नींद संबंधी एक विकार है। इसका अर्थ निद्रानाश होना अथवा स्वाभाविक नींद न आना होता है। नींद की अवधि निश्चित नहीं होती है। किसी को छह-सात घंटे की नींद पर्याप्त होती है और किसी को नहीं। वृद्धावस्था में नींद कम होती है पर आज की भागदौड़ भरी दुनिया में करोड़ों लोग इस रोग से ग्रसित हैं। अधिकांश मामलों में अनिद्रा मानसिक तनाव की वजह से होती है।


 लक्षणों के आधार पर अनिद्रा को दो भागों में बांटा गया है जो निम्न प्रकार के हैं-
(a) अल्पकालिक अनिद्रा (Acute Insomnia)- अल्पकालिक अनिद्रा कुछ दिनों से लेकर कई सप्ताह तक रहता है

(b) दीर्घकालिक अनिद्रा (Chronic Insomnia)- दीर्घकालिक अनिद्रा अथवा क्रोनिक इनसोम्निया कुछ  सप्ताह से लेकर कई सालों तक रहता है जो हमारे शरीर के लिए घातक साबित हो सकता है।


अनिद्रा के लक्षण 

अनिद्रा मानव शरीर में तनाव, भ्रम एवं थकान पैदा करती है। अनिद्राग्रस्त रोगी का मन और शरीर दोनों थके हुए होते हैं। रात को बार बार जगता है। हल्की आहट से ही नींद खुल जाती है। कुछ रोगी प्रकाश में सो नहीं पाते और कुछ रोगी को अंधेरे में नींद आती नहीं है। आंखों में सूजन, रोजाना अधूरी नींद,आंखों के नीचे काले धब्बे, वजन का बढ़ना, बालों का झड़ना आदि लक्षण अनिद्रा के रोगियों में पाया जाता है।
अनिद्रा में रोगी का शरीर और मस्तिष्क की कार्यशक्ति ह्रास होने लगता है। रोगी की स्मृति, मेधाशक्ति, एकाग्रता आदि क्रमसः ह्रास होने लगता है। भूख नहीं लगती है। रोगी बेचैन हो जाता है। धीरे धीरे रोगी चिड़चिड़ा और क्रोधी स्वभाव का हो जाता है।

अनिद्रा के कारण 

अनिद्रा कोई मामूली रोग नहीं है। यह मानसिक रूप से रोगी को झकझोर कर देता है। अनिद्रा के कई कारण हो सकते हैं। मुख्य कारणों के अंतर्गत मानसिक तनाव, बेचैनी, भय, हर्ष, घबराहट, गम, जोश, उमंग, उत्साह, कब्ज, पाचन क्रिया के विकार, अत्यधिक भोजन, कार्य में होनेवाले बदलाव, मोबाइल, टी.भी, देर रात तक जगने की आदत, अधिक उपवास, दिन के समय सोने की आदत, अत्यधिक शारिरिक तथा मानसिक परिश्रम, कैफीन एवं मदिरा का अधिक सेवन, दवाओं के दुष्प्रभाव, सभी प्रकार की चिंताएं आदि है।

अनिद्रा कोई मामूली रोग नहीं है। यह मानसिक रूप से रोगी को झकझोर कर देता है। अनिद्रा के कई कारण हो सकते हैं। मुख्य कारणों के अंतर्गत मानसिक तनाव, बेचैनी, भय, हर्ष, घबराहट, गम, जोश, उमंग, उत्साह, कब्ज, पाचन क्रिया के विकार, अत्यधिक भोजन, कार्य में होनेवाले बदलाव, मोबाइल, टी.भी, देर रात तक जगने की आदत, अधिक उपवास, दिन के समय सोने की आदत, अत्यधिक शारिरिक तथा मानसिक परिश्रम, कैफीन एवं मदिरा का अधिक सेवन, दवाओं के दुष्प्रभाव, सभी प्रकार की चिंताएं आदि है।

