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 खाज, खुजली एक संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो जाता है। यदि परिवार में किसी एक सदस्य को यह रोग हो जाए तो परिवार के सभी लोगों को प्रभावित करता है। यह तीव्र क्षोभक रोग है।खुजली से पीड़ित व्यक्ति के साथ हाथ मिलाने तथा रोगी के बिस्तर पर बैठ जाने से स्वस्थ्य व्यक्ति को यह रोग हो जाता है। खुजली एक सारकोप्टिस स्केबीयाई नामक जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है जिसे ह्यूमन इच माईट के नाम से भी जाना जाता है। खुजली दो प्रकार की होती है-

(a) सुखी खुजली और

(b) गीली खुजली

खाज-खुजली के लक्षण 

सुखी खुजली से स्राव नहीं आता है। त्वचा खुश्क रहती है। इस प्रकार की खुजली में फुंसियाँ हो भी सकती है और नहीं भी। ये फुंसियाँ नहीं पकती है। खुजली तीव्र होती है। खुजला-खुजलाकर रोगी बेहाल हो जाता है।  रात को रोगी सो नहीं सकता है। यह अधिकतर गुप्तांगों, मलद्वार, हाथ-पाँव तथा जननेन्द्रियों पर होती है। कई बार रोगी इतनी जोर से खुजलाते हैं कि त्वचा पर रक्त के धब्बे दिखाई देते हैं। गीली खुजली में फुंसियाँ निकल आते हैं और इन फुंसियों से स्राव निकलता है। इसे पकनी खुजली भी कहा जाता है। इन्हीं फुंसियों से निकलने वाले स्राव बहकर आसपास की जगह को प्रभावित करता है।

 रोगग्रस्त त्वचा की सूक्ष्मदर्शी यंत्र द्वारा जाँच करने पर जीवाणुओं द्वारा निर्मित श्वेत-श्याम सुरंगें दिखाई देती है। लगातार खुजलाते रहने से नाखूनों की माध्यम से इन सुरंगें तथा फुन्सियों में अन्य प्रकार के संक्रमण भी हो सकते हैं जिसके कारण त्वचा पर शोथ तथा फुंसियाँ हो जाती हैं। खुजली बढ़ने पर त्वचा पर उभरे छोटे छोटे दाने लाल होने लगते हैं और उन पर पपड़ियां जम जाती हैं। उन पपड़ियों में तीव्र खाज होती है और खुजलाने पर घाव हो जाते हैं। इस रोग के जीवाणु का जैसे ही लार्वा पैदा होता है, खुजली प्रारंभ हो जाती है। तीन से पाँच सप्ताह में ये पूर्ण विकसित होते हैं।
 जो लोग पहले भी इस रोग से ग्रस्त हो चुके हैं उन लोगों में संक्रमण के एक से चार दिन में ही लक्षण दिखाई देने लगते हैं पर जिन्हें पहले कभी भी खाज खुजली की समस्या नहीं हुई है तो ऐसी स्थिति में दो से पाँच सप्ताह के बाद ही इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

खाज-खुजली के कारण 

 सारकोप्टिस स्केबीयाई नामक जीवाणु को खाज-खुजली का प्रमुख कारक माना जाता है। यह जीवाणु पशुओं की चर्म में पाई जाती है। पशुओं में पाए जाने वाले ये जीवाणु जब मनुष्य की पर आक्रमण करते हैं तब उनके लक्षण पशुओं में होने वाले लक्षण जैसे नहीं होते हैं। गंदी तथा बदबूदार चर्म में ये जीवाणु बहुत जल्द आक्रमण करते हैं।
 जो लोग गंदी वस्त्र पहनते हैं, अस्वस्थ्यकर परिवेश में रहते हैं, कई दिनों तक नहाते नहीं है अथवा गंदे पानी से नहाते हैं वैसे लोगों के शरीर में इस रोग के जीवाणु अति सहजता से पनपते हैं और खाज-खुजली होने लगता है। इसके अलावा शरीर में होने वाले अन्य विकारों की वजह जैसे मधुमेह, खान-पान की एलर्जी, यकृत एवं वृक्कों की गड़बड़ी, रक्तदोष आदि के कारण भी खाज-खुजली होती है। पीलिया रोग, हॉजकिन्स रोग, औषधियों की साइड इफेक्ट, थाइरोइड ग्रंथि के रोग, ल्यूकेमिया, लिम्फेडेनोमा, रासायनिक पदार्थों से उत्पन्न क्षोभ आदि के कारण से भी यह रोग हो जाता है। स्कूलों एवं अस्पतालों से भी यह रोग एक से दूसरे को हो सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग बहुत जल्द इस रोग के चपेट में आ जाते हैं।
 स्त्रियों में प्रदर रोग, गुप्तांगों को साफ न करना, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, जुएं, उत्तेजक पदार्थों का अत्यधिक मात्रा में सेवन, सूत्र कृमि आदि के कारण यह रोग होता है। इसके अतिरिक्त रोगग्रस्त व्यक्ति के संपर्क में आने तथा रोगी व्यक्ति के कपड़े पहनने, एक साथ सोने तथा असुरक्षित यौन संबंधों के कारण भी खाज-खुजली का रोग एक से दूसरे व्यक्ति को प्रभावित करता है।

