महासुदर्शन चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से रक्त में से विषैले पदार्थों को दूर करती है, बुखार सही करती हैं एवं पाचन तंत्र पर अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाती है । महासुदर्शन चूर्ण में एंटीमलेरियल, एंटीपायरेटिक तथा एंटीवायरल गुण मौजूद होते हैं । यह चूर्ण हमारे शरीर में बैक्टीरिया एवं वायरस के संक्रमण को दूर करता है तथा हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है । 

बुखार चाहे किसी भी कारण से हुआ हो, चाहे बुखार वात एवं पित्त के कारण पैदा हुआ हो या वात, पित्त और कफ के कारण पैदा हुआ हो दोनों ही स्थितियों में इस चूर्ण का सेवन करने से लाभ होता है । यह चूर्ण पुरुषों, स्त्रियों, गर्भवती महिलाओं, प्रसूता महिलाओं एवं बच्चों को दिया जा सकता है । यह एक सुरक्षित तथा हर्बल आयुर्वेदिक औषधि है जिसका सामान्यतः कोई दुष्प्रभाव नहीं है । 

जब रोगी की पाचन शक्ति बहुत ज्यादा कमजोर हो जाती है तो ऐसे व्यक्ति का भोजन हजम नहीं होता है तथा भोजन हजम होने के बजाय पेट में सड़ता है । जिससे भोजन से आमविश उत्पन्न होता है जिस कारण रोगी को कभी-कभी बुखार भी हो जाता है । महासुदर्शन चूर्ण का सेवन करने से आम प्रकोप नष्ट होता है तथा यह चूर्ण पेट एवं आंतों को शुद्ध करता है एवं शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालकर बुखार को दूर करता है । बुखार दो प्रकार का होता है नूतन ज्वर तथा जीर्ण ज्वर । जब बुखार 21 दिन से ज्यादा पुराना हो जाए तो उसे जीर्ण ज्वर कहा जाता है । दोनों ही स्थितियों में महासुदर्शन चूर्ण को देने से लाभ मिलता है । यदि कोई रोगी टाइफाइड ठीक होने के पश्चात अपना आहार विहार सही ना रखें तो ऐसे रोगी को बुखार दोबारा आ जाता है, जिससे रोगी और ज्यादा कमजोर हो जाता है तथा बुखार के कारण रोगी की भूख भी खत्म हो जाती है । इस स्थिति में महासुदर्शन चूर्ण को देने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है । महासुदर्शन चूर्ण का सेवन करने से पसीना खूब आता है जिस कारण यह बुखार को बहुत जल्दी उतार देता है । यह मूत्रल है अर्थात इसका सेवन करने से मूत्र बहुत ज्यादा आता है । यह चूर्ण सभी प्रकार के बुखारो, मलेरिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू, टाइफाइड, पुराना बुखार, सन्निपात ज्वर, विषम ज्वर, आम ज्वर एवं लीवर तथा स्पलीन के रोगों के कारण पैदा होने वाला ज्वर, शीत ज्वर, पाक्षिक ज्वर एवं मासिक ज्वर आदि में सफलतापूर्वक सेवन कराया जाता है । यह चूर्ण जिगर एवं तिल्ली से जुड़े हुए रोगों में भी फायदेमंद होता है । 

महासुदर्शन चूर्ण के चिकित्सकिय गुण Mahasudarshan Churna ke upyog- शीतल पाचक कृमिनाशक ज्वरनाशक एंटीबैक्टीरियल एंटीवायराल एंटीमलेरियल एंटीऑक्सीडेंट रक्तशोधक विरेचक महासुदर्शन चूर्ण के घटक द्रव्य Mahasudarshan Churna ke ghatak dravy- चिरायता सौरास्ट्री त्रिफला वच हरिद्रा त्वक दरहरिद्र पद्मका कंटकारी श्वेतचन्दना बृहती अतिविष कर्चूरा बला सुण्ठी शालपर्णी मरीचा पृश्निपर्णी पिप्पली विडंग मूर्वा टगर गुडुची चित्रक धन्वायसा देवदारु कटुका चव्य पर्पट पटोल मोथा लवंग त्रयमाणा वंशलोचन हृवेरा कमला नीम छाल अश्वगंधा पुष्कर तेजपत्र मुलेठी जटीफला स्थौणेया कुटज विदारीकन्द यवनी किरततिक्ता इंद्रायवा शिग्रु भारंगी 

