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सर मेरी उम्र उनचास साल है। अपनी सारी रिपोर्ट्स आपको भेज रहा हूँ मैं एक डायबिटीज़ का मरीज़ हूँ। शुगर लेवल ऊपर नीचे होता रहता है खानपान और परिस्थितियों के अनुसार लेकिन मैं जो परेशानी खास तौर पर देख रहा हूँ वो ये है कि मेरी सेक्स लाइफ़ खत्म हो गयी है। डॉक्टर का कहना है कि इस तरह की नपुंसकता मुझे मेरी शुगर की प्रॉब्लम के कारण हुई है क्या आयुर्वेद में मेरे लिये कोई इलाज है? राजशेखर सिंह नई दिल्ली 
राजशेखर जी, आपकी रिपोर्ट्स को देखा और आपकी समस्या को समझा। आप यदि मधुमेह का सही उपचार लेकर अथवा आहार-विहार, आचार-विचार पर नियंत्रण रख कर अपनी शर्करा का स्तर सामान्य रखते हैं तो आपकी परेशानी का आयुर्वेद में सटीक उपचार है आप जरा भी परेशान न हों। आपने लिंग का उत्थान न होना, उत्तेजना का पूरी तरह समाप्त होजाना जैसे लक्षणों को अपने बड़े लम्बे से पत्र में विस्तार से लिखा है जिन्हें मैं समझ सकता हूँ। आपकी मधुमेह जन्य नपुंसकता की समस्या का हल प्रस्तुत है आप निम्न औषधियाँ चालीस दिन तक लीजिये। विश्वास करिये कि न सिर्फ़ आपकी लैंगिक समस्या हल हो जाएगी बल्कि आपकी मधुमेह (डायबिटीज़) के बाकी उपद्रव जैसे बार बार प्यास लगना, पेशाब लगना, भूख का बुरी तरह से प्रभावित करना, भयंकर कमजोरी आ जाना आदि अपने आप खत्म हो जाएंगे और शर्करा का स्तर भी नियंत्रित रहेगा। 
१.प्रमदेभांकुश रस एक गोली + पुष्पधन्वा रस एक गोली + बसंतकुसुमाकर रस एक गोली इन तीनों की एक खुराक बना कर दिन में दो बार नीचे लिखे मिश्रण के दो चम्मच के साथ भोजन के बाद लीजिये
 २.अश्वगंधारिष्ट + दशमूलारिष्ट + अर्जुनारिष्ट + बलारिष्ट बराबर मात्रा(प्रत्येक १०० मिली.) में लेकर इसमें शुद्ध शिलाजीत १० ग्राम घोल दीजिये, शक्ति मिश्रण तैयार है। यदि कोई भी शंका या परेशानी हो तो आप सीधे मुझसे मोबाइल नंबर Whatsapp: 9911686262 पर संपर्क करें।

बसंतकुसुमाकर रस क्या है ? : Basantkusmakar Ras in Hindi
वसंत कुसुमाकर रस टेबलेट या पाउडर के रूप में एक आयुर्वेदिक दवा है, जिसका उपयोग मधुमेह के उपचार, मूत्र मार्ग से संबंधित रोग, स्मृति हानि आदि के लिए किया जाता है। इस दवा को आयुर्वेद चिकित्सक से मिले नुस्खे के साथ चिकित्सकीय देखरेख में लेना चाहिए।

बसंतकुसुमाकर रस के घटक द्रव्य : Basantkusmakar Ras Ingredients in Hindi
✥ प्रवाल भस्म
✥रससिन्दूर
✥मोती पिष्टी
✥अभ्रक भस्म
✥रौप्य (चाँदी) भस्म
✥सुवर्ण भस्म
✥लौह भस्म,
✥नाग भस्म
✥बंग भस्म
✥अडूसा
✥हल्दी
✥गन्ने का रस
✥चन्दन