खाज-खुजली के घरेलू उपाय, इलाज -

खाज-खुजली साध्य रोग है। इस रोग की चिकित्सा के लिए सर्वप्रथम रोगी व्यक्ति के व्यवहार किए हुए कपड़ों को गर्म पानी में उबालकर साफ करें। रोगी की कमरे का सर-सफाई करें। बिस्तर के कपड़े बदलें और निम्न लिखित घरेलू उपाय अपनाएँ।
  1. त्रिफला तथा नीम की पत्तियों का काढ़ा पानी में मिलाकर रोज स्नान करें। त्रिफला चूर्ण का सेवन भी करें।
  2. स्नान करने के बाद भीमसेनी कपूर, नारियल का तेल और ताजा हल्दी मिलाकर शरीर में लेपन करें।
  3. सुबह खाली पेट चार-पाँच नीम के पत्ते चबाकर खाएं।
  4. तुलसी तथा नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करें।
  5. नीम के ताजे पत्ते पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करें।
  6. पीपल की छाल को देसी घी में मिलाकर लगाने से भी खाज-खुजली जल्द ठीक हो जाता है।
  7. तुलसी और माजूफल के पत्ते पीसकर लगाएँ।
  8. अनंतमूल के टुकड़े पीसकर छान करके पियें।
  9. एलोवेरा का जेल लगाएँ और इसका जूस भी बनाकर पियें।
  10. तेज खुजली होने पर अजवाइन को बारीकी से पीसकर पेस्ट तैयार करके खुजली वाले स्थान पर रुई की सहायता से दिन में चार बार लगाएँ।
  11. लहसुन की पेस्ट बनाकर लेपन करें।
  12. खाज-खुजली में सुबह-शाम शहद लगाने से भी जल्द लाभ होता है।
 खाज-खुजली में अफीम, अचार, खट्टी चीजें, अधिक मसालेदार भोजन, मांस, मछली, अंडे, बैंगन आदि को परहेज करें। स्नान करते समय कास्टिक सोडायुक्त साबुन का प्रयोग न करें। जिस चीज तथा खाद्य पदार्थों से रोगी को एलर्जी हो उन सभी चीजों से बचें। साफ-सुथरे एवं ढीले वस्त्र परिधान करें।

नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |

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नींद संबंधी एक विकार है। इसका अर्थ निद्रानाश होना अथवा स्वाभाविक नींद न आना होता है। नींद की अवधि निश्चित नहीं होती है। किसी को छह-सात घंटे की नींद पर्याप्त होती है और किसी को नहीं। वृद्धावस्था में नींद कम होती है पर आज की भागदौड़ भरी दुनिया में करोड़ों लोग इस रोग से ग्रसित हैं। अधिकांश मामलों में अनिद्रा मानसिक तनाव की वजह से होती है।


 लक्षणों के आधार पर अनिद्रा को दो भागों में बांटा गया है जो निम्न प्रकार के हैं-
(a) अल्पकालिक अनिद्रा (Acute Insomnia)- अल्पकालिक अनिद्रा कुछ दिनों से लेकर कई सप्ताह तक रहता है

(b) दीर्घकालिक अनिद्रा (Chronic Insomnia)- दीर्घकालिक अनिद्रा अथवा क्रोनिक इनसोम्निया कुछ  सप्ताह से लेकर कई सालों तक रहता है जो हमारे शरीर के लिए घातक साबित हो सकता है।


अनिद्रा के लक्षण 

अनिद्रा मानव शरीर में तनाव, भ्रम एवं थकान पैदा करती है। अनिद्राग्रस्त रोगी का मन और शरीर दोनों थके हुए होते हैं। रात को बार बार जगता है। हल्की आहट से ही नींद खुल जाती है। कुछ रोगी प्रकाश में सो नहीं पाते और कुछ रोगी को अंधेरे में नींद आती नहीं है। आंखों में सूजन, रोजाना अधूरी नींद,आंखों के नीचे काले धब्बे, वजन का बढ़ना, बालों का झड़ना आदि लक्षण अनिद्रा के रोगियों में पाया जाता है।
अनिद्रा में रोगी का शरीर और मस्तिष्क की कार्यशक्ति ह्रास होने लगता है। रोगी की स्मृति, मेधाशक्ति, एकाग्रता आदि क्रमसः ह्रास होने लगता है। भूख नहीं लगती है। रोगी बेचैन हो जाता है। धीरे धीरे रोगी चिड़चिड़ा और क्रोधी स्वभाव का हो जाता है।

अनिद्रा के कारण 

अनिद्रा कोई मामूली रोग नहीं है। यह मानसिक रूप से रोगी को झकझोर कर देता है। अनिद्रा के कई कारण हो सकते हैं। मुख्य कारणों के अंतर्गत मानसिक तनाव, बेचैनी, भय, हर्ष, घबराहट, गम, जोश, उमंग, उत्साह, कब्ज, पाचन क्रिया के विकार, अत्यधिक भोजन, कार्य में होनेवाले बदलाव, मोबाइल, टी.भी, देर रात तक जगने की आदत, अधिक उपवास, दिन के समय सोने की आदत, अत्यधिक शारिरिक तथा मानसिक परिश्रम, कैफीन एवं मदिरा का अधिक सेवन, दवाओं के दुष्प्रभाव, सभी प्रकार की चिंताएं आदि है।

अनिद्रा कोई मामूली रोग नहीं है। यह मानसिक रूप से रोगी को झकझोर कर देता है। अनिद्रा के कई कारण हो सकते हैं। मुख्य कारणों के अंतर्गत मानसिक तनाव, बेचैनी, भय, हर्ष, घबराहट, गम, जोश, उमंग, उत्साह, कब्ज, पाचन क्रिया के विकार, अत्यधिक भोजन, कार्य में होनेवाले बदलाव, मोबाइल, टी.भी, देर रात तक जगने की आदत, अधिक उपवास, दिन के समय सोने की आदत, अत्यधिक शारिरिक तथा मानसिक परिश्रम, कैफीन एवं मदिरा का अधिक सेवन, दवाओं के दुष्प्रभाव, सभी प्रकार की चिंताएं आदि है।

इन कारणों के अतिरिक्त कई तरह की जानलेवा बीमारी के कारण भी लोग अनिद्रा रोग से ग्रसित होते हैं। पाचन तंत्र के विकार, अस्थमा, शारिरिक पीड़ा, हृदय के रोग, बहुमूत्र, मस्तिष्क में रक्त की अधिकता, अल्जाइमर रोग, अति सक्रिय थाइरोइड, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, किडनी के रोग, खाँसी, पार्किंसॉंस रोग, कृमि रोग, दिल की कमजोरी, यकृतविकार, टाइफाइड, क्षय रोग, आवेश, मानसिक भ्रम, शोथ ज्वर, उच्च रक्तचाप आदि रोगों के कारण भी अनिद्रा रोग होता है।
 हममें से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो रात में बिस्तर पर लेटकर अपनी अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में सोचा करते हैं, तरह-तरह की कल्पनाओं में डूबते हैं जिसकी वजह से हमारी नींद बाधित होती है और  हमारी यही आदत आगे चलकर अनिद्रा रोग का कारण बनती है।

