मधुमेह (डायबिटीज) के कारण, लक्षण, निदान और घरेलु उपचार
यह जटिल रोग है आचार्य चरक एवं सुश्रुत ने लगभग 3 हजार वर्ष पूर्व इसका उल्लेख किया था आज भी आयुर्वेद विज्ञान में इस पर शोध चल रहा है ।एक बार यह रोग हो जाने पर इसे जिंदगी भर झेलना पड़ता है अगर इसके होने के प्रारम्भिक स्तर पर पता लग जाये तो कुछ रोगियों को आयुर्वेद के द्वारा पथ्य ( परहेज ) रखते हुए औषधि सेवन करवाने पर कई रोगियों को पूर्ण रूप से ठीक किया जा सकता है । इस रोग में सातों धातुएं दूषित हो जाती है । इस कारण यह रोग कठिनता से ठीक होता है एवं रोगी को उम्र भर दवा के सहारे जीना होता है  शर्करा शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। बिन उर्जा का शरीर मृत सा होता है। यही ऊर्जा प्रदान करने वाली शर्करा जब शरीर के काम न आकर बिना रासायनिक परिवर्तन के मूत्रद्वारा निकल जाती है तब हम इसे मधुमेह या Diabetes Millitus कहते हैं।रोगी को अधिक मुत्र आने लगता है, प्यास बढ़ती है, मुख सूखता है और रोगी दुर्बल हो जाता है। इसकी जो  चिकित्सा है वो सिर्फ रोकथाम तथा नियंत्रण तक ही सीमित है।

मधुमेह के प्रकार (Types of diabetes)
1. Diabetes टाइप 1 
2. Diabetes टाइप 2
3. Diabetes टाइप 3
डायबिटीज टाइप 1 अनुवांशिक होता है।
डायबिटीज टाइप 2 मोटे लोगों में अधिक पाया जाता है।
डायबिटीज टाइप 3 गर्भवती महिलाओं को होता है।

 मधुमेह के कारण -
मधुमेह का प्रमुख कारण इंसुलिन है। शरीर में पैंक्रियाज(Pancreas)की कोशिकाएं इंसुलिन को उत्पन्न करते हैं और इसी insulin की वजह से शरीर को ऊर्जा मिलती है। Insulin की कमी हो जाने से आहार का उपयोग शरीर मे नही हो पाता है जिससे शरीर में शर्करा की मात्रा अधिक होने लगती है और हमारे गुर्दें इस शर्करा रोकने में असमर्थ होते है। अतः सारी शर्करा मूत्र के साथ निकल जाती है और रोगी दुर्बल हो जाता है।
  मधुमेह धीरे धीरे से मानव शरीर को जकड़ लेता है और असहाय कर देता है। मधुमेह का वास्तविक कारण आज भी चिकित्सा विज्ञानियों को पता नहीं चल सका है। वो मानते हैं कि 50% डायबिटीज वंशानुगत होता है। वंशानुगत मधुमेह diabetes type1 के अंतर्गत आता है।
  अत्यधिक मानसिक परिश्रम तनाव, चिंता, क्रोध, यकृतदोष, मूत्ररोग, शराब, बिड़ी-सिगरेट तथा अन्य नशे की लत, शारिरिक परिश्रम न करना, अधिक पौष्टिक भोजन करना तथा संक्रामक रोगों के कारण भी यह रोग हो सकता है। इसके अलावा नींद की कमी, थाइरोइड gland की अतिक्रियता की कारण से भी diabetes हो सकता है।

मधुमेह के लक्षण (Symptoms of diabetes mellitus)-

  1. अधिक मूत्र आना, प्यास लगना, धीरे धीरे भूख की कमी, सिरदर्द, घबराहट, चक्कर आना, मुख सुखना, कब्ज आदि ही मधुमेह के प्रमुख लक्षण हैं।
  2. रोग बढ़ने के साथ साथ फोड़े फुंसियां भी निकलने लगती है और वजन घट जाता है। रोगी हल्की सी ठंड लगते ही सर्दी- जुकाम, बुखार न्यूमोनिया आदि का शिकार होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार किसी भी प्रकार के संक्रमण diabetes रोगी को जल्द ही पकड़ लेता है।
  3. कुछ लोग अचानक मोटे हो जाते हैं जो कि मधुमेह का लक्षण हो सकता है जो Diabetes type2 के अंतर्गत आता है। इसलिए तुरन्त रक्त और मूत्र की जांच करवाएं। Diabetes Mellitus में कोमा की अवस्था बहुत ही खतरनाक होती है। इसीलिए रोगी को खुद सचेत रहना चाहिए।