बसंतकुसुमाकर रस बनाने की विधि : Preparation Method of Basantkusmakar Ras- प्रवाल भस्म या पिष्टी, चन्द्रोदय या रससिन्दूर, मोती पिष्टी या भस्म, अभ्रक भस्म- प्रत्येक ४-४ तोला, रौप्य (चाँदी) भस्म, सुवर्ण भस्म २-२ तोला, लौह भस्म, नाग भस्म और बंग भस्मप्रत्येक ३-३ तोला लेकर सबको पत्थर के खरल में डालकर अडूसे की पत्ती का रस, हल्दी का रस, गन्ने का रस, कमल के फूलों का रस, मालती के फूलों का रस, शतावरी का रस, केले के कन्द का रस, और चन्दन भिंगोया हुआ जल या चन्दन-क्वाथ प्रत्येक की सात-सात भावना दें। प्रत्येक भावना में ३-६ घण्टा मर्दन करना चाहिए। अन्त की भावना के समय उसमें २ तोला अच्छी कस्तूरी मिलाकर ३ घण्टा मर्दन कर १-१ रत्ती की गोलियाँ बना, छाया में सुखा लें। इस योग में यदि २ तोला अम्बर भी मिला दें, तो यह विशेष गुणकारक होता है।

उपलब्धता : यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

सेवन विधि ,मात्रा और अनुपान :

१-१ गोली, सुबह-शाम।

• नपुंसकता और वीर्य श्राव में धारोष्ण गोदुग्ध के साथ दें।
• मस्तिष्क के विकारों में आँवले के मुरब्बे के साथ दें।
• रक्त-पित्त और रक्त प्रदर में वासा-रस और मधु के साथ दें।
• कास-श्वास और क्षय में चौसठ प्रहर पीपल के साथ मधु मिलाकर दें।
• अम्लपित्त में कुष्माण्ड अवलेह के साथ हृदयरोग में अर्जुन छाल के क्वाथ से दें।
• प्रमेह में गुडूची स्वरस और मधु के साथ दें।
• मधुमेह में जामुन की गुठली का चूर्ण और शिलाजीत के साथ दें।

बसंतकुसुमाकर रस के फायदे और उपयोग : Basantkusmakar Ras Benefits in Hindi

1- यह हुद्य, बल्य (बलवर्धक) उत्तेजक, वृष्य, बाजीकरण और रसायन है।

2-स्वर्ण, मोती, अभ्रक, रससिन्दूर आदि बलवर्द्धक द्रव्यों के संयोग से बनने के कारण यह सभी रोगों के लिए बहुत फायदेमन्द है।

3- स्त्री-पुरुषों के जननेन्द्रिय सम्बन्धी विकारों पर इसका बहुत अच्छा और तात्कालिक प्रभाव पड़ता है।

4-मधुमेह बहुमूत्र और हर तरह के प्रमेह, नामर्दी, सोमरोग, श्वेतप्रदर, योनि तथा गर्भाशय की खराबी, वीर्य का पतला होना या गिरना व वीर्यसम्बन्धी शिकायतों को जल्दी दूर कर शरीर में नयी स्फूर्ति पैदा करता है।

5-वीर्य की कमी से होनेवाले क्षयरोग को यह बहुत उत्तम दवा है।

6-हृदय और फेफड़े को इससे बल मिलता है।

7- हृदय की कमजोरी, शूल तथा मस्तिष्क की निर्बलता, भ्रम, याददास्त की कमी, नींद न आना आदि विकारों को दूर करता है।

8-पुराने रक्तपित्त, कफ खाँसी, श्वास, संग्रहणी क्षय, रक्तप्रदर, श्वेत प्रदर, खून की कमी और बुढ़ापे तथा रोग छूटने के बाद की कमजोरी में इस रसायन का प्रयोग बहुत लाभदायक है।

9-अनुपान भेद से अनेक प्रकार के रोगों को नष्ट करता है।

10- मधुमेह रोग की यह प्रसिद्ध औषध है।

11-छोटी आयु में अप्राकृतिक ढंग (हस्तमैथुन, गुदामैथुन आदि) से वीर्य नाश करने से अथवा ज्यादा स्त्री-प्रसंग (मैथुन) करने से वीर्य पतला हो जाता है, ऐसे मनुष्य का स्त्री-विषयक चिन्ता करने मात्र से वीर्य-पतन हो जाता है। ऐसी स्थिति में बसन्तकुसुमाकर के सेवन से बहुत शीघ्र फायदा होता है, क्योंकि यह रसायन और वृष्य होने के कारण वीर्यवाहिनी शिरा तथा अण्डकोष में ताकत पहुँचाता है, जिससे वीर्यवाहिनी शिरा में वीर्य धारण करने की शक्ति उत्पन्न होती है।