अनिद्रा के घरेलू उपाय 

  1. खसखस 150gm, कद्दू के बीज 100gm, बादाम 100gm, सूखे खजूर 150gm इन सभी चीजों को मिलाकर अच्छी तरह पीसें और इस चूर्ण को रोज रात सोने से पहले गर्म दूध के साथ एक चम्मच लें।
  2. केले की चाय बनाकर रात को सोने से पहले सेवन करें। इसे तैयार करने के लिए एक पके हुए केले को लेकर अच्छी तरह से धो लें और इसका अगला तथा पिछला हिस्सा काटकर अलग करें। अब बचे हुए भाग को चार टुकड़े करके चार कप पानी में पाँच से सात मिनट तक धीमी आंच पर उबालें। सात मिनट उबलने के बाद इसमें आधा चम्मच दालचीनी मिलाकर तीन मिनट तक और उबालें। अब इसे उतारकर ढकें और हल्का गर्म रहते ही पिएं। यह अनिद्रा के लिए अचूक उपाय है। याद रखें कि केले की चाय बनाने के लिए केले को छिलके के साथ उबालें।
  3. पके हुए केले में जीरे का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से भी नींद आती है।
  4. रात को लौकी का रस लें अथवा लौकी का सब्जी खाएँ।
  5. सोने से पहले दूध में शहद मिलाकर पीने से अच्छी और गहरी नींद आती है।
  6. पुनर्नवा की जड़ को कूटकर काढ़ा बनाकर सोने से पहले सेवन करें।
  7. रात को स्नान करने से अच्छी नींद आती है। पर यह हर मौसम में मुमकिन नहीं होता। इसलिए आप गर्म स्नान कर सकते हैं। स्नान करने के बाद तिल के तेल से शरीर की मालिश करें। 
  8. सेव का सिरका खाएँ। इसमें पाई जानेवाली ट्रीप्टोफेन नामक रसायन हमारी मस्तिष्क को शांत कर हमें अच्छी नींद दे सकता है।
  9. विटामिन बी, मैग्नेशियम, जिंक, पोटासियम युक्त पौष्टिक आहार खाएँ।
  10. सौंफ को पानी में उबालकर सुबह-शाम पियें।
  11. सोने से पहले चुटकीभर जायफल एक कप दूध में मिलाकर रोज पीने से अनिद्रा रोग पूरी तरह से ठीक हो सकती है।
  12. ब्राह्मी और अश्वगंधा को पानी में उबालकर पीने से भी यह रोग ठीक हो जाता है।
  13. सोने से पहले सरसों की तेल से पैर की तलवों को मालिश करें।
  14. अल्पकालिक अनिद्रा में केशर के कुछ रेसे दूध के साथ लें।

     निष्कर्ष (Conclusion)

अनिद्रा के मूल कारणों को दूर करने से ही रोगी को स्वाभाविक नींद आने लगती है। अनिद्रा के रोगी बिभिन्न उलझनों से ग्रस्त होता है। अतः इन उलझनों से छुटकारा पाते ही उसकी अवस्था सामान्य हो जाती है। अनिद्रा से ग्रसित रोगी को सदा प्रसन्न रहने की कोशिश करनी चाहिए। शारिरिक परिश्रम, व्यायाम तथा नित्य योग करें। रोज शीतल जल से स्नान करें। खट्टे-मीठे, तेज मिर्च मसालेदार भोजन, बासी खाना, मादक पदार्थ, फास्ट फूड, जंक फूड आदि खाद्य पदार्थों को परहेज करें। प्रातः काल कुछ समय टहलें। गंदी विचारों को त्याग दें। चाय-कॉफी तथा उत्तेजक पेय पदार्थों का सेवन न करें।

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आज कल हमारी दिनचर्या हमारे खान -पान से गठिया का रोग 45 -50 वर्ष के बाद बहुत से लोगो में पाया जा रहा है । गठिया में हमारे शरीर के जोडों में दर्द होता है, गठिया के पीछे यूरिक एसीड की बड़ी भूमिका रहती है। इसमें हमारे शरीर मे यूरिक एसीड की मात्रा बढ जाती है। यूरिक एसीड के कण घुटनों व अन्य जोडों में जमा हो जाते हैं।
जोडों में दर्द से रोगी का बुरा हाल रहता है। इस रोग में रात को जोडों का दर्द बढता है और सुबह अकडन मेहसूस होती है। इसकी पहचान होने पर इसका जल्दी ही इलाज करना चाहिए अन्यथा जोडों को बड़ा नुकसान हो सकता है।