 मधुमेह के लिये जरूरी रक्त जाँच (Blood test for Diabetes) 
   
मधुमेह के लिए सुबह खाली पेट या फिर खाना खाने के दो घंटे बाद टेस्ट किया जाता है। खाली पेट (Normal Blood Fasting) टेस्ट करने से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा के बारे में पता चलता है। इसी टेस्ट से किसी को डायबिटीज होने या नहीं होने के बारे में जाना जाता है। खाली पेट जाँच करने पर शुगर लेवल 110 मिलीग्राम से ऊपर होने की अवस्था को मधुमेह की शुरुआत समझा जा सकता है। 
खाना खाने के बाद जो टेस्ट (Post Prandial Test) किया जाता है उसमें शुगर लेवल 110 से 140 मिलीग्राम के बीच होनी चाहिये। इन दोनों टेस्ट के अलावा HBA1C टेस्ट से पिछले तीन महीने के शुगर लेवल की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।          
  मधुमेह के घरेलू चिकित्सा (Home Remedies for diabetes mellitus)
 वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के द्वारा बहुत सारे रोगों से निजात पाया जा सकता है। हम इन्हीं चिकित्सा पद्धतियों तथा घरेलू चिकित्सा के बारे में जानेंगे-
  1. चार या पाँच आम के पत्ते को एक कप पानी मे उबालकर रातभर रहने दें और सुबह पियें। लगातार पीते रहें। हालांकि आम का फल मधुमेह में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है पर इसके पत्ते हम प्रयोग कर सकते हैं।
  2.  मेथी को हम मसाले के रूप में प्रयोग करते हैं पर इसका इस्तेमाल हम मधुमेह में कर सकते हैं। दो चम्मच मेथी को अच्छी तरह धो लें फिर एक कप पानी में डालकर रातभर रहने दें और सुबह पियें।
  3.  करेला १००ग्राम, जामुन के बीज १०० ग्राम, आंवला १०० ग्राम, मेथी १०० ग्राम और अमरूद १०० ग्राम को पीसकर सुबह शाम पानी के साथ दें। 
  4. चीनी, गुड़, मिठाई का सेवन बिल्कुल न करें।
  5. मानसिक तनाव से बचे।
  6. मीठे फल न दे।
  7. बिड़ी- सिगरेट, तम्बाकू, मदिरापान बिल्कुल करने न दें।
  8. धूप में ज्यादा घूमने न दें।
  9. कब्ज(constipation) होने न दें।
  10.  Insulin का प्रयोग सिर्फ जरूरी अवस्था में ही करें।
  11.  ठंडी पेय न दें।
  12. सिर्फ़ हल्के व्यायाम ही करें।
  13. पाचनक्रिया को ठीक रखें।
  14. मट्ठा, शहद, जौ की सत्तू दें।
  15. प्रोटीन ज्यादा लें पर कार्बोहाइड्रेट एकदम सीमित मात्रा में लें।
  16. तेल की मालिश करें।
  17. पत्तेदार सब्जियां खाएं।
  18. माँस-मछली, अण्डे, मक्खन आदि संतुलित मात्रा में लें।
  19. रोगी का वजन पर विशेष ध्यान रखें।
  20. हप्ते में एक या दो दिन उपवास रखने दें।
  21. हप्ते में दो बार कटिस्नान करने दें।
  22. अग्न्याशय के स्थान पर मिट्टी की लेप दें। 
  23. संतुलित आहार से ही मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए रोगी की खान-पान पर विशेष ध्यान दें।                                                                                                                             
 नोट – किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले | जिससे आपको हानि होने की सम्भावना नही रहेगी |
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