महासुदर्शन चूर्ण के फायदे Mahasudarshan Churna ke fayde- यह चूर्ण मलेरिया, टाइफाइड, स्वाइन फ्लू, पुराने बुखार, आम ज्वर, विषम ज्वर एवं अन्य विभिन्न प्रकार के ज्वर उतारने में फायदेमंद होता है । यह हमारे शरीर में जीवाणुओं एवं वायरस को नष्ट करता है, क्योंकि इस चूर्ण में एंटीबैक्टीरियल तथा एंटीवायरल गुण मौजूद होते हैं । यह जिगर एवं तिल्ली के रोगों में लाभ पहुंचाता है । यह चूर्ण मूत्रल है अर्थात इसका सेवन करने से मूत्र अधिक आता है । यह चूर्ण हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है । तासीर में यह चूर्ण ठंडा है । यह पाचक एवं कृमि नाशक होता है । 

सेवन विधि एवं मात्रा Sevan vidhi evam matra- महासुदर्शन चूर्ण को 3 ग्राम से लेकर 6 ग्राम तक दिन में दो बार गर्म पानी से लेना चाहिए । इस चूर्ण को भोजन के पश्चात ही लेना चाहिए । अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते है । 

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Savdhaniya evam dushprabhaav- निर्धारित मात्रा में सेवन करने से महासुदर्शन चूर्ण का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है । इसे सभी उम्र के लोग, पुरुष, महिलाएं, बच्चे, बूढ़े, गर्भवती महिलाएं एवं प्रसूता के द्वारा लिया जा सकता है ।


मकरध्वज वटी मात्र एक आयुर्वेदिक औषधि ही नहीं है बल्कि यह एक रसायन है, जिसे हम आयुर्वेद का वरदान मान सकते हैं । मकरध्वज वटी काफी बहुमूल्य औषधि है, जिसका सेवन करने से 20 प्रकार के प्रमेह, पुरुषों के धातु संबंधी रोग जैसे वीर्य का पतलापन, पेशाब के साथ धातु का जाना, स्वपनदोष, शीघ्रपतन, नपुंसकता, स्तंभन शक्ति की कमी, कमजोरी, आंखों का अंदर धंस जाना एवं आंखों के सामने अंधेरा छाना, सिर दर्द, पेट अच्छी तरह साफ ना होना, बार-बार बातों को भूलना, स्मृति भ्रम, नसों की कमजोरी आदि में बहुत अच्छा लाभ होता है । यह औषधि केवल पुरुषों के रोगों में ही फायदा नहीं पहुंचाती बल्कि महिलाओं की प्रदर रोग में भी बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है । इन सभी रोगों के अलावा मकरध्वज वटी का सेवन करने से मूत्र मार्ग संक्रमण जैसे पेशाब का बार बार आना, पेशाब का रुक रुक कर आना, मूत्र नली में दर्द होना, सुजाक़ आदि रोगों में भी फायदा होता है । यह औषधि अत्यंत गुणकारी औषधि है जो बढ़ती हुई उम्र में रसायन की भांति सेवन की जाती है । इस औषधि का सेवन करने से रोग एवं बुढ़ापा व्यक्ति के नजदीक नहीं आता है । इस औषधि की जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है ।