गठिया के अचूक घरेलू उपाय-

  1. दो बडे चम्मच शहद और एक छोटा चम्मच दालचीनी का पावडर सुबह और शाम एक गिलास मामूली गर्म जल से लें।
  2. एक शोध में कहा है कि चिकित्सकों ने नाश्ते से पूर्व एक बडा चम्मच शहद और आधा छोटा चम्मच दालचीनी के पावडर का मिश्रण गरम पानी के साथ दिया। इस प्रयोग से केवल एक हफ़्ते में ३० प्रतिशत रोगी गठिया के दर्द से मुक्त हो गये। एक महीने के प्रयोग से जो रोगी गठिया की वजह से चलने फ़िरने में असमर्थ हो गये थे वे भी चलने फ़िरने लायक हो गये।
  3. लहसुन की 10 कलियों को 100 ग्राम पानी एवं 100 ग्राम दूध में मिलाकर पकाकर उसे पीने से दर्द में शीघ्र ही लाभ होता है।
  4. सुबह के समय सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करने से भी जोड़ों के दर्द से स्थाई रूप से छुटकारा मिलता है।
  5. एक चम्मच मैथी बीज रात भर साफ़ पानी में गलने दें। सुबह पानी निकाल दें और मैथी के बीज अच्छी तरह चबाकर खाएं।मैथी बीज की गर्म तासीर मानी गयी है। यह गुण जोड़ों के दर्द दूर करने में मदद करता है।
  6. गठिया के रोगी 4-6 लीटर पानी पीने की आदत डालें। इससे ज्यादा पेशाब होगा और अधिक से अधिक विजातीय पदार्थ और यूरिक एसीड बाहर निकलते रहेंगे।
  7. एक बड़ा चम्मच सरसों के तेल में लहसुन की 3-4 कुली पीसकर डाल दें, इसे इतना गरम करें कि लहसुन भली प्रकार पक जाए, फिर इसे आच से उतारकर मामूली गरम हालत में इससे जोड़ों की मालिश करने से दर्द में तुरंत राहत मिल जाती है।
  8. प्रतिदिन नारियल की गिरी के सेवन से भी जोड़ो को ताकत मिलती है।
  9. आलू का रस 100 ग्राम प्रतिदिन भोजन के पूर्व लेना बहुत हितकर है।
  10. प्रात: खाली पेट एक लहसन कली, दही के साथ दो महीने तक लगातार लेने से जोड़ो के दर्द में आशातीत लाभ प्राप्त होता है।
  11. 250 ग्राम दूध एवं उतने ही पानी में दो लहसुन की कलियाँ, 1-1 चम्मच सोंठ और हरड़ तथा 1-1 दालचीनी और छोटी इलायची डालकर उसे अच्छी तरह से धीमी आँच में पकायें। पानी जल जाने पर उस दूध को पीयें, शीघ्र लाभ प्राप्त होगा ।
  12. संतरे के रस में १15 ग्राम कार्ड लिवर आईल मिलाकर सोने से पूर्व लेने से गठिया में बहुत लाभ मिलता है।
  13. अमरूद की 4-5 नई कोमल पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर रोजाना खाने से से जोड़ो के दर्द में काफी राहत मिलती है।
  14. काली मिर्च को तिल के तेल में जलने तक गर्म करें। उसके बाद ठंडा होने पर उस तेल को मांसपेशियों पर लगाएं, दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।
  15. दो तीन दिन के अंतर से खाली पेट अरण्डी का 10 ग्राम तेल पियें। इस दौरान चाय-कॉफी कुछ भी न लें जल्दी ही फायदा होगा।
  16. दर्दवाले स्थान पर अरण्डी का तेल लगाकर, उबाले हुए बेल के पत्तों को गर्म-गर्म बाँधे इससे भी तुरंत लाभ मिलता है।
  17. गाजर को पीस कर इसमें थोड़ा सा नीम्बू का रस मिलाकर रोजाना सेवन करें । यह जोड़ो के लिगामेंट्स का पोषण कर दर्द से राहत दिलाता है।
  18. हर सिंगार के ताजे 4-5 पत्ती को पानी के साथ पीस ले, इसका सुबह-शाम सेवन करें , अति शीघ्र स्थाई लाभ प्राप्त होगा ।
  19. गठिया रोगी को अपनी क्षमतानुसार हल्का व्यायाम अवश्य ही करना चाहिए क्योंकि इनके लिये अधिक परिश्रम करना या अधिक बैठे रहना दोनों ही नुकसान दायक हैं।
  20. 100 ग्राम लहसुन की कलियां लें।इसे सैंधा नमक,जीरा,हींग,पीपल,काली मिर्च व सौंठ 5-5 ग्राम के साथ पीस कर मिला लें। फिर इसे अरंड के तेल में भून कर शीशी में भर लें। इसे एक चम्मच पानी के साथ दिन में दो बार लेने से गठिया में आशातीत लाभ होता है।
  21. जैतुन के तैल से मालिश करने से भी गठिया में बहुत लाभ मिलता है।
  22. सौंठ का एक चम्मच पावडर का नित्य सेवन गठिया में बहुत लाभप्रद है।
  23. गठिया रोग में हरी साग सब्जी का इस्तेमाल बेहद फ़ायदेमंद रहता है। पत्तेदार सब्जियो का रस भी बहुत लाभदायक रहता है।
  24. गठिया के उपचार में भी जामुन बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर इसका लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।
नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |

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मधुमेह (डायबिटीज) के कारण, लक्षण, निदान और घरेलु उपचार
यह जटिल रोग है आचार्य चरक एवं सुश्रुत ने लगभग 3 हजार वर्ष पूर्व इसका उल्लेख किया था आज भी आयुर्वेद विज्ञान में इस पर शोध चल रहा है ।एक बार यह रोग हो जाने पर इसे जिंदगी भर झेलना पड़ता है अगर इसके होने के प्रारम्भिक स्तर पर पता लग जाये तो कुछ रोगियों को आयुर्वेद के द्वारा पथ्य ( परहेज ) रखते हुए औषधि सेवन करवाने पर कई रोगियों को पूर्ण रूप से ठीक किया जा सकता है । इस रोग में सातों धातुएं दूषित हो जाती है । इस कारण यह रोग कठिनता से ठीक होता है एवं रोगी को उम्र भर दवा के सहारे जीना होता है  शर्करा शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। बिन उर्जा का शरीर मृत सा होता है। यही ऊर्जा प्रदान करने वाली शर्करा जब शरीर के काम न आकर बिना रासायनिक परिवर्तन के मूत्रद्वारा निकल जाती है तब हम इसे मधुमेह या Diabetes Millitus कहते हैं।रोगी को अधिक मुत्र आने लगता है, प्यास बढ़ती है, मुख सूखता है और रोगी दुर्बल हो जाता है। इसकी जो  चिकित्सा है वो सिर्फ रोकथाम तथा नियंत्रण तक ही सीमित है।

मधुमेह के प्रकार (Types of diabetes)
1. Diabetes टाइप 1 
2. Diabetes टाइप 2
3. Diabetes टाइप 3
डायबिटीज टाइप 1 अनुवांशिक होता है।
डायबिटीज टाइप 2 मोटे लोगों में अधिक पाया जाता है।
डायबिटीज टाइप 3 गर्भवती महिलाओं को होता है।

