हमें जीवित रखने के लिए रक्त हमारे शरीर के प्रत्येक भाग में धमनियों द्वारा पहुंचकर उसे पोषण देता है, यह अत्यंत आवश्यक कार्य हमारे हृदय द्वारा लगातार संपन्न होता रहता है। वह पंप की तरह खुलता दबता रहता है और रक्त को रक्त-वाहिनी धमनियों और नलिकाओं में आगे बढ़ाता रहता है। हृदय द्वारा रक्त को धमनियों में आगे बढ़ाने की क्रिया को ‘रक्तचाप’ खून का दबाव या ब्लड प्रेशर कहते हैं, यहां एक सर्वथा स्वभाविक शारीरिक क्रिया है, जिसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते।  
जब तक शरीर की धमनियों और रक्त नलिकाओं की दशा स्वभाविक रहती है या यूं कहे कि जब तक लचीली रहती है एवं उनके छिद्र पूरे खुले रहते हैं, तब तक रक्त को आगे बढ़ाने के लिए हृदय को अधिक दबाव डालने की आवश्यकता नहीं रहती और रक्त अपने स्वाभाविक रूप से हृदय में से निकलकर धमनियों और रक्त नलिकाओं द्वारा शरीर के प्रत्येक भाग में पहुंचता रहता है और इससे पूरे शरीर को पोषण तत्व प्राप्त होते रहते हैं। लेकिन जब धमनियों और रक्त नलिकाओं के छिद्र संकरे हो जाते हैं तो हृदय को अधिक दबाव डालकर उन पतले छिद्र वाली तंग रक्तनलिकाओं से रक्त आगे बढ़ाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे वह कमजोर हो जाता है, इसे ही उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं ।
उच्च रक्तचाप के लक्षण :- चक्कर आना, सिर दर्द, किसी काम में दिल ना लगना, नींद ना आना, सांस लेने में तकलीफ, चिड़चिड़ापन, सीने में दर्द, जरा सी मेहनत में हाफने लगना, घबराहट, पसीना आना, हाजमा खराब होना आदि उच्च रक्तचाप के लक्षण है।

उच्च रक्तचाप के कारण :-
चीनी से बनी हुई चीजें, मसाले, तेल, खटाई, तली भुनी चीजें, प्रोटीन, रबड़ी, मलाई, दाल, कॉफी, चाय तथा सिगरेट आदि अधिक मात्रा में सेवन करना।  
बार-बार या अधिक खाना ।
मादक द्रव्यों का सेवन करना।
व्यायाम का अभाव, असंयम ।  
चिंता, क्रोध, भय, आदि मानसिक विकारों का बना रहना ।
मूत्र के रोग, पुराना कब्ज, तथा मानसिक सून्यता।
मोटापा, मधुमेह के रोग तथा गुर्दे आदि के रोग आदि कारण है ।

उच्च रक्तचाप का उपचार :-  
बड़े हुए रक्तचाप के रोगों में पहले - पहले लगभग 1 सप्ताह तक बड़ी मात्रा में सूखे लहसुन का रस जल में मिलाकर सेवन करना चाहिए। फिर रोग मिट जाने की तक उसकी मात्रा धीरे-धीरे कम करते हुए एकदम बंद कर दें, सूखे लहसुन की जगह पूरे हरे लहसुन का रस अधिक लाभकारी होता है, जिसे पानी में मिलाकर पीना चाहिए ।
बेलपत्र का काढ़ा दिन में 3 बार पीने से बड़ा हुआ रक्तचाप ठीक हो जाता है।
केले के वृक्ष के तने का रस पीने से बड़ा हुआ रक्तचाप नॉर्मल हो जाता है।
आंवला और हरा बहेड़ा लेकर धूप में सुखाएं, फिर दोनों को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण करें। 3 तोला यहा मिश्रण लेकर शाम को आधा लीटर जल के साथ किसी मिट्टी के बर्तन में भिगो दें, सवेरे जल जानकर भी जाए, तो कुछ ही दिनों में बढ़ा रक्तचाप अपनी असली अवस्था में आ जाएगा ।

खाद चिकित्सा :-
उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए हरी तरकारी अभी उतनी ही उपयोगी है जितने फल हरी सब्जियां। रक्तचाप के रोगी के लिए नमक का त्याग बहुत लाभदायक है, नमक यदि लिया ही जाए तो उसकी मात्रा साधारणतया नियमित मात्रा की चौथाई से अधिक न हो । नमक के बिना सब्जियों का खाना शुरु में थोड़ा कठिन होगा। इस कारण उन पर थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर खाए। हो सके तो पालक, चलाई, मेथी, लौकी, टिंडा, पत्ता-गोभी, अदरक, हरी मिर्च, धनिया, पुदीना आदि का अधिक सेवन करें ।
आटे को बिना छाने रोटी बनाएं, रोटी पर घी ना लगाएं।  
प्रतिदिन दो संतरे छीलकर खाए । फलों में अमरूद, नाशपाती, आम, सेव, जामुन, अनानास, रसभरी, खरबूजा, खजुर आदि खाये,
दूध बिना मलाई के गाय या बकरी का पीए ।

प्राकृतिक उपचार :-  
दिन में एक बार सिर पर ठंडे पानी में तौलिया भिगोकर व निचोड़ कर 10 मिनट तक रखें ।
पेंडू पर गीली मिट्टी की पट्टी या सिर्फ गीला तोलिया रखे, 10 मिनट तक।
सप्ताह में दो बार एनिमा ले।
दिन में एक बार पूरे शरीर की सूखी मालिश करें, फिर गीले तौलिए से शरीर पोछें।
सुबह-शाम शुद्ध ताजी हवा में 30 मिनट तक तेजी से टहलें,पहले
शाम को 30 मिनट ध्यान करें।  
उच्च रक्तचाप के रोगी कम से कम 8 से 9 घंटे की गहरी नींद ले।
वज्रासन, पवनमुक्तासन, योग मुद्रा व शवासन का अभ्यास करें।
नमक व चीनी का प्रयोग कम करें ।

निषेध :-
केले व कटहल का सेवन ना करें,
तला व मसालेदार भोजन का सेवन ना करें।  
क्रोध ना करें।
तनाव व चिंता न करते हुए सदा प्रसन्न रहने का प्रयत्न करें।  
शराब, सिगरेट, तंबाकू, जर्दा आदि का सेवन ना करें।  
रात को 7:00 बजे के बाद खाना ना खाए।  
बार-बार सीढ़ियां ना चढ़े ।

विशेष :-  
उच्च रक्तचाप के रोगी को रुद्राक्ष की माला पहनना चाहिए।
एक असली रुद्राक्ष अच्छी तरह धोकर रात को एक गिलास पीने के पानी में डालकर ढक दें, सुबह रुद्राक्ष निकालकर पानी पी लें, फिर सुबह एक गिलास पानी में रुद्राक्ष डालें व शाम को वह पानी पीने इस प्रकार यह पानी रोजाना दिन में 2 बार पिए।
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