मकरध्वज वटी के घटक द्रव्य- Makardhwaj Vati ke ghatak dravy -
मकरध्वज 28.25% रस सिंदूर 16.70% मल्ल सिंदूर 4.04% जायफल (Myristica Fragrans) 9.74% जावंत्री (Myristica Fragrans)10.70% लौंग (Syzgium Aromaticum) 9.74% कपूर (Dryobalanops Aromatica)9.74% सफ़ेद मिर्च (Piper Nigrum) 9.74% अभ्रक भस्म 0.15% लोह भस्म 0.24% शुद्ध कुचला (stychnos Nuk vomica)0.24% चित्रकमूल (Plumbago Zeylanica)0.48% Excipients Q.S.
मकरध्वज वटी के चिकित्सकीय उपयोग - Makardhwaj Vati ke upyog मकरध्वज वटी का सेवन करने से निम्न समस्याओं में लाभ मिलता है । पुरुषों के धातु संबंधी रोग मूत्रमार्ग का संक्रमण महिलाओं का प्रदर रोग कामेच्छा में कमी शारीरिक दुर्बलता नींद ना आना पाचन तंत्र की गड़बड़ी मकरध्वज वटी के फायदे Makardhwaj Vati ke fayde स्वपनदो में लाभकारी मकरध्वज वटी night fall me labhkari makardhwaj vati अधिकांश नवयुवक युवावस्था में हस्तमैथुन एवं अप्राकृतिक मैथुन के द्वारा अपना सत्यानाश कर लेते हैं, जिससे उनका वीर्य पतला हो जाता है एवं उन्हें बहुत ज्यादा स्वपनदोष (night fall) होने लगता है । ऐसे युवक दिन प्रतिदिन कमजोर होते चले जाते हैं, उनके मन में मायूसी छाई रहती है, आत्महत्या करने के विचार मन में आते हैं, शादी करने से डर लगता है इत्यादि । ऐसे नवयुवकों को यदि मकरध्वज वटी को चंद्रप्रभा वटी के साथ सेवन कराया जाए तो बहुत अच्छा लाभ मिलता है । शीघ्रपतन में लाभकारी मकरध्वज वटी shighrapatan me labhkari makardhwaj vati यदि हस्तमैथुन, अप्राकृतिक मैथुन या बहुत ज्यादा स्त्री सहवास करने से शीघ्रपतन (premature ejaculation) की समस्या हो गई हो तथा वीर्य बहुत जल्दी डिस्चार्ज हो जाता हो, तो ऐसी स्थिति में मकरध्वज वटी को हिमालय कॉन्फीडो एवं न्यू टेंटेक्स फोर्ट के साथ सेवन करने से कमाल का फायदा होता है । यह जरूरी नहीं है किस शीघ्रपतन केवल अत्यधिक मैथुन से ही हो, कई बार इसका कारण मानसिक थकान, चिंता एवं खानपान की गड़बड़ी भी होती है । इसलिए शीघ्रपतन का उपचार करते समय अन्य बातों का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है । वीर्य दोष में लाभकारी मकरध्वज वटी Veerya dosh me labhkari makardhwaj vati यदि वीर्य बहुत ज्यादा पतला हो गया हो एवं वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बहुत ज्यादा कम हो गई हो तो मकरध्वज वटी का सेवन कराने से लाभ मिलता है । वीर्य विकारों में मकरध्वज वटी को चंद्रप्रभा वटी एवं पुष्पधन्वा रस के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है । नपुंसकता में लाभकारी मकरध्वज वटी napunsakta me labhkari makardhwaj vati जिन पुरुषों के लिंग में बिल्कुल भी तनाव ना आता हो तथा जो स्त्री संभोग करने के लायक ना हो, उन्हें मकरध्वज वटी को वसंत कुसुमाकर रस एवं शिलाजीत वटी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है । नपुंसकता की स्थिति में लिंग की एक्सरसाइज करने का पंप का भी प्रयोग करना चाहिए, साथ ही हमदर्द का तिला डायनामोल का प्रयोग करने से भी कमाल का फायदा मिलता है । कामोत्तेजना बढ़ाने में लाभकारी मकरध्वज वटी Kamotejna me labhkari makardhwaj vati जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है वैसे वैसे व्यक्ति की कामोत्तेजना घटती जाती है । 40 साल की उम्र के बाद व्यक्ति की कामोत्तेजना बहुत ज्यादा कम हो जाती है । इसका कारण टेस्टोस्टरॉन के स्तर का कम होना होता है । ऐसी स्थिति में मकरध्वज वटी पुष्पधन्वा रस एवं कोच पाक के साथ सेवन करने से कामोत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है एवं व्यक्ति में 16 साल के लड़के जितना जोश आ जाता है । महिलाओं के प्रदर रोग में लाभकारी मकरध्वज वटी Pradar rog me labhkari makardhwaj vati मकरध्वज वटी महिलाओं के प्रदर रोगों में बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है । इस औषधि का सेवन करने से महिलाओं का प्रदर रोग (लुकोरिया) में लाभ मिलता है । मधुमेह (डायबिटीज) एवं उच्च रक्तचाप में लाभकारी मकरध्वज वटी Sugar me labhkari makardhwaj vati यह औषधि केवल धातु संबंधी विकार ही ठीक नहीं करती है बल्कि इसका सेवन करने से उच्च रक्तचाप एवं डायबिटीज जैसी बीमारी में भी बहुत अच्छा फायदा मिलता है ।
सेवन विधि एवं मात्रा - मकरध्वज वटी की एक से दो गोली दिन में दो बार सुबह एवं शाम भोजन के पश्चात ले । इसे दूध के साथ लेना चाहिए । दूध के अलावा इस औषधि को शहद, मक्खन या मलाई के साथ भी लिया जा सकता है । सावधानियां एवं दुष्प्रभाव सामान्यतः इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं है । इस औषधि को गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को नहीं देना चाहिए ।