 मधुमेह के कारण -
मधुमेह का प्रमुख कारण इंसुलिन है। शरीर में पैंक्रियाज(Pancreas)की कोशिकाएं इंसुलिन को उत्पन्न करते हैं और इसी insulin की वजह से शरीर को ऊर्जा मिलती है। Insulin की कमी हो जाने से आहार का उपयोग शरीर मे नही हो पाता है जिससे शरीर में शर्करा की मात्रा अधिक होने लगती है और हमारे गुर्दें इस शर्करा रोकने में असमर्थ होते है। अतः सारी शर्करा मूत्र के साथ निकल जाती है और रोगी दुर्बल हो जाता है।
  मधुमेह धीरे धीरे से मानव शरीर को जकड़ लेता है और असहाय कर देता है। मधुमेह का वास्तविक कारण आज भी चिकित्सा विज्ञानियों को पता नहीं चल सका है। वो मानते हैं कि 50% डायबिटीज वंशानुगत होता है। वंशानुगत मधुमेह diabetes type1 के अंतर्गत आता है।
  अत्यधिक मानसिक परिश्रम तनाव, चिंता, क्रोध, यकृतदोष, मूत्ररोग, शराब, बिड़ी-सिगरेट तथा अन्य नशे की लत, शारिरिक परिश्रम न करना, अधिक पौष्टिक भोजन करना तथा संक्रामक रोगों के कारण भी यह रोग हो सकता है। इसके अलावा नींद की कमी, थाइरोइड gland की अतिक्रियता की कारण से भी diabetes हो सकता है।

मधुमेह के लक्षण (Symptoms of diabetes mellitus)-

  1. अधिक मूत्र आना, प्यास लगना, धीरे धीरे भूख की कमी, सिरदर्द, घबराहट, चक्कर आना, मुख सुखना, कब्ज आदि ही मधुमेह के प्रमुख लक्षण हैं।
  2. रोग बढ़ने के साथ साथ फोड़े फुंसियां भी निकलने लगती है और वजन घट जाता है। रोगी हल्की सी ठंड लगते ही सर्दी- जुकाम, बुखार न्यूमोनिया आदि का शिकार होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार किसी भी प्रकार के संक्रमण diabetes रोगी को जल्द ही पकड़ लेता है।
  3. कुछ लोग अचानक मोटे हो जाते हैं जो कि मधुमेह का लक्षण हो सकता है जो Diabetes type2 के अंतर्गत आता है। इसलिए तुरन्त रक्त और मूत्र की जांच करवाएं। Diabetes Mellitus में कोमा की अवस्था बहुत ही खतरनाक होती है। इसीलिए रोगी को खुद सचेत रहना चाहिए।

 मधुमेह के लिये जरूरी रक्त जाँच (Blood test for Diabetes) 
   
मधुमेह के लिए सुबह खाली पेट या फिर खाना खाने के दो घंटे बाद टेस्ट किया जाता है। खाली पेट (Normal Blood Fasting) टेस्ट करने से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा के बारे में पता चलता है। इसी टेस्ट से किसी को डायबिटीज होने या नहीं होने के बारे में जाना जाता है। खाली पेट जाँच करने पर शुगर लेवल 110 मिलीग्राम से ऊपर होने की अवस्था को मधुमेह की शुरुआत समझा जा सकता है। 
खाना खाने के बाद जो टेस्ट (Post Prandial Test) किया जाता है उसमें शुगर लेवल 110 से 140 मिलीग्राम के बीच होनी चाहिये। इन दोनों टेस्ट के अलावा HBA1C टेस्ट से पिछले तीन महीने के शुगर लेवल की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।          
  मधुमेह के घरेलू चिकित्सा (Home Remedies for diabetes mellitus)
 वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के द्वारा बहुत सारे रोगों से निजात पाया जा सकता है। हम इन्हीं चिकित्सा पद्धतियों तथा घरेलू चिकित्सा के बारे में जानेंगे-
  1. चार या पाँच आम के पत्ते को एक कप पानी मे उबालकर रातभर रहने दें और सुबह पियें। लगातार पीते रहें। हालांकि आम का फल मधुमेह में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है पर इसके पत्ते हम प्रयोग कर सकते हैं।
  2.  मेथी को हम मसाले के रूप में प्रयोग करते हैं पर इसका इस्तेमाल हम मधुमेह में कर सकते हैं। दो चम्मच मेथी को अच्छी तरह धो लें फिर एक कप पानी में डालकर रातभर रहने दें और सुबह पियें।
  3.  करेला १००ग्राम, जामुन के बीज १०० ग्राम, आंवला १०० ग्राम, मेथी १०० ग्राम और अमरूद १०० ग्राम को पीसकर सुबह शाम पानी के साथ दें। 
  4. चीनी, गुड़, मिठाई का सेवन बिल्कुल न करें।
  5. मानसिक तनाव से बचे।
  6. मीठे फल न दे।
  7. बिड़ी- सिगरेट, तम्बाकू, मदिरापान बिल्कुल करने न दें।
  8. धूप में ज्यादा घूमने न दें।
  9. कब्ज(constipation) होने न दें।
  10.  Insulin का प्रयोग सिर्फ जरूरी अवस्था में ही करें।
  11.  ठंडी पेय न दें।
  12. सिर्फ़ हल्के व्यायाम ही करें।
  13. पाचनक्रिया को ठीक रखें।
  14. मट्ठा, शहद, जौ की सत्तू दें।
  15. प्रोटीन ज्यादा लें पर कार्बोहाइड्रेट एकदम सीमित मात्रा में लें।
  16. तेल की मालिश करें।
  17. पत्तेदार सब्जियां खाएं।
  18. माँस-मछली, अण्डे, मक्खन आदि संतुलित मात्रा में लें।
  19. रोगी का वजन पर विशेष ध्यान रखें।
  20. हप्ते में एक या दो दिन उपवास रखने दें।
  21. हप्ते में दो बार कटिस्नान करने दें।
  22. अग्न्याशय के स्थान पर मिट्टी की लेप दें। 
  23. संतुलित आहार से ही मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए रोगी की खान-पान पर विशेष ध्यान दें।                                                                                                                             
 नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |
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अस्थमा के कारण, लक्षण, उपचार और घरेलू ...