12-पुराने नकसीर रोग में इसका उपयोग किया जाता है।

13-किसी-किसी मनुष्य की आदतसी हो जाती है कि अधिक गर्म पदार्थ के सेवन या धूप में विशेष चलने-फिरने आदि से नाक फूटकर रक्त निकलने लगता है। इसे भाषा में नकसीर या नक्की छूटना कहते हैं। इसमें भी इसको शर्बत अनार, दाडिमावलेह, आँवला-मुरब्बा या गुलकन्द के साथ देने से शीघ्र लाभ होता है। साथ ही दूर्वादि घृत की मालिश भी सिर में करनी चाहिए।

14-जिस स्त्री को समय से ज्यादा दिन तक और अधिक मात्रा में रज: स्त्राव होता हो, उसके लिए भी यह दवा बहुत उपयोगी है।

15-शरीर में खून (रक्त) ज्यादा पतला हो जाने से ऐसा होता है। ऐसी स्त्री को शरीर के किसी अंग में जरा-सा कट जाने या खुर्च जाने अथवा सूई आदि चुभ जाने से बहुत खून निकलता है, जो बहुत देर में बन्द होता है। ऐसी स्थिती में रक्त गाढ़ा करने के लिये बसन्तकुसुमाकर रस का प्रवालपिष्टी के साथ उपयोग करना लाभप्रद है।

16-बुढ़ापे में सब इन्द्रियाँ प्रायः शिथिल हो जाती हैं, किन्तु सबसे ज्यादा शरीर के अन्तरवयवों में आँतों की शिथिलता होने से यह अपने कार्य करने में असमर्थ हो जाती है, जिससे अन्नादिकों का पचन-कार्य ठीक से नहीं हो पाता। इसका प्रभाव हृदय और फुफ्फुसों पर विशेष पड़ता है। फिर कास और श्वास की उत्पत्ति होती है। यह वृद्धों के लिये बहुत भयंकर व्याधि है। इसमें बसन्तकुसुमाकर रस का अभ्रक भस्म के साथ प्रयोग जादू-सा असर करता है।

17-इन्द्रियों की शक्ति बढ़ाने, रसरक्तादि धातुओं की वृद्धि कर हृदय, मस्तिष्क को बल प्रदान करने, शारीरिक कान्ति बढ़ाने, शुक्र और ओज को बढ़ाकर स्वास्थ्य को स्थिर बनाने में यह रस परमोत्तम रसायन का कार्य करता है।

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मधुमेह (डायबिटीज) के कारण, लक्षण, निदान और घरेलु उपचार
यह जटिल रोग है आचार्य चरक एवं सुश्रुत ने लगभग 3 हजार वर्ष पूर्व इसका उल्लेख किया था आज भी आयुर्वेद विज्ञान में इस पर शोध चल रहा है ।एक बार यह रोग हो जाने पर इसे जिंदगी भर झेलना पड़ता है अगर इसके होने के प्रारम्भिक स्तर पर पता लग जाये तो कुछ रोगियों को आयुर्वेद के द्वारा पथ्य ( परहेज ) रखते हुए औषधि सेवन करवाने पर कई रोगियों को पूर्ण रूप से ठीक किया जा सकता है । इस रोग में सातों धातुएं दूषित हो जाती है । इस कारण यह रोग कठिनता से ठीक होता है एवं रोगी को उम्र भर दवा के सहारे जीना होता है  शर्करा शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। बिन उर्जा का शरीर मृत सा होता है। यही ऊर्जा प्रदान करने वाली शर्करा जब शरीर के काम न आकर बिना रासायनिक परिवर्तन के मूत्रद्वारा निकल जाती है तब हम इसे मधुमेह या Diabetes Millitus कहते हैं।रोगी को अधिक मुत्र आने लगता है, प्यास बढ़ती है, मुख सूखता है और रोगी दुर्बल हो जाता है। इसकी जो  चिकित्सा है वो सिर्फ रोकथाम तथा नियंत्रण तक ही सीमित है।