एक्यूपंक्चर को विशिष्ट स्थानों पर त्वचा में सूखी सुइयों के सम्मिलन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसे एक्यूपंक्चर बिंदु कहा जाता है। प्रमाणित चिकित्सकों और चिकित्सकों द्वारा कुछ चिकित्सा विकारों के इलाज के लिए एक्यूपंक्चर किया जाता है। व्यवसायी के प्रशिक्षण और अनुभव और इलाज की जा रही समस्या के आधार पर, एक्यूपंक्चर तकनीकों में सुइयों (इलेक्ट्रो एक्यूपंक्चर) या हीट (मोक्सीबस्टन) और दबाव (एक्यूप्रेशर) के माध्यम से विद्युत प्रवाह शामिल हो सकते हैं।

चीन में एक्यूपंक्चर की शुरुआत 2000 से भी ज्यादा साल पहले हुई थी। यह अब दुनिया भर में प्रचलित है, खासकर चीन, कोरिया और जापान में। संयुक्त राज्य अमेरिका में, एक्यूपंक्चर ने 1970 के दशक की शुरुआत में लोकप्रियता हासिल करना शुरू कर दिया।

एक्यूपंक्चर कैसे काम करता है?

प्राचीन सिद्धांत के अनुसार, एक्यूपंक्चर के पीछे मूल विचार यह है कि ऊर्जा मानव शरीर के भीतर बहती है और संतुलन और स्वास्थ्य बनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। ऊर्जा प्रवाह (या महत्वपूर्ण बल) -कई क्यूई और उच्चारण "ची" - पूरे शरीर में 12 मुख्य चैनलों के साथ-साथ मेरिडियन के रूप में जाना जाता है। ये मेरिडियन शरीर के प्रमुख अंगों और कार्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, हालांकि वे नसों या रक्त प्रवाह के सटीक मार्गों का पालन नहीं करते हैं।

एक्यूपंक्चर का लक्ष्य प्रवाह के असंतुलन को ठीक करना और उत्तेजना के माध्यम से स्वास्थ्य को बहाल करना है, आमतौर पर शरीर के मेरिडियन के साथ बिंदुओं पर त्वचा के माध्यम से सुइयों को सम्मिलित करना। वर्तमान एक्यूपंक्चर जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए 400 विभिन्न एक्यूपंक्चर बिंदुओं को सूचीबद्ध करती है। वैज्ञानिकों ने मानव शरीर पर एक्यूपंक्चर के वास्तविक भौतिक प्रभावों को समझाने का प्रयास किया है। कुछ शोधकर्ताओं का सुझाव है कि जब एक्यूपंक्चर सुई नसों को उत्तेजित करती है तो दर्द से राहत मिलती है। एक और अच्छी तरह से स्वीकृत सिद्धांत है कि एक्यूपंक्चर दर्द निवारक रसायन, जैसे एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जारी करता है।

एक्यूपंक्चर भी प्रभावी हो सकता है क्योंकि यह दर्दनाक निविदा बिंदुओं को लक्षित करता है, जिसे कभी-कभी ट्रिगर अंक भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, एक्यूपंक्चर कोर्टिसोल जारी करने के लिए शरीर की पिट्यूटरी ग्रंथि को उत्तेजित करके दर्द पैदा करने वाली सूजन को कम कर सकता है, एक हार्मोन जो सूजन को कम करने के लिए जाना जाता है। यद्यपि एक्यूपंक्चर काम करने का सटीक तरीका अज्ञात है, लेकिन उपचार निश्चित समय में कुछ लोगों में कुछ चिकित्सा बीमारियों के लिए सहायक प्रतीत होता है।

