिनी विद्रावण रस बनाने की विधि-
सबसे पहले अकरकरा, सोंठ, लोंग, केशर, पिप्पली, जायफल, जावित्री, सफेद चन्दन,आदि सभी को लेकर चूर्ण बना ले | शुद्ध की हुई गंधक और हिंगुल को लेकर शुद्ध की हुई अफीम के साथ अच्छे से घोंट्ले | इन तीनो द्रव्यों को तब तक घोंटे तब तक की इनका रंग कज्जली के जैसा ना दिखने लगे | कज्जली के समान दिखने पर सभी चूर्णों के मिश्रण को इनमे मिला ले |उपरोक्त मिलाये हुए सभी मिश्रण में पान के रस के साथ मर्दन करके 125-125 मिग्रा की गोलिया बनाले | इन गोलियों को केवल कांच की बोतल में ही रखना है |

कामिनी विद्रावण रस के फायदे -
पयसा परीपितोय्म शुक्रस्तस्भकरो रस: | विद्रावण: कामिनीनाम वशीकरण एवं च ||

अर्थात कामिनी विद्रावण रस की 1-2 गोलिया दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की स्तम्भन शक्ति बढती है | इसका सेवन करने वाला पुरुष सम्भोग की इच्छा रखने वाली स्त्री को खुश करके अपने वश में कर लेता है |वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन, शुक्राणुओं की कमी, तंत्रिका तन्त्र की कमजोरी, धातु दौर्बल्यता, पुरुष एनर्जी बढ़ाने में लाभदायक, स्त्रियों की सम्भोग शुन्यता में लाभकारी परिणाम |

कामिनी विद्रावण रस के नुकसान-
वैसे सामान्यत:  कामिनी विद्रावण रस के सेवन से नुकसान नही होते है किन्तु चिकित्सक की देखरेख में सेवन करने से किसी भी प्रकार के सेवन से बचा जा सकता है | कामिनी विद्रावण रस का सेवन बिना चिकित्सक के परामर्श के नही करना चाहिए क्योकि इसमे अफीम की उपस्थिति होने से इसकी लत लगने की सम्भावना बन सकती है |

इसलिए चिकित्सक की देखरेख में व् चिकित्सक द्वारा निर्धारित की गयी मात्रा में ही सेवन करना किसी भी प्रकार के होने वाले नुकसान से बचने में सक्षम है |

विशेष :-

किसी भी आयुर्वेदिक रसोषधि के सेवन से [पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य करे |

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सामान्य कमजोरी-
बहुत से युवा साथियों का मैसेज आता है सर जी मर्दाना कमजोरी का इलाज बताओ मेरी शादी होने वाली है, शादी से पहले लोगों को अपनी मर्दाना कमजोरी का कैसे पता चलता है मेरी समझ मे नही आता, खैर ऐसे लोगों को में यही कहुँगा- ब्रह्मचर्य का पालन करो नही तो दुनिया की कोई भी दवा या डा. आपका कल्याण नही कर पायेगा । जो युवा साथी सामान्य कमजोरी को यौन रोग समझ कर परेशान है वे निम्न योग का प्रयोग करें-
विधारा,अश्वगंधा और सतावर इन तीनो की बराबर मात्रा ले कर अच्छे से चूर्ण बना ले और इन सभी के बराबर मिश्री मिला कर रख ले। दो से तीन माशा तक दूध या पानी से खाये।यह चूर्ण स्वनदोष,प्रमेह नाशक है और साथ मे शरीर को भी शक्तिशाली और पुष्टक बनाता है।

वीर्य शोधन वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, नपुंसकता, शारीरिक और मानसिक निर्बलता, शरीर का दुबलापन, पाचन शक्ति और स्मरणशक्ति की कमी होना आदि को दूर करता है ।
अनुचित और अनियमित ढंग से आहार-विहार और कामुक आचरण करने की वजह से वीर्य दूषित, पतला और निर्बल हो जाता है जिससे आजकल अधिकांश युवक इन शिकायतों से पीड़ित हैं । वीर्य को शुद्ध, पुष्ट और सबल बनाए बिना अन्य वाजीकारक औषधियों का सेवन करने से पूरा लाभ नहीं होता या नहीं भी होता और दवाओं पर किया गया भारी खर्च वैसे ही बेकार हो जाता है जैसे मैले कपड़े को रंगने पर ठीक से रंग नहीं चढ़ता इसलिए वाजीकारक, बलवीर्यवर्द्धक या पौष्टिक दवाइयों के साथ-साथ वीर्यशोधन वटी का सेवन करना भी ज़रूरी है। वीर्यशोधन वटी शुक्र में रहे हुए दूषित घटको का शोधन करती है, उष्णता (गर्मी) का शमनकर स्तंभनशक्ति को बढ़ाती है, तथा शुक्राशय और शुक्रवाहिनी के वातप्रकोप और शिथिलता को दूर करती है। 

वीर्यशोधन वटी से सब प्रकार के प्रमेह, धातुदोष, मूत्ररोग, निर्बलता आदि विकार दूर होकर शक्ति की वृद्धि होती है।

शुक्रमेह, अधिक स्त्री सहवास, हस्तमैथुन अथवा स्वप्नदोषादी कारणो से वीर्य का अति क्षय (कम होना) हुआ हो और पतला हो गया हो, तो वीर्यशोधन वटी का सेवन गिलोय, गोखरू और आंवले के क्वाथ के साथ करना चाहिए। एवं मलवरोध करने वाले (कब्ज करने वाले) भोजन का त्याग करना चाहिये। 

वीर्य शुद्ध होनेके पश्चात आवश्यकता रहे तो वीर्यवर्धक औषधि शतावर्यादि चूर्ण, कौंच पाक या वसंतकुसुमाकर रस का सेवन करना चाहिये।

वीर्यशोधन वटी (Viryashodhan Vati) में मिला हुआ रौप्य रसायन, पूय (Puss)-किटाणुनाशक, वृक्क (Kidney) बलवर्धक और शुक्र (वीर्य)शोधन गुण दर्शाता है। यह शुक्रोत्पादक स्थान और शुक्राशय को पुष्ट करता है तथा शुक्र (वीर्य)को भी सबल बनाता है। प्रवाल और माक्षिक दोनों शीतवीर्य है। इनमें प्रवाल अस्थि (हड्डी) पोषक और मक्षिक रक्तपौष्टिक है। शिलाजीत रसायन, विकृतिनाशक और बल्य है। गिलोय सत्व शीतवीर्य और त्रिदोषनाशक होने से वीर्य को शीतल, शुद्ध और सबल बनाता है। कपूर किटाणु और विष का नाशक, बल्य और शामक है।  

मात्रा: 1से 2 गोली दिनमे 2 बार दूधके साथ दे।

वीर्यशोधन वटी घटक द्रव्य (Viryashodhan Vati Ingredients): चाँदी के वर्क, वंग भस्म, प्रवाल पिष्टी, शुद्ध शिलाजीत और गिलोय सत्व सब 1-1 तोला तथा कपूर 3 माशे।

सूचना: प्रवाल पिष्टी के स्थान पर सुवर्णमाक्षिक भस्म मिलानेपर उष्णता को शांत करने में विशेष गुण दर्शाती है।

Ref: रसतंत्र सार 

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