इन कारणों के अतिरिक्त कई तरह की जानलेवा बीमारी के कारण भी लोग अनिद्रा रोग से ग्रसित होते हैं। पाचन तंत्र के विकार, अस्थमा, शारिरिक पीड़ा, हृदय के रोग, बहुमूत्र, मस्तिष्क में रक्त की अधिकता, अल्जाइमर रोग, अति सक्रिय थाइरोइड, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, किडनी के रोग, खाँसी, पार्किंसॉंस रोग, कृमि रोग, दिल की कमजोरी, यकृतविकार, टाइफाइड, क्षय रोग, आवेश, मानसिक भ्रम, शोथ ज्वर, उच्च रक्तचाप आदि रोगों के कारण भी अनिद्रा रोग होता है।
 हममें से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो रात में बिस्तर पर लेटकर अपनी अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में सोचा करते हैं, तरह-तरह की कल्पनाओं में डूबते हैं जिसकी वजह से हमारी नींद बाधित होती है और  हमारी यही आदत आगे चलकर अनिद्रा रोग का कारण बनती है।

अनिद्रा के घरेलू उपाय 

  1. खसखस 150gm, कद्दू के बीज 100gm, बादाम 100gm, सूखे खजूर 150gm इन सभी चीजों को मिलाकर अच्छी तरह पीसें और इस चूर्ण को रोज रात सोने से पहले गर्म दूध के साथ एक चम्मच लें।
  2. केले की चाय बनाकर रात को सोने से पहले सेवन करें। इसे तैयार करने के लिए एक पके हुए केले को लेकर अच्छी तरह से धो लें और इसका अगला तथा पिछला हिस्सा काटकर अलग करें। अब बचे हुए भाग को चार टुकड़े करके चार कप पानी में पाँच से सात मिनट तक धीमी आंच पर उबालें। सात मिनट उबलने के बाद इसमें आधा चम्मच दालचीनी मिलाकर तीन मिनट तक और उबालें। अब इसे उतारकर ढकें और हल्का गर्म रहते ही पिएं। यह अनिद्रा के लिए अचूक उपाय है। याद रखें कि केले की चाय बनाने के लिए केले को छिलके के साथ उबालें।
  3. पके हुए केले में जीरे का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से भी नींद आती है।
  4. रात को लौकी का रस लें अथवा लौकी का सब्जी खाएँ।
  5. सोने से पहले दूध में शहद मिलाकर पीने से अच्छी और गहरी नींद आती है।
  6. पुनर्नवा की जड़ को कूटकर काढ़ा बनाकर सोने से पहले सेवन करें।
  7. रात को स्नान करने से अच्छी नींद आती है। पर यह हर मौसम में मुमकिन नहीं होता। इसलिए आप गर्म स्नान कर सकते हैं। स्नान करने के बाद तिल के तेल से शरीर की मालिश करें। 
  8. सेव का सिरका खाएँ। इसमें पाई जानेवाली ट्रीप्टोफेन नामक रसायन हमारी मस्तिष्क को शांत कर हमें अच्छी नींद दे सकता है।
  9. विटामिन बी, मैग्नेशियम, जिंक, पोटासियम युक्त पौष्टिक आहार खाएँ।
  10. सौंफ को पानी में उबालकर सुबह-शाम पियें।
  11. सोने से पहले चुटकीभर जायफल एक कप दूध में मिलाकर रोज पीने से अनिद्रा रोग पूरी तरह से ठीक हो सकती है।
  12. ब्राह्मी और अश्वगंधा को पानी में उबालकर पीने से भी यह रोग ठीक हो जाता है।
  13. सोने से पहले सरसों की तेल से पैर की तलवों को मालिश करें।
  14. अल्पकालिक अनिद्रा में केशर के कुछ रेसे दूध के साथ लें।

     निष्कर्ष (Conclusion)

अनिद्रा के मूल कारणों को दूर करने से ही रोगी को स्वाभाविक नींद आने लगती है। अनिद्रा के रोगी बिभिन्न उलझनों से ग्रस्त होता है। अतः इन उलझनों से छुटकारा पाते ही उसकी अवस्था सामान्य हो जाती है। अनिद्रा से ग्रसित रोगी को सदा प्रसन्न रहने की कोशिश करनी चाहिए। शारिरिक परिश्रम, व्यायाम तथा नित्य योग करें। रोज शीतल जल से स्नान करें। खट्टे-मीठे, तेज मिर्च मसालेदार भोजन, बासी खाना, मादक पदार्थ, फास्ट फूड, जंक फूड आदि खाद्य पदार्थों को परहेज करें। प्रातः काल कुछ समय टहलें। गंदी विचारों को त्याग दें। चाय-कॉफी तथा उत्तेजक पेय पदार्थों का सेवन न करें।

नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |

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