शर्तेँ

एक्यूपंक्चर अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने और रोगियों की स्वास्थ्य समस्याओं की एक विस्तृत श्रृंखला के उपचार में सहायक हो सकता है। एक्यूपंक्चर अकेले या अन्य पूरक या पारंपरिक चिकित्सा उपचार के साथ संयोजन में इस्तेमाल किया जा सकता है।

एक्यूपंक्चर का उपयोग कई स्थितियों और स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए किया जा सकता है, जिसमें शामिल हैं:

कैंसर उपचार के साइड इफेक्ट्स - एक्यूपंक्चर कीमोथेरेपी से जुड़े मतली को कम करने, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाने, दर्द को दूर करने और ऊर्जा के स्तर में सुधार करने में मदद कर सकता है।

सिरदर्द - एक्यूपंक्चर पुरानी सिरदर्द की गंभीरता और आवृत्ति को कम करने में मदद कर सकता है, जिसमें तनाव सिरदर्द और माइग्रेन शामिल हैं।

क्रोनिक नेक एंड बैक पेन - एक्यूपंक्चर स्पाइनल स्टेनोसिस, डिस्क हनीसिस आदि के कारण होने वाले पुराने दर्द से राहत दिलाने में मददगार हो सकता है।

महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के मुद्दे - एक्यूपंक्चर का उपयोग प्रजनन क्षमता बढ़ाने, प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) के लक्षणों से राहत देने और रजोनिवृत्ति के कष्टप्रद लक्षणों को कम करने के लिए किया जा सकता है, जिसमें मूड में बदलाव, गर्म चमक और अनिद्रा भी शामिल हैं।

क्रोनिक थकान सिंड्रोम - क्रोनिक थकान सिंड्रोम (सीएफएस) एक विकार है जो थकावट और कम सहनशक्ति, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और फ्लू जैसे लक्षणों की एक किस्म सहित दुर्बल थकान का कारण बनता है।

चीनी दवा थकान और थकावट के लक्षणों को कमजोर अंगों से उत्पन्न मानती है। एक्यूपंक्चर प्रभावित अंगों को उनके नष्ट होने से पुनर्जीवित और उत्तेजित करने में मदद कर सकता है।

फाइब्रोमायल्गिया - फाइब्रोमायल्जिया एक पुरानी दर्द विकार है जो मांसपेशियों, स्नायुबंधन और टेंडन के रेशेदार ऊतकों में थकान और व्यापक दर्द की विशेषता है। एक्यूपंक्चर इस स्थिति से जुड़े दर्द को दूर करने में मदद कर सकता है।

अस्थमा - पिछले एक दशक में हुए शोधों से पता चला है कि एक्यूपंक्चर अस्थमा सहित श्वसन संबंधी बीमारियों के लक्षणों को कम करने में बहुत प्रभावी हो सकता है। यह अस्थमा के हमलों की आवृत्ति और तीव्रता को भी कम कर सकता है।

खेल की चोटें - एक्यूपंक्चर का उपयोग विभिन्न खेलों और दोहराए जाने वाले तनाव की चोटों के इलाज के लिए किया जा सकता है।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर - एक्यूपंक्चर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों के कारण होने वाली कुछ तकलीफों को दूर करने में मददगार हो सकता है, जिसमें क्रोनिक लीवर डिजीज, इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम और इंफ्लेमेटरी बोवेल मूवमेंट शामिल हैं।


 1. पानी में अदरक, काली मिर्च, काला नामक, तुलसी के पत्ते डालकर अच्छे से उबाल लीजिये और इस पानी को थोड़ा ठंडा करके गरारे कीजिये इससे आवाज़ सुरीली होती है

2. अदरक को नमक और निम्बू के पानी में डालकर सुखा लीजिये और दिन में दो से तीन बार खाइए इससे आपकी आवाज़ पर अच्छा असर होता है.

3. दूध में मिश्री और सौंफ डालकर पीने से गले को आराम मिलता है.