नजला जुकाम , श्वास का उपचार
शुद्ध देशी गाय का घी/Panchgavya Nasal Drop
विधि :-इसकी दो-दो बुँदे गुनगुना करके रात्रि में सोने से पहले दोनों नासिकाओं में डाले और बहुत हल्का सा पीछे की और खींचे जैसे साँस लेते हो। जब पहले नाक में डाले तो दूसरी नाक को बन्द करके हल्का सा ऊपर खींचे जब दूसरी नाक में डाले तो पहली नाक को बन्द रखे और हल्का सा ऊपर खींचे बिना तकिया लिए 15 मिनिट तक लेटे रहे और फिर तकिया लगाकर सो जाये बिना किसी से बात किये
+
गोमुत्र अर्क 10 ML सुबह शाम/अगर गौमुत्र नही ले सकते तो गोतीर्थ का Breathon Tab 2-2 सुबह शाम लें।
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श्वासकुठार रस 1 ग्राम + त्रिभुवनकीर्ति रस 2 ग्राम + लक्ष्मी विलास रस 2 ग्राम + टंकण भस्म 1 ग्राम + गोदन्ती भरम 5 ग्राम. सभी को मिलाकर 8 डोज बना लें.एक-एक डोज हर छह घंटे पर शहद व अदरक के रस से लें।(15 दिन बाद ये बन्द कर दें)

योगा और प्राणायाम  करें ।
जलनेती सप्ताह में 1 बार जरूर करें ।
हमेशा गुनगुना पानी पीना है।
गर्म पानी से कभी नही नहाना है ताजा या गुनगुने पानी से ही नहाये।

नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |

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बुखार सेहत से जुड़ी हुई एक आम समस्या है। हर किसी को किसी न किसी कारण से बुखार की शिकायत हो ही जाती है। कभी वायरल फीवर के रूप में तो कभी घातक मलेरिया बनकर अलग-अलग नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले ही लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा, इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। यहां हम एक ऐसा दिलस्प मगर 100 फीसदी अचूक और कारगर उपाय जो किसी भी तरह के बुखार में अपना प्रभाव दिखाकर रहता है। इस प्रयोग में भुने हुए नमक को मरीज को दिया जाता है, जिसका प्रभाव कुछ ही समय में सामने आ जाता है...

प्रयोग विधि:

खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर काफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें। जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से बुखार पलटकर भी नहीं आएगा।

विशेष:
- हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह प्रयोग नहीं करना चाहिये।
- यह एक पुराना घरेलू नुस्खा है, इसके साथ ही आधुनिक चिकित्सक की सलाह भी अवश्य लें।
- यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी को ठण्ड न लगे।
- अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।
- इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 10-15 घंटे तक कुछ खाने को न दें। और उसके बाद उसे दूध, चाय या हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।

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आपके हकलाने पर हंसते हैं लोग तो करें ...
हकलाना या वाणी दोष का इलाज
हकलाना , तुतलाना  रोग एक असभ्य रोग है इस रोग को ठीक करने के लिए कोई एलोपैथिक दवाई मोजूद नही है इसको ठीक करना मुश्किल काम नही है मगर थोड़ा लंबा ज़रूर है, इसके रोगीयो को हिमालयण बेरी जूस की 1-1 चम्मच दवा सुबह खाली पेट ओर रात को सोते समय 3 माह तक लेनी है
  1. बैद्यनाथ की संख पुष्पी 2-2 चमच खाना खाने के बाद दोनो टाइम लेनी है 
  2. Voees syrup मेडिकल से खरीद लें और बच्चों को एक चम्मच सुबह शाम दें और वयस्क ज्यादा उम्र के व्यक्ति को दो चम्मच सुबह शाम यह सिरप दें.
  3. मुलेठी चूर्ण 1/2 चम्मच शहद के साथ दिन में दो बार दें और खदिरारिष्ट सिरप पिए. योग में अनुलोम विलोमा और कपालभाति करे साथ ही शंख मुद्रा का अभ्यास करें। इसके अलावा शब्दों को बोलने की प्रैक्टिस करे. सिंहासन रोजाना करे.

