पुरुषो को होने वाले रोगों की आयुर्वेदिक औषधि 
जानिए पुरुषो के रोगों के इलाज में उपलब्ध आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में | साथ ही यह जानिए की इन औषधियों का सेवन कैसे करें और क्या परहेज रखें |
इस लेख में निम्नलिखित बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक औषधियां बताई गई है |
पुरुष बांझपन 
पेशाब में जलन 
पथरी, किडनी स्टोन
किडनी रोग
नपुंसकता 
सफेद पानी 
थैलेसीमिया 
पुरुषो के विभिन्न रोगों के इलाज 
आयुर्वेद में मूत्रक्कृच्छ्, पेशाब में जलन ( Dysuria ) का इलाज-
गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम चन्द्रप्रभावटी – 40 ग्राम गिलोयघन वटी – 60 ग्राम 1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।
चन्दनासव – 450 मिली 4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।
(Urolythiasis/ Stone in Bladder) पथरी, किडनी स्टोन का इलाज-
अश्मरीहर क्वाथ – 300 ग्राम 1 चम्मच औषधि को 400 मिली पानी में पकाएं और जब 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात: सायं खाली पेट पिएं।
अश्मरीहर रस – 50 ग्राम 1-1 ग्राम औषधि को अश्मरीहर क्वाथ के साथ सेवन कराएं। गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम चन्द्रप्रभा वटी – 60 ग्राम 1-1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें। नोट– पत्थरचट्टे का पत्ता रोज प्रात: खाली पेट चबाकर खाए।
किडनी, वृक्क की निष्क्रियता (CRF) एवं किडनी रोग का इलाज-
सर्वकल्प क्वाथ – 100 ग्राम + वृक्कदोषहर क्वाथ – 200 ग्राम + नीम छाल – 5 ग्राम + पीपल छाल 5 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5–7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पियें।
गिलोयघन वटी – 60 ग्राम 2–2 गोली प्रात: व सायं खाली पेट सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।
वसन्तकुसुमाकर रस – 1 ग्राम + गिलोय सत् -10 ग्राम + हजरुल यहूद भस्म – 10 ग्राम + पुनर्नवादि मण्डूर – 20 ग्राम + शवेत पर्पष्टी – 5 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम चन्द्रप्रभा वटी – 60 ग्राम वृक्कदोषहर वटी – 60 ग्राम 1–1 गोली दिन में 2-3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे – घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।
नोट- उच्चरक्तचाप होने की स्थिति में मुक्तावटी की 1-1 या 2-2 गोली प्रात: एवं सायं खाली पेट पानी या काढ़े से लें।
नपुंसकता, शुक्राल्पता (Oligospermia , fertility ) नामर्दी का इलाज-
वसन्तकुसुमाकर रस – 1-3 ग्राम + त्रिवंगा भस्म – 5 ग्राम + अभ्रकं भस्म – 10 ग्राम + गिलोय सत् – 10 ग्राम + सिद्ध मकरध्वज – 2 ग्राम + प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।
शिलाजीत सत् – 20 ग्राम 2-2- बूँद दूध में मिलाकर सेवन करें।
यौवनामृत वटी – 5 ग्राम ,चन्द्रप्रभावटी- 40 ग्राम 2–2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद दूध से सेवन करें।
अश्वगन्धा चूर्ण – 100 ग्राम, शतावरी चूर्ण – 100 ग्राम, श्वेतमूसली चूर्ण – 100 ग्राम
1- 1 चम्मच चूर्ण को प्रात: एवं सायं भोजन के बाद गुनगुने जल के साथ सेवन करें।
शुक्राल्पता में उपरोक्त औषधियों के साथ -कौंच, बीज – 250 ग्राम+ सफेद गुञ्जा – 250 ग्राम कौंच बीज तथा सफेद गुज्जा को कुटकर 1-1 चम्मच की मात्रा में प्रात: एवं सायं । दूध के साथ सेवन करने पर शुक्राणुओं की वृद्धि तथा शरीर का पोषण होता है। (कौंच बीज तथा सफेद गुञ्जा का प्रयोग शोधन के पश्चात् ही करना चाहिए । इसका शोधन दोला यन्त्र विधि से किया जाता है। बीजों को 1 पोटली में लटकाकर 4 ली दूध में पकाएं, जब पकते-पकते दूध गाढ़ा हो जाए तो पोटली को निकालकर, छिलका उतारकर बीजों को पीसकर कर सुरक्षित रख लें।
शुक्राणुहीनता, पुरुष बांझपन ( Azoospermia ) का इलाज-
हीरक भस्म – 300 मि.ग्राम + वसन्तकुसुमाकर रस – 2-3 ग्राम + दिव्य सिद्धमकरध्वज – 2–3 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।
प्रमेह तथा शुक्रमेह, धातु गिरना  और सफेद पानी का इलाज-
सर्वकल्प क्वाथ – 100 ग्राम+ वृक्कदोषहर क्वाथ – 200 ग्राम , दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5-7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं।
गिलोयघन वटी – 60 ग्राम 2-2 गोली उपरोक्त क्वाथ से सेवन करें।
आंवला चूर्ण – 100 ग्राम +वंगभस्म – 5 ग्राम +प्रवाल पंचामृत – 5 ग्राम +हजरुल यहूद भस्म – 5 ग्राम + गिलोय सत् – 20 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 1-1 चम्मच प्रात:, नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।
गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम , चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम, शिलाजीत रसायन वटी – 60 ग्राम 1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद जल से सेवन करें।
अन्य व्याधिष्य थैलेसीमिया (Thalessemia) का इलाज-
सर्वकल्प क्वाथ – 300 ग्राम 1 चम्मच औषध को 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं। कुमारकल्याण रस – 1-2 ग्राम+ प्रवाल पिष्टी – 5 ग्राम +कहरवा पिष्टी – 5 ग्राम + मुक्ता पिष्टी – 5 ग्राम +गिलोयसत् – 10 ग्राम + प्रवालपंचामृत – 5 ग्राम सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।
कैशोर गुग्गुल – 40 ग्राम + आरोग्यवर्धिनी वटी – 20 ग्राम 1–1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें। धृतकुमारी स्वरस – 10 मिली + गिलोय स्वरस – 10 मिली इसमें (उपरोक्त दोनों स्वरसों में) गेंहूँ के ज्वारे का रस मिलाकर प्रात: एवं सायं खाली पेट सेवन करें।
Disclaimer – यह जानकारी केवल आपके ज्ञान वर्धन और जागरूकता के लिए है | इसे बताने का औचित्य सिर्फ आपको इस बारे में जागरूक बनाना है | बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए | Never Take Medicines without Consulting the Doctor.
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