4. आवाज़ सुरीली करने के लिए दूध में आधा चम्मच शहद डालकर रोजाना पीजिये इससे आवाज़ सुरीली होती है.

5. आप जामुन की गुठलियों में थोड़ी काली मिर्च डालकर उसमे शहद मिलाएं और इसका सेवन करें. इससे जल्द ही आपकी आवाज़ सुरीली हो जाती है.

6. सोने से पहले गर्म पानी के गरारे कीजिये.

7. 2-2 ग्राम मुलहठी, आँवले और मिश्री का 20 से 50 मिलिलीटर काढ़ा देने से या भोजन के पश्चात् 1 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण में घी डालकर चटाने से लाभ होता है।

8. आवाज सुरीली बनाने के लिए 10 ग्राम बहेड़ा की छाल को गोमूत्र में भावित कर चूसने से आवाज एकदम सुरीली होती है।

9. आवाज सुरीली करने के लिए घोड़ावज का आधा या 1 ग्राम चूर्ण 2 से 5 ग्राम शहद के साथ लेने से लाभ होता है।

10. कच्चा सुहागा आधा ग्राम मुंह में रखें और उसका रस चुसते रहें। दो तीन घण्टों मे ही गला बिलकुल साफ हो जाएगा।

11. जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या जुकाम में एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, वह सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का के दानों को खूब चबाकर खा लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक लगातार ऐसा करने से लाभ होगा।

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आजकल के भागदौड़ एवं तनाव भरी जीवन शैली के कारण असमय बाल सफेद हो जाते हैं। बाल डाई करना इस समस्या का एकमात्र विकल्प नहीं। कुछ घरेलू नुस्खे आजमा कर भी सफेद बालों को काला किया जा सकता है। जोकि सर्वथा हानिरहित एवं निरापद हैं।

इन उपायों से काला करें बाल :

  • 2 चम्मच मेंहदी पाउडर, 1 चम्मच दही, 1 चम्मच मेथी, 3 चम्मच कॉफी, 2 चम्मच तुलसी पाउडर, 3 चम्मच पुदीना पेस्ट मिलाकर बालों में लगाएं। तीन घंटे बाद शैम्पू करें। कम उम्र में सफेद हुए बाल फिर काले हो जाएंगे।

  • आंवला व आम की गुठली को पीसकर इस पेस्ट को प्रतिदिन - 30 मिनट सिर में लगाने से सफेद बाल काले होने लगते हैं ।

  • सूखे आंवले को पानी में भिगोकर उसका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट में एक चम्मच युकेलिप्टस का तेल मिलाएं। मिश्रण को रात भर किसी लोहे के बर्तन में रखें। सुबह इसमें दही, नींबू का रस व अंडा मिलाकर बालों पर लगाएं। बालों में नई जान आ जाएगी। 15 दिन तक यह प्रयोग करने से सफेद बाल काले होने लगते हैं।

  • बादाम तेल, आंवला जूस व नींबू का जूस मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं बालों में चमक आ जाएगी व सफेद भी नहीं होंगे।

  • छोटी उम्र में सफेद होते बालों पर एक ग्राम काली मिर्च में थोड़ा दही मिलाकर सिर में लगाने से भी लाभ होता है।

  • 200 ग्राम आंवला, 200 ग्राम भांगरा, 200 ग्राम मिश्री, 200 ग्राम काले तिल इन सभी का चूर्ण बनाकर रोजाना 10 ग्राम मात्रा में लेने से कम उम्र में सफेद हुए बाल फिर से काले होने लगेंगे।

  • शीघ्र लाभ के लिए गाय के दूध का मक्खन या घी लेकर हल्के हाथों से बालों की जड़ों में लगाएं।सिर की त्वचा को पोषण मिलता है एवं बालों के सफेद होने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

  • अदरक को पीसकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं और अपने सिर पर लगाएं। इस उपाय को रोजाना अपनाने से सफेद बाल फिर से काले होने लगते हैं।

  • नारियल तेल में ताजे आंवला को इतना उबाले कि वह काला हो जाए। इस मिश्रण को ठंडा करके रात को सोने से पहले बालों में लगा लें व सुबह बाल धोएं।

  • नारियल तेल में मीठे नीम की पत्तियां को इतना उबाले की पत्तियां काली हो जाएं। इस तेल के हल्के हाथों से बालों की जड़ों पर लगाएं। बाल घने व काले हो जाएंगे।
 