इसके इलावा-
  1. आंवला – अगर रोगी नियमित रूप से 2 ताज़ा हरे आंवला रोजाना चबाकर खाये तो कुछ ही दिनों में उसके तोतलापन की शिकायत पूरी तरह से गायब हो जाती है, इसका प्रयोग महीनो तक करते रहना चाहिए जिससे यह रोग जड़ से समाप्त हो जाता है. इससे आवाज़ साफ़ हो जाती है. (हकलाने और तुतलाना के लिए इस प्रयोग 2-3 महीने तक रोजाना करे)।
  2. बादाम की गिरी और 7 कालीमिर्च दोनों को मिलाकर जरा सा पानी डालकर अच्छे से घिस लें व चटनी जैसा बना लें. अब इसमें पीसी बारीक़ मिश्री मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट रहने पर चाटें, कुछ ही दिनों के प्रयोग से तोतलापन हकलाने का इलाज हो जायेगा.
  3. 2 कालीमिर्च मुंह में रख कर चूसते रहे, ऐसा आपको दिन में 2-3 बार रोजाना करना चाहिए इस प्रयोग को लम्बे समय तक करे, यह एक बेहतरीन आवाज़ साफ़ करने का उपाय है.
  4. 6 ग्राम सौंफ ले और इसे अच्छे से कूटकर लगभग 350 ग्राम पानी में अच्छे से उबाल लें. इसे तब तक उबाले जब तक की पानी उबलकर 100 ग्राम न रह जाये. फिर इस पानी में 55 ग्राम मिश्री और 255 ग्राम गाय का दूध मिलाकर रोजाना रात को सोने से पहले पिए. इस प्रयोग से हकलाकर बोलना दूर हो जाता है, यह एक रामबाण उपाय है.
  5. छुहारे तोतलापन के इलाज में बहुत ही असरकारी सिद्ध होते है, हकलाहट को ख़त्म करते है. इसके लिए आपको रोजाना 3 छुहारे दूध के साथ खाने है, इसे रात को करे तो ज्यादा अच्छा रहेगा क्युकी इस प्रयोग को करने के एक डेढ़ घंटे बाद तक पानी नहीं पीना होता है. इसके अलावा दिन में भी छुहारे खाते रहे, यह एक आयुर्वेदिक इलाज है.
  6. हकलाने से छुटकारा पाने के लिए आप रोजाना रात को सोने से पहले एक कटोरे पानी में 7-8 बादाम डालकर छोड़ दें, फिर सुबह इनकी ऊपरी छाल को निकाल कर पीस लें व पेस्ट जैसा बनाकर 25-30 ग्राम मक्खन में बादाम के पेस्ट को मिलाकर रोजाना खाये. इस प्रयोग से मानसिक क्षमता भी बढ़ती है, आंखे तेज होती है साथ ही हकलाने, तुतलाना से छुटकारा भी मिलता है. 
  7. हकलाने तुतलाना का उपचार करने के लिए 7 दिन में 3 बार ब्राह्मी तेल को हल्का गर्म करके 15-20 मिनट तक सर पर अच्छे मालिश करे, तो 100% इससे हकलाने और तुतलाना में लाभ होता है, तुतलाने की दवा की तरह फायदा करता है.
  8. रोजाना सुबह खली पेट कालीमिर्च के कुछ दानो को मक्खन में मिलाकर खाने से भी तुतलाना बंद हो जाता है.
  9. तोतलापन दूर करने के उपाय में ए, ई, आई, ओ, यु, इन शब्दों को रोजाना एकांत में जाकर एक-एक कर के जोर जोर से मंत्र की तरह बोले.
  10. रोजाना सुबह और शाम जिस तरह शेर दहाड़ता है, ठीक उसी स्थिति में बैठकर अपने मुंह को- पहला : पूरी तरह से खोले जीभ को बाहर निकाले. आपको दाहड़ने की जरूरत नहीं है आप सिर्फ अपने मुंह को पूरी तरह खोल ले ताकि मुंह की सारी मांपेशियों का अच्छे से व्यायाम हो जाये यह तुतलाना हकलाने का योग है. दूसरा : ऐसे ही बैठे रहे वापस पुरे मुंह को खोले और अपनी जीभ को मोड़कर मुंह के अंदर ले जाए, आपसे जितना हो सके अंदर ले जाये और कुछ देर वैसे ही जीभ को रहने दे. इस तुतलाना के योग को दिन में आप कई बार कर सकते है. हकलाने जैसी स्थिति बिलकुल ठीक हो जाती है.
  11. हकलाने के रोग में अमलतास का गुदा व हरा धनिया दोनों को मिक्सर में पीसकर रस बनाये और 20-25 दिनों तक रोजाना पिए.
  12. तुतलाना की समस्या रहने पर हमेशा जब भी बोले तो आराम-आराम से एक-एक शब्द बोले
  13. प्रक्टिसे के लिए रोजाना books पड़ें, इससे हकलाहट की आदत ख़त्म होगी
  14. OM शब्द का रोजाना उच्चारण करे
  15. अपना होंसला बनाये रखे, लोग हँसते है तो हंसने दें उस पर ध्यान न दें
  16. आईने के सामने खड़े होकर बोलने का अभ्यास भी करे
इस तरह आप बताये गए इन सभी नुस्खों को नियमित रूप से करे, और जो पतंजलि में दवा और सिरप बताई है उसका भी सेवन करे. इसके अलावा अकेले जाकर तेज-तेज जल्दी से बोलने का अभ्यास भी करते रहे. अगर आप ऐसा ही सही तरीके से करते रहे तो जल्द ही आपको तोतलापन से छुटकारा मिल जायेगा

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सोंठ, सुहागा, सोंचर, गांधी, सहिजन के संग गोली बांधी। 
80 वात 84 बाय कहै धनवन्तरि तड़ से जाये।।
वातान्तक बटीः-- 
यह वातान्तक वटी वात विकृत होने से उत्पन्न होने वाले 80 प्रकार के वात रोगों में लाभ पहुचाती है..शरीर के जोड़ो में दर्द हो या पेट में गैस बनती हो यह लाभ अवश्य करती है आमवात की समस्या के लिए यह वटी एक परीक्षित उपाय है.

आयुर्वेदिक ग्रन्थों के अनुसार वात 80 प्रकार का होता है एवं इसी से सामंजस्य रखता हुआ एक और रोग है जिसे बाय या वायु कहते हैं। यह 84 प्रकार का होता है। यहाँ प्रश्न यह उठता है कि जब वात एवं वायु के इतने प्रकार हैं, तो, यह कैसे पता लगाया जाय कि यह वात रोग है या बाय एवं यह किस प्रकार का है ? यह कठिन समस्या है और यही कारण है कि इस रोग की उपयुक्त चिकित्सा नहीं हो पाती है, जिससे इस रोग से पीड़ित 50 प्रतिशत व्यक्ति सदैव परेशान रहते हैं। उन्हें कुछ दिन के लिए इस रोग में राहत तो जरूर मिलती है, परन्तु पूर्णतया सही नहीं हो पाता है। इस रोग की चिकित्सा एलोपैथी के माध्यम से पूर्णतया सम्भव नहीं है, जबकि आयुर्वेद के माध्यम से इसे आज कल 90 प्रतिशत तक जरूर सही किया जा सकता है

सामग्री----- 
(1)सोंठ 30 ग्राम
(2)सुहागा 30 ग्राम
(3)सोंचर (काला नमक) 30 ग्राम
(4) हीरा हींग 30 ग्राम 
(5) सहिजन की अंतरछाल का रस आवश्यकतानुसार,

निर्माण विधि----- 
(1)सर्वप्रथम कच्चे सुहागे को जौकुट कर लोहे के तवे पर भून लें भूनने पर कच्चा सुहागा लाई की तरह फूल जायेगा, फूला हुआ सुहागा ही प्रयोग करना है..