मधुमेह के प्रकार (Types of diabetes)
1. Diabetes टाइप 1 
2. Diabetes टाइप 2
3. Diabetes टाइप 3
डायबिटीज टाइप 1 अनुवांशिक होता है।
डायबिटीज टाइप 2 मोटे लोगों में अधिक पाया जाता है।
डायबिटीज टाइप 3 गर्भवती महिलाओं को होता है।

 मधुमेह के कारण -
मधुमेह का प्रमुख कारण इंसुलिन है। शरीर में पैंक्रियाज(Pancreas)की कोशिकाएं इंसुलिन को उत्पन्न करते हैं और इसी insulin की वजह से शरीर को ऊर्जा मिलती है। Insulin की कमी हो जाने से आहार का उपयोग शरीर मे नही हो पाता है जिससे शरीर में शर्करा की मात्रा अधिक होने लगती है और हमारे गुर्दें इस शर्करा रोकने में असमर्थ होते है। अतः सारी शर्करा मूत्र के साथ निकल जाती है और रोगी दुर्बल हो जाता है।
  मधुमेह धीरे धीरे से मानव शरीर को जकड़ लेता है और असहाय कर देता है। मधुमेह का वास्तविक कारण आज भी चिकित्सा विज्ञानियों को पता नहीं चल सका है। वो मानते हैं कि 50% डायबिटीज वंशानुगत होता है। वंशानुगत मधुमेह diabetes type1 के अंतर्गत आता है।
  अत्यधिक मानसिक परिश्रम तनाव, चिंता, क्रोध, यकृतदोष, मूत्ररोग, शराब, बिड़ी-सिगरेट तथा अन्य नशे की लत, शारिरिक परिश्रम न करना, अधिक पौष्टिक भोजन करना तथा संक्रामक रोगों के कारण भी यह रोग हो सकता है। इसके अलावा नींद की कमी, थाइरोइड gland की अतिक्रियता की कारण से भी diabetes हो सकता है।

मधुमेह के लक्षण (Symptoms of diabetes mellitus)-

  1. अधिक मूत्र आना, प्यास लगना, धीरे धीरे भूख की कमी, सिरदर्द, घबराहट, चक्कर आना, मुख सुखना, कब्ज आदि ही मधुमेह के प्रमुख लक्षण हैं।
  2. रोग बढ़ने के साथ साथ फोड़े फुंसियां भी निकलने लगती है और वजन घट जाता है। रोगी हल्की सी ठंड लगते ही सर्दी- जुकाम, बुखार न्यूमोनिया आदि का शिकार होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार किसी भी प्रकार के संक्रमण diabetes रोगी को जल्द ही पकड़ लेता है।
  3. कुछ लोग अचानक मोटे हो जाते हैं जो कि मधुमेह का लक्षण हो सकता है जो Diabetes type2 के अंतर्गत आता है। इसलिए तुरन्त रक्त और मूत्र की जांच करवाएं। Diabetes Mellitus में कोमा की अवस्था बहुत ही खतरनाक होती है। इसीलिए रोगी को खुद सचेत रहना चाहिए।

 मधुमेह के लिये जरूरी रक्त जाँच (Blood test for Diabetes) 
   
