कामिनी विद्रावण रस जैसा की नाम से ही प्रतीत हो जाता है की कामवासना के शौकीन पुरुषों स्त्रियों की पसंदीदा आयुर्वेद औषधि | किन्तु जिन पुरुषो में शुक्राणुओं की कमी और कमजोर शुक्राणुओं की उपस्तिथि के कारण वो सम्भोग का आनंद नही ले पाते है, और ना ही अपने जीवनसाथी को आनंदित कर पाते है | साथ ही शीघ्रपतन की समस्या के चलते वो अपने जीवनसाथी को भी वैवाहिक जीवन का सम्पूर्ण सुख नही दे पाते है और ऐसे में वो अपने आपमें शर्मिंदगी महसूस करते है ऐसे लोगो के लिए कामिनी विद्रावण रस शीघ्रपतन में रामबाण औषधि का काम करता है |

घटक द्रव्य-
आकारकरभं शुण्ठी लवंगं कुंकुंमं कणाम | जातिफल जातिकोषम चंदनं कार्षिकं पृथक् ||
हिंगुलं गंधकं शाणम फणीफेनं पलोंन्मितं | गुन्जात्र्यमिताम कुर्यात सम्मर्ध वटिकाम भिषक || (भैषज्य रत्नावली )
अकरकरा, सोंठ, लोंग, केशर, पिप्पली, जायफल, जावित्री, सफेद चन्दन, शुद्ध हिंगुल, शुद्ध गंधक, शुद्ध अफीम

कामिनी विद्रावण रस बनाने की विधि-
सबसे पहले अकरकरा, सोंठ, लोंग, केशर, पिप्पली, जायफल, जावित्री, सफेद चन्दन,आदि सभी को लेकर चूर्ण बना ले | शुद्ध की हुई गंधक और हिंगुल को लेकर शुद्ध की हुई अफीम के साथ अच्छे से घोंट्ले | इन तीनो द्रव्यों को तब तक घोंटे तब तक की इनका रंग कज्जली के जैसा ना दिखने लगे | कज्जली के समान दिखने पर सभी चूर्णों के मिश्रण को इनमे मिला ले |उपरोक्त मिलाये हुए सभी मिश्रण में पान के रस के साथ मर्दन करके 125-125 मिग्रा की गोलिया बनाले | इन गोलियों को केवल कांच की बोतल में ही रखना है |

कामिनी विद्रावण रस के फायदे -
पयसा परीपितोय्म शुक्रस्तस्भकरो रस: | विद्रावण: कामिनीनाम वशीकरण एवं च ||

अर्थात कामिनी विद्रावण रस की 1-2 गोलिया दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की स्तम्भन शक्ति बढती है | इसका सेवन करने वाला पुरुष सम्भोग की इच्छा रखने वाली स्त्री को खुश करके अपने वश में कर लेता है |वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन, शुक्राणुओं की कमी, तंत्रिका तन्त्र की कमजोरी, धातु दौर्बल्यता, पुरुष एनर्जी बढ़ाने में लाभदायक, स्त्रियों की सम्भोग शुन्यता में लाभकारी परिणाम |

कामिनी विद्रावण रस के नुकसान-
वैसे सामान्यत:  कामिनी विद्रावण रस के सेवन से नुकसान नही होते है किन्तु चिकित्सक की देखरेख में सेवन करने से किसी भी प्रकार के सेवन से बचा जा सकता है | कामिनी विद्रावण रस का सेवन बिना चिकित्सक के परामर्श के नही करना चाहिए क्योकि इसमे अफीम की उपस्थिति होने से इसकी लत लगने की सम्भावना बन सकती है |

इसलिए चिकित्सक की देखरेख में व् चिकित्सक द्वारा निर्धारित की गयी मात्रा में ही सेवन करना किसी भी प्रकार के होने वाले नुकसान से बचने में सक्षम है |

विशेष :-

किसी भी आयुर्वेदिक रसोषधि के सेवन से [पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य करे |

यदि आपको हमारा यह लेख पसंद आया होतो कृपया शेयर करे और कमेन्ट के माध्यम से हमे भी अवगत करवाए |


धन्यवाद !

Phnoe No:- 8744808450



Share This

Translate

Popular Posts

Recent Post

Hello!

Chat on WhatsApp