(2) अब एक बर्तन में सहिजन की छाल का रस लेकर इसमें हींग घोल लें। हींग के घुल जाने पर इस घोल में चूर्ण किया हुआ सोंठ, फुलाया सुहागा एवं काला नमक को मिला दें और ठीक से घुटाई करें कुछ देर में समस्त द्रव्य आपस में चिपकने लगेंगे तब उसकी चने के आकार की गोलियां बना लें और छाया में सुखाकर बन्द कांच के ढक्कन बंद बर्तन में रख लें।

सेवन विधि ----- एक से दो गोली नाश्ते व् भोजन के बाद गरम पानी से लें.. बच्चों को ये गोलियां नही देनी है

अपथ्य --- वातकारक और शीतल प्रकृति के भोजन का परहेज करें

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उच्च रक्तचाप (High BP)
1.दालचीनी- 
दालचीनी जो मसाले के रूप में उपयोग होता है वो आप पत्थर में पिस कर पावडर बनाके आधा चम्मच रोज सुबह खाली पेट गरम पानी के साथ खाइए । अगर थोडा खर्च कर सकते है तो दालचीनी को शहद के साथ लीजिये (आधा चम्मच शहद आधा चम्मच दालचीनी) गरम पानी के साथ, ये हाई BP के लिए बहुत अच्छी दवा है । पर दोनों में से कोई एक । 
2.मेथी दाना-
मेथी दाना आधा चम्मच लीजिये एक ग्लास गरम पानी में और रात को भिगो दीजिये, रात भर पड़ा रहने दीजिये पानी में और सुबह उठ कर पानी को पि लीजिये और मेथी दाने को चबा के खा लीजिये । ये बहुत जल्दी आपकी हाई BP कम कर देगा, देड से दो महीने में एकदम स्वाभाविक कर देगा ।
3.अर्जुन की छाल-
अर्जुन एक वृक्ष होता है उसकी छाल को धुप में सुखा कर पत्थर में पिस के इसका पावडर बना लीजिये । आधा चम्मच पावडर, आधा ग्लास गरम पानी में मिलाकर उबाल ले, और खूब उबालने के बाद इसको चाय की तरह पि ले । ये हाई BP को ठीक करेगा, कोलेस्ट्रोल को ठीक करेगा, ट्राईग्लिसाराईड को ठीक करेगा, मोटापा कम करता है , हार्ट में अर्टेरिस में अगर कोई ब्लोकेज है तो वो ब्लोकेज को भी निकाल देता है ये अर्जुन की छाल । डॉक्टर अक्सर ये कहते है न की दिल कमजोर है आपका; अगर दिल कमजोर है तो आप जरुर अर्जुन की छाल लीजिये हरदिन , दिल बहुत मजबूत हो जायेगा आपका, आपका ESR ठीक होगा, ejection fraction भी ठीक हो जायेगा।
4.लौकी का रस-
एक कप लौकी का रस रोज पीना सबेरे खाली पेट नास्ता करने से एक घंटे पहले और इस लौकी की रस में पांच धनिया पत्ता, पांच पुदीना पत्ता, पांच तुलसी पत्ता मिलाके, तीन चार काली मिर्च पिस के ये सब डाल के पीना. ये आपका BP बहुत अच्छा ठीक करेगा और ये ह्रदय को भी बहुत व्यवस्थित कर देता है , कोलेस्ट्रोल को ठीक रखेगा, डाईबेटिस में भी काम आता है ।
5.बेल पत्र की पत्ते-
बेल पत्र उच्च रक्तचाप High में बहुत काम आते है । पांच बेल पत्र ले कर पत्थर में पिस कर उसकी चटनी बनाइये अब इस चटनी को एक ग्लास पानी में डाल कर खूब गरम कर लीजिये , इतना गरम करिए के पानी आधा हो जाये , फिर उसको ठंडा करके पी लीजिये । ये सबसे जल्दी उच्च रक्तचाप High को ठीक करता है और ये बेलपत्र आपके शुगर को भी सामान्य कर देगा । जिनको उच्च रक्तचाप High BP और शुगर दोनों है उनके लिए बेल पत्र सबसे अच्छी दावा है ।
6.गौमूत्र-
देशी गाय का मूत्र पीये आधा कप रोज सुबह खाली पेट ये बहुत जल्दी उच्च रक्तचाप High BP को ठीक कर देता है । और ये गोमूत्र बहुत अद्भूत है , ये उच्च रक्तचाप High BP को भी ठीक करता है और निम्न रक्तचाप Low BP को भी ठीक कर देता है - दोनों में काम आता है और यही गोमूत्र डाईबेटिस को भी ठीक कर देता है , Arthritis , Gout (गठिया) दोनों ठीक होते है । अगर आप गोमूत्र लगातार पी रहे है तो दमा भी ठीक होता है अस्थमा भी ठीक होता है, Tuberculosis भी ठीक हो जाती है । इसमें दो सावधानिया ध्यान रखने की है के गाय सुद्धरूप से देशी हो, और वो गर्भावस्था में न हो ।

निम्न रक्तचाप Low BP
1.गुड-
गुडपानी में मिलाके, नमक डालके, नीबू का रस मिलाके पी लो । एक ग्लास पानी में 25 ग्राम गुड, थोडा नमक नीबू का रस मिलाके दिन में दो तिन बार पिने से निम्न रक्तचाप Low BP सबसे जल्दी ठीक होगा ।
2.अनार का रस-
अनार का रस पियो नमक डालकर इससे बहुत जल्दी निम्न रक्तचाप Low BP ठीक हो जाती है , गन्ने का रस पीये नमक डालकर ये भी निम्न रक्तचाप Low BP ठीक कर देता है, संतरे का रस नमक डाल के पियो ये भी निम्न रक्तचाप Low BP ठीक कर देता है , अनन्नास का रस पीये नमक डाल कर ये भी निम्न रक्तचाप Low BP ठीक कर देता है 3.मिश्रीऔर मक्खन-
मिश्रीऔर मक्खन मिलाके खाओ - ये निम्न रक्तचाप Low BP की सबसे अच्छी दावा है ।
4.दूध और घी-
दूध में घी मिलाके पियो , एक ग्लास देशी गाय का दूध और एक चम्मच देशी गाय की घी मिला के रात को पीने से निम्न रक्तचाप Low BP बहुत अच्छे से ठीक होगा ।
5.नमक का पानी-
नमक का पानी पियो दिन में दो तीन बार , जो गरीब लोग है ये उनके लिए सबसे अच्छा है ।

नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |

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