बाल झड रहे हैं तो इन्हें आजमायें :

  • बालों में एलोवेरा जेल लगाने से भी बाल गिरना बंद हो जाते हैं और जल्दी सफेद नहीं होते।

  • प्रतिदिन प्रातः खाली पेट 20 मिली. आंवला जूस लेने से भी बाल लंबी उम्र तक काले बने रहते हैं एवं झड़ते भी नहीं हैं ।


बालों का रंग डार्क ब्राउन करने के लिए :

  • मेहंदी को नारियल तेल में मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बालों में लगाने से बालों का रंग आकर्षक डार्क-ब्राउन होने लगता है।

  • बाल धोने में नींबू पानी का उपयोग करें। इससे बाल नेचुरली ब्राउन होने लगते हैं ।

यदि डिप्रैशन की चपेट में आ रहे हैं तो इसे करें ! हमारा मष्तिस्क जो सम्पूर्ण  शरीर का नियंत्रण करता है करोड़ों छोटी-छोटी कोशिकाओं का बना है, उन्हें न्यूरोन्स कहा जाता है |  एक न्यूरोन दूसरे न्यूरोन्स से संपर्क कुछ खास पदार्थों के जरिए करता है, इन पदार्थों को न्यूरोट्रांसमीटर कहा जाता है | दिमाग में कुछ ऐसे न्यूरोट्रांसमीटर हैं जिनकी मात्रा में बदलाव आने से डिप्रैशन हो जाता है |  समय के साथ डिप्रैशन बढ़ने से दिमाग की कोशिकाओं में ऐसे बदलाव आ जाते हैं, जिनसे रोगी के मन में स्वयं को खत्म करने के विचार आने लगते हैं | 

डिप्रैशन के लक्षण :

•यदि आप सो नहीं पाते हैं अथवा ज्यादा सोने लगते हैं

•किसी भी चीज पर उतना ध्यान नहीं लगा पाते जो कि आप पहले आसानी से कर पाते थे

•उदास व निराश रहते हैं, प्रयास करने के बाबजूद भी अपने मन से नकारात्मकता को निकाल नहीं पा रहे हैं

•भूख नहीं लगती या जरूरत से ज्यादा खाने लगे हैं

•जरूरत से ज्यादा परेशान, गुस्सैल या चिड़चिड़े रहने लगे हैं |

•शराब या धूम्रपान करने लगे हैं, या ऐसी किसी गतिविधि में शामिल हो रहे हैं जो कि आप जानते हैं कि वह गलत है

•मन में यह विचार आते हों कि जीवन जीने का कोई फायदा नहीं है यदि उपर्युक्त लक्षण उत्पन्न हो रहे हों तो सावधान हो जाएँ |

 

यह डिप्रैशन हो सकता है | डिप्रैशन अधिकतर  25 से 45 वर्ष की उम्र के लोग को प्रभावित करता है | परंतु बच्चों एवं वृद्धावस्था में भी यह बीमारी हो सकती है | पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डिप्रैशन 2-3 गुना ज्यादा पाया जाता है | डिप्रैशन समाज के हर वर्ग को प्रभावित करता है | यह सोचना गलत है कि जिन लोगों के पास जिन्दगी के सब ऐशो-आराम हैं उन लोगों को डिप्रैशन नहीं हो सकता |

बच्चों में डिप्रैशन के लक्षण :

चिड़चिड़ापन, कहना न मानना, पढ़ाई में ध्यान न देना, स्कूल न जाने के बहाने बनाना |

डिप्रैशन की चिकित्सा : बदलती जीवनशैली, तनावमुक्त वातावरण और प्रदूषित पर्यावरण की वजह से भी अवसाद के मामले निरंतर बढ़ रहे हैं। योग में अवसाद के उपचार के लिए ब्रह्म मुद्रा आसन बहुत कारगर योगासन है। इसके नियमित अभ्यास से आपको न सिर्फ अवसाद से मुक्ति मिलती है बल्कि कई मानसिक व शारीरिक समस्याओं का भी निदान होता है।