मधुमेह के लिए सुबह खाली पेट या फिर खाना खाने के दो घंटे बाद टेस्ट किया जाता है। खाली पेट (Normal Blood Fasting) टेस्ट करने से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा के बारे में पता चलता है। इसी टेस्ट से किसी को डायबिटीज होने या नहीं होने के बारे में जाना जाता है। खाली पेट जाँच करने पर शुगर लेवल 110 मिलीग्राम से ऊपर होने की अवस्था को मधुमेह की शुरुआत समझा जा सकता है। 
खाना खाने के बाद जो टेस्ट (Post Prandial Test) किया जाता है उसमें शुगर लेवल 110 से 140 मिलीग्राम के बीच होनी चाहिये। इन दोनों टेस्ट के अलावा HBA1C टेस्ट से पिछले तीन महीने के शुगर लेवल की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।          
  मधुमेह के घरेलू चिकित्सा (Home Remedies for diabetes mellitus)
 वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के द्वारा बहुत सारे रोगों से निजात पाया जा सकता है। हम इन्हीं चिकित्सा पद्धतियों तथा घरेलू चिकित्सा के बारे में जानेंगे-
  1. चार या पाँच आम के पत्ते को एक कप पानी मे उबालकर रातभर रहने दें और सुबह पियें। लगातार पीते रहें। हालांकि आम का फल मधुमेह में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है पर इसके पत्ते हम प्रयोग कर सकते हैं।
  2.  मेथी को हम मसाले के रूप में प्रयोग करते हैं पर इसका इस्तेमाल हम मधुमेह में कर सकते हैं। दो चम्मच मेथी को अच्छी तरह धो लें फिर एक कप पानी में डालकर रातभर रहने दें और सुबह पियें।
  3.  करेला १००ग्राम, जामुन के बीज १०० ग्राम, आंवला १०० ग्राम, मेथी १०० ग्राम और अमरूद १०० ग्राम को पीसकर सुबह शाम पानी के साथ दें। 
  4. चीनी, गुड़, मिठाई का सेवन बिल्कुल न करें।
  5. मानसिक तनाव से बचे।
  6. मीठे फल न दे।
  7. बिड़ी- सिगरेट, तम्बाकू, मदिरापान बिल्कुल करने न दें।
  8. धूप में ज्यादा घूमने न दें।
  9. कब्ज(constipation) होने न दें।
  10.  Insulin का प्रयोग सिर्फ जरूरी अवस्था में ही करें।
  11.  ठंडी पेय न दें।
  12. सिर्फ़ हल्के व्यायाम ही करें।
  13. पाचनक्रिया को ठीक रखें।
  14. मट्ठा, शहद, जौ की सत्तू दें।
  15. प्रोटीन ज्यादा लें पर कार्बोहाइड्रेट एकदम सीमित मात्रा में लें।
  16. तेल की मालिश करें।
  17. पत्तेदार सब्जियां खाएं।
  18. माँस-मछली, अण्डे, मक्खन आदि संतुलित मात्रा में लें।
  19. रोगी का वजन पर विशेष ध्यान रखें।
  20. हप्ते में एक या दो दिन उपवास रखने दें।
  21. हप्ते में दो बार कटिस्नान करने दें।
  22. अग्न्याशय के स्थान पर मिट्टी की लेप दें। 
  23. संतुलित आहार से ही मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए रोगी की खान-पान पर विशेष ध्यान दें।                                                                                                                             
 नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |
यदि आपको हमारा लेख पसंद आया हो तो हमे कमेन्ट करके अवश्य बताये | साथ ही किसी भी प्रकार के परामर्श के लिए आप अपना सवाल कमेन्ट बॉक्स में छोड़े हमारे विशेषज्ञों द्वारा जल्द ही आपको जवाब दिया जायेगा |
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मधुमेह ( शुगर ) की आयुर्वेदिक चिकित्सा-
मधुमेह दमन चूर्ण 100 ग्राम
नाग भस्म 10 ग्राम
शिलाजीत 10 ग्राम
उपरोक्त में शिलाजीत को पहले खरल में अच्छी तरह पीस लें फिर सभी ओषधियों को आपस मे भलीभांति मिलाकर 3 ग्राम सुबह 3 ग्राम शाम को ले ।
बसन्तकुसुमाकर रस एक गोली सुबह एक गोली शाम को लेनी चाहिए । 
चन्द्र प्रभा वटी 2 गोली सुबह 2 गोली शाम को लें गाय के दूध के साथ ।
        
नोट - ध्यान रहे मधुमेह , नाग भस्म , ओर शिलाजीत से शुगर लेवल से कम भी आ सकती है । लेवल ज्यादा बढ़ हुआ नही हो तो बसन्त कुसुमाकर रस ओर चन्द्र प्रभा वटी ही पर्याप्त है । 

नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |

यदि आपको हमारा लेख पसंद आया हो तो हमे कमेन्ट करके अवश्य बताये | साथ ही किसी भी प्रकार के परामर्श के लिए आप अपना सवाल कमेन्ट बॉक्स में छोड़े हमारे विशेषज्ञों द्वारा जल्द ही आपको जवाब दिया जायेगा |

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 Health problem

मधुमेह का सामान्य परिचय

वर्तमान समय में डायबिटीज महामारी के रूप में फ़ैल चुकी है और निरंतर रूप से इसके दुष्प्रभाव बढ़ते ही जा रहे है | वर्तमान समय में लगभग 35% भारतीय इस समस्या से परेशान है और दिनोंदिन यह संख्या बढती ही जा रही है | ऐसे में आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा इस समस्या को नियंत्रित करना आसान हो रहा है |
मधुमेह के कारण :
1. जीवनशैली : गतिहीन जीवनशैली, अधिक मात्रा में जंक फूड, फिजी पेय पदार्थो का सेवन और खाने-पीने की गलत आदतें मधुमेह का कारण बन सकती हैं। घंटों तक लगातार बैठे रहने से भी मधुमेह की संभावना बढ़ती है।

2. सामान्य से अधिक वजन, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता : अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय न हो अथवा मोटापे का शिकार हो, उसका वजन सामान्य से अधिक हो तो भी मधुमेह की सम्भावना बढ़ जाती है। ज्यादा वजन इंसुलिन के निर्माण में बाधा पैदा करता है। शरीर में वसा की लोकेशन भी इसे प्रभावित करती है। पेट पर अधिक वसा का जमाव होने से इंसुलिन उत्पादन में बाधा आती है, जिसका परिणाम टाइप 2 डायबिटीज, दिल एवं रक्त वाहिकाओं की बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है। ऐसे में व्यक्ति को अपने बीएमआई (शरीर वजन सूचकांक) पर निगरानी बनाए रखते हुए अपने वजन पर नियन्त्रण रखना चाहिए।

3. जीन एवं पारिवारिक इतिहास : कुछ विशेष जीन मधुमेह की सम्भावना बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में मधुमेह का इतिहास होता है, उनमें इस रोग की सम्भावना अधिक होती है।

मधुमेह (डायबिटीज) स्पेशल आटा घर पर तैयार करे

  • गेहू-4 किग्रा
  • जौ-1½  किग्रा
  • इंद्र जौ -1/2 किग्रा 
  • चना-1 किग्रा
  • बाजरा/ज्वार-1 किग्रा
  • रागी-1 किग्रा
  • मैथी-1 किग्रा
  • घर से बहार के खाने को हमेशा नकारे करे |
  • किसी भी प्रकार के धुम्रपान शराब आदि का सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए |
  • अधिक से अधिक अपक्वाहार का सेवन करना चाहिए |
  • कच्चे फल व सब्जियों जैसे पपीता नाशपाती, मोषमी, अमरुद, जामुन, खरबूजा, निम्बू, आंवला, टमाटर, बेंगन, शलगम, फूलगोभी, करेला, लोकी, मैथी, पालक, तुरई, आदि का सेवन अधिक करना चाहिए |
  • अधिक कैलोरी युक्त खाने का सेवन नही करना चाहिए |

मधुमेह की प्राकृतिक चिकित्सा

  • सबसे पहले एनिमा के द्वारा पेट की सफाई करे |
  • योगाभ्यास , प्राणायाम व षट्कर्म का अभ्यास करे |
  • एनिमा से पेट साफ कर लेने के बाद 5:3 के अनुपात में पेट पर  गर्म ठंडी पट्टी लगाये |
  • मधुमेह स्पेशल अभ्यंग जो की पैंक्रियाज को अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है |
  • मधुमेह की प्राकृतिक चिकित्सा प्रारम्भ करते समय प्रारम्भ के 10 दिनों तक पॉइंट to पॉइंट अभ्यंग करवानी चाहिए |
  • NAVAL थेरेपी अभ्यंग के शुरुआत में करनी चाहिए |
  • सप्ताह में कम से कम एक दिन सम्पुर्ण बालू स्नान लेना चाहिए |
  • रोगी की पृकृति के अनुरूप उसके खाने में खाद्य पदार्थो को सम्मिलित करवाना चाहिए |

