कील-मुंहासे प्रत्येक किशोर या किशोरी को अनिवार्य रूप से होते ही हैं, ऐसा नहीं है। जिनको होते हैं, वे मानसिक रूप से दुःखी-पीड़ित होते हैं और समझ नहीं पाते कि ये कील-मुंहासे क्यों निकल रहे हैं और इनको कैसे ठीक किया जा सकता है। 

कारण : तेज मसालेदार, तले हुए, उष्ण प्रकृति वाले पदार्थों का अधिक सेवन करने, रात को देर तक जागने, सुबह देर तक सोए रहने, देर से शौच व स्नान करने, शाम को शौच न जाने, निरंतर कब्ज बनी रहने, कामुक विचार करने, ईर्षा व क्रोध करने, स्वभाव में गर्मी व चिड़चिड़ापन रखने आदि कारणों से शरीर में ऊष्णता बढ़ती है और तैलीय वसा के स्राव में रुकावट पैदा होती है, जिससे कील-मुंहासे निकलने लगते हैं।


सावधानी हलका, सुपाच्य और सादा आहार पथ्य है, अधिक शाक-सब्जी का सेवन करना, अधिक पानी पीना, शीतल व तरावट वाले पदार्थों का सेवन करना पथ्य है। तेज मिर्च-मसालेदार, तले हुए, मांसाहारी पदार्थों तथा मादक द्रव्यों का सेवन करना अपथ्य है। 

आप निम्न औषधियां नियमित रूप से तीन माह तक लीजिये-
1. गंधक रसायन १०० मिग्रा.+रस माणिक्य १०० मिग्रा.+ गिलोय सत्व २०० मिग्राइन्हें घोंट कर एक कर लें तथा दिन में तीन बार खदिरारिष्ट + महामंजिष्ठादि काढ़े के दो चम्मच के साथ सेवन करें।
2. त्रिफला चूर्ण दो चम्मच दिन में दो बार गुनगुने जल के साथ सेवन करें।
3. यदि चाहें तो सोमराजी तेल रात में सोते समय हलके हाथ से प्रभावित अंग पर लगा लिया करें।

4.गाय के ताजे दूध में एक चम्मच चिरौंजी पीसकर इसका लेप चेहरे पर लगाकर मसलें। सूख जाने पर पानी से धो डालें।
5.सोहागा 3 ग्राम, चमेली का शुद्ध तेल 1 चम्मच। दोनों को मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर लगाकर मसलें। सुबह बेसन को पानी से गीला कर गाढ़ा-गाढ़ा चेहरे पर लगाकर मसलें और पानी से चेहरा धो डालें।

नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |

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