खाज, खुजली एक संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो जाता है। यदि परिवार में किसी एक सदस्य को यह रोग हो जाए तो परिवार के सभी लोगों को प्रभावित करता है। यह तीव्र क्षोभक रोग है।खुजली से पीड़ित व्यक्ति के साथ हाथ मिलाने तथा रोगी के बिस्तर पर बैठ जाने से स्वस्थ्य व्यक्ति को यह रोग हो जाता है। खुजली एक सारकोप्टिस स्केबीयाई नामक जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है जिसे ह्यूमन इच माईट के नाम से भी जाना जाता है। खुजली दो प्रकार की होती है-

(a) सुखी खुजली और

(b) गीली खुजली

खाज-खुजली के लक्षण 

सुखी खुजली से स्राव नहीं आता है। त्वचा खुश्क रहती है। इस प्रकार की खुजली में फुंसियाँ हो भी सकती है और नहीं भी। ये फुंसियाँ नहीं पकती है। खुजली तीव्र होती है। खुजला-खुजलाकर रोगी बेहाल हो जाता है।  रात को रोगी सो नहीं सकता है। यह अधिकतर गुप्तांगों, मलद्वार, हाथ-पाँव तथा जननेन्द्रियों पर होती है। कई बार रोगी इतनी जोर से खुजलाते हैं कि त्वचा पर रक्त के धब्बे दिखाई देते हैं। गीली खुजली में फुंसियाँ निकल आते हैं और इन फुंसियों से स्राव निकलता है। इसे पकनी खुजली भी कहा जाता है। इन्हीं फुंसियों से निकलने वाले स्राव बहकर आसपास की जगह को प्रभावित करता है।

 रोगग्रस्त त्वचा की सूक्ष्मदर्शी यंत्र द्वारा जाँच करने पर जीवाणुओं द्वारा निर्मित श्वेत-श्याम सुरंगें दिखाई देती है। लगातार खुजलाते रहने से नाखूनों की माध्यम से इन सुरंगें तथा फुन्सियों में अन्य प्रकार के संक्रमण भी हो सकते हैं जिसके कारण त्वचा पर शोथ तथा फुंसियाँ हो जाती हैं। खुजली बढ़ने पर त्वचा पर उभरे छोटे छोटे दाने लाल होने लगते हैं और उन पर पपड़ियां जम जाती हैं। उन पपड़ियों में तीव्र खाज होती है और खुजलाने पर घाव हो जाते हैं। इस रोग के जीवाणु का जैसे ही लार्वा पैदा होता है, खुजली प्रारंभ हो जाती है। तीन से पाँच सप्ताह में ये पूर्ण विकसित होते हैं।
 जो लोग पहले भी इस रोग से ग्रस्त हो चुके हैं उन लोगों में संक्रमण के एक से चार दिन में ही लक्षण दिखाई देने लगते हैं पर जिन्हें पहले कभी भी खाज खुजली की समस्या नहीं हुई है तो ऐसी स्थिति में दो से पाँच सप्ताह के बाद ही इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

खाज-खुजली के कारण 

 सारकोप्टिस स्केबीयाई नामक जीवाणु को खाज-खुजली का प्रमुख कारक माना जाता है। यह जीवाणु पशुओं की चर्म में पाई जाती है। पशुओं में पाए जाने वाले ये जीवाणु जब मनुष्य की पर आक्रमण करते हैं तब उनके लक्षण पशुओं में होने वाले लक्षण जैसे नहीं होते हैं। गंदी तथा बदबूदार चर्म में ये जीवाणु बहुत जल्द आक्रमण करते हैं।
 जो लोग गंदी वस्त्र पहनते हैं, अस्वस्थ्यकर परिवेश में रहते हैं, कई दिनों तक नहाते नहीं है अथवा गंदे पानी से नहाते हैं वैसे लोगों के शरीर में इस रोग के जीवाणु अति सहजता से पनपते हैं और खाज-खुजली होने लगता है। इसके अलावा शरीर में होने वाले अन्य विकारों की वजह जैसे मधुमेह, खान-पान की एलर्जी, यकृत एवं वृक्कों की गड़बड़ी, रक्तदोष आदि के कारण भी खाज-खुजली होती है। पीलिया रोग, हॉजकिन्स रोग, औषधियों की साइड इफेक्ट, थाइरोइड ग्रंथि के रोग, ल्यूकेमिया, लिम्फेडेनोमा, रासायनिक पदार्थों से उत्पन्न क्षोभ आदि के कारण से भी यह रोग हो जाता है। स्कूलों एवं अस्पतालों से भी यह रोग एक से दूसरे को हो सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग बहुत जल्द इस रोग के चपेट में आ जाते हैं।
 स्त्रियों में प्रदर रोग, गुप्तांगों को साफ न करना, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, जुएं, उत्तेजक पदार्थों का अत्यधिक मात्रा में सेवन, सूत्र कृमि आदि के कारण यह रोग होता है। इसके अतिरिक्त रोगग्रस्त व्यक्ति के संपर्क में आने तथा रोगी व्यक्ति के कपड़े पहनने, एक साथ सोने तथा असुरक्षित यौन संबंधों के कारण भी खाज-खुजली का रोग एक से दूसरे व्यक्ति को प्रभावित करता है।

खाज-खुजली के घरेलू उपाय, इलाज -

खाज-खुजली साध्य रोग है। इस रोग की चिकित्सा के लिए सर्वप्रथम रोगी व्यक्ति के व्यवहार किए हुए कपड़ों को गर्म पानी में उबालकर साफ करें। रोगी की कमरे का सर-सफाई करें। बिस्तर के कपड़े बदलें और निम्न लिखित घरेलू उपाय अपनाएँ।
  1. त्रिफला तथा नीम की पत्तियों का काढ़ा पानी में मिलाकर रोज स्नान करें। त्रिफला चूर्ण का सेवन भी करें।
  2. स्नान करने के बाद भीमसेनी कपूर, नारियल का तेल और ताजा हल्दी मिलाकर शरीर में लेपन करें।
  3. सुबह खाली पेट चार-पाँच नीम के पत्ते चबाकर खाएं।
  4. तुलसी तथा नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करें।
  5. नीम के ताजे पत्ते पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करें।
  6. पीपल की छाल को देसी घी में मिलाकर लगाने से भी खाज-खुजली जल्द ठीक हो जाता है।
  7. तुलसी और माजूफल के पत्ते पीसकर लगाएँ।
  8. अनंतमूल के टुकड़े पीसकर छान करके पियें।
  9. एलोवेरा का जेल लगाएँ और इसका जूस भी बनाकर पियें।
  10. तेज खुजली होने पर अजवाइन को बारीकी से पीसकर पेस्ट तैयार करके खुजली वाले स्थान पर रुई की सहायता से दिन में चार बार लगाएँ।
  11. लहसुन की पेस्ट बनाकर लेपन करें।
  12. खाज-खुजली में सुबह-शाम शहद लगाने से भी जल्द लाभ होता है।
 खाज-खुजली में अफीम, अचार, खट्टी चीजें, अधिक मसालेदार भोजन, मांस, मछली, अंडे, बैंगन आदि को परहेज करें। स्नान करते समय कास्टिक सोडायुक्त साबुन का प्रयोग न करें। जिस चीज तथा खाद्य पदार्थों से रोगी को एलर्जी हो उन सभी चीजों से बचें। साफ-सुथरे एवं ढीले वस्त्र परिधान करें।

नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |

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