मधुमेह रोगी के लिए प्रतिदिन की आहार व्यवस्था

  1. (A) प्रात: 6 बजे बिना मुह साफ़ किये 6-7 तुलसी के पत्ते व् लगभग 2 ग्राम अदरक का टुकडा चबाये |
  2.  (B) प्रात: 6.30 बजे आम 2 पत्ती  , बील की 4 पत्तिया , जामुन 2 पत्तिया , नीम की 15 पत्तिया , 1 करेला या 5 पत्ते करेले के 100 मिली पानी लेकर सभी को एक साथ मिलाकर ज्यूस बनाकर सेवन करे | 
  3. शोचादि से निवृत होने के बाद प्रात: 9 बजे नाश्ते में 350 ग्राम 4 प्रकार की मोषमी कच्ची सब्जिया व फल ले | जैसे लोकी, करेला, गाजर, टमाटर, मुली, खीरा आदि
  4. अंकुरित अनाज व दाल का सेवन करे |
  5. 12–1 बजे के बीच खाने के साथ पत्तो वाली सलाद का उपयोग करे | साथ ही 200 मिली छाछ अवश्य ले |
  6. शाम 4-5 बजे के बीच भुने हुए चने या कुछ सूखे मेवे का सेवन करे |
  7. रात का खाना शाम 6-7 बजे के मध्य कर ले | खाना खाने के 5 मिनट बाद वज्रासन करे या 500 कदम टहले |
  8. अपथ्य -: तली भुनी व् डिब्बाबंद उत्पादों का सेवन बिलकुल नही करे | शर्करा युक्त भोजन का उपयोग निषेध |
  9. दूध का सेवन छानने के बाद करे |

प्राकृतिक चिकित्सक द्वारा बताये अनुसार नित्य योगाभ्यास करे

हम यह कुछ योगासनों के बारे में जानकारी दे रहे है जिन्हें हमारे द्वारा मधुमेह रोगियों की प्रकृति के अनुसार करवाया जाता है | सभी रोगियों को समान योगासन नही करवाए जा सकते है क्योकि सभी रोगियों को मधुमेह के अलावा और भी समस्या हो सकती है अत: योगाभ्यास करने से पहले किसी प्राकृतिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले जिससे आपको आशातीत लाभ प्राप्त हो सकेगा | अर्धमत्स्येन्द्रासन-(3मिनट), नोकासन-(3मिनट), वक्रासन, पश्चिमोत्तासन, हलासन, योगमुद्रा, ताड़ासन, गोमुखासन,  कपालभाती-(3-5मिनट), नाडी शोधन-(3-5मिनट), कटिचक्रासन-(3मिनट),  ध्यान(5-10मिनट)  आदि  का अभ्यास योग प्रशिक्षक की देख रेख में करे |

मधुमेह में सावधानिया

  • तनाव से बचना चाहिए |
  • कैफीन युक्त चाय के सेवन से बचे |
  • मीठे फलो के सेवन से बचे |
  • आम ,केले, अंगूर, सेब, खजूर आदि के अधिक सेवन से बचना चाहिए |
  • अपने आहार में मिठाइयो को सम्मिलित करने से बचे |
  • अपनी दिनचर्या को नियमित रूप से स्वस्थता बनाये रखने वाली बनाये रखे |
  • अपनी नियमित जांचे करवाते रहे |
  • चिकित्सक के सम्पर्क में रहे |
हमारे द्वारा बताई गई जानकारी आपको पसंद आयी हो कृपया कमेन्ट करके अवश्य बताये |
किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए कमेन्ट में अपनी समस्या से सम्बंधित प्रश्न पूछ सकते है , शीघ्र ही हमारे एक्सपर्ट्स द्वारा आपके सवालों का जवाब दिया जायेगा |
धन्यवाद!
अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करे –  पंचगव्य चिकित्सा परामर्श केंद्र: http://panchgavyatreatment.com/
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