आराम की मुद्रा में बैठ जाएँ. सर्वप्रथम श्वांसों को गहराई से छोड़ने का प्रयास करें । केवल सांसों को गहरा-गहरा लें और छोड़ें। इस प्रक्रिया में शरीर की दूषित वायु निष्कासित होती है और तन- मन प्रफुल्लित रहतें हैं ।

ब्रह्म मुद्रा करने की विधि :

•पद्मासन,वज्रासन,सिद्धासन या पालथी लगाकर बैठ जाएँ

•गर्दन को  श्वास भरते हुए धीरे-धीरे दाईं ओर ले जाएं। कुछ देर रुकें फिर श्वास छोड़ते हुए गर्दन को सामान्य स्थिति में ले आयें | पुनः श्वास भरते हुए गर्दन को बाईं ओर ले जाएं एवं श्वास छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में लायें | यह एक चक्र हुआ | इस प्रकार कम से कम 5 चक्र करें |

•सिर को 3-4 बार क्लॉकवाइज (घडी की सुई की दिशा में) और उतनी ही बार एंटी क्लॉकवाइज घुमाएं।

 

सूर्य अनुलोम-विलोम प्राणायाम विधि :

पद्मासन अथवा सुखासन में बैठकर बायें नथुने को बंद करें और दायें नथुने से धीरे- धीरे अधिक से अधिक गहरा श्वास भरें। श्वास लेते समय आवाज न हो इसका ख्याल रखें। अब अपनी क्षमता के अनुसार श्वास भीतर ही रोक रखें। (कुंभक की यह अवधि कुछ दिनों के अभ्यास से धीरे धीरे एक डेढ़ मिनट तक बढ़ायी जा सकती है।) जब श्वास न रोक सकें तब दायें नथुने से ही धीरे धीरे बाहर छोड़ें। झटके से न छोड़ें। इस प्रकार 9 से 27 प्राणायाम करें।

घरेलू नुस्खे :

इलायची - इलायची के पिसे हुए बीज को पानी के साथ उबाल कर या चाय के साथ लिया जा सकता है।

काजू - विटामिन बी की मात्रा अधिक होने के कारण काजू हमारे स्वाद और तंत्रिका तंत्र को ठीक रखता है।

सेब - सेब खाने से डिप्रेशन दूर रहता है क्योंकि सेब में विटामिन बी ,फास्फोरस और पोटैशियम होते हैं जिनसे कि ग्लूटामिक एसिड का निर्माण होता है।

अवसाद की स्थिति में यह ध्यान रखें :

•महत्वपूर्ण निर्णयों को टालें जैसे कि शादी करना या तलाक से संबंधित बातें या नौकरी बदलना |

•अपने निर्णयों को अपने उन शुभचिंतकों के साथ बाटें, जो आपको भलीभांति जानते हों और आपकी स्थिति का सही आकलन करें |

•बड़े बड़े कार्यों को छोटे छोटे हिस्सों में बांटे, कुछ काम की प्राथमिकताएं निर्धारित करें और ऐसा कार्य करें, जिसे संपन्न करने की आपमें पूर्ण क्षमता हो |

•अन्य लोगों के साथ समय बिताएं और किसी भरोसेमंद मित्र या रिश्तेदार के साथ अपनी गुप्त बातों को बताएं |अपने आपको सबसे अलग थलग करने की कोशिश न करें और दूसरों को आपकी मदद करने दें |

•खुद को हल्के फुल्के कार्यों में या व्यायाम में व्यस्त रखें , ऐसे कार्य करें, जिसमे आपको आनंद मिले | जैसे कि फिल्म देखना, बाल्गेम खेलना |

•सामाजिक, धार्मिक या अन्य कार्यकमों में हिस्सा लें |

पेट की समस्या से हर घर में अधिकतर व्यक्ति परेशान होते हैं। पेट की मुख्‍य समस्‍याओं में कमजोर पाचन तंत्रकब्‍जगैस बनना हो सकता है। इनके लिए डॉक्‍टरी इलाज करने के साथ ही आप इन घरेलू नुस्‍खों को भी अपना सकते हैं। आज हम आपको पेट की आम समस्‍याओं के लिए इलाज के लिए घरेलू चीजों से बनने वाले 4 चूर्ण के बारे में बता रहे हैं। इनके प्रयोग से कई रोगों से मुक्त हो सकते है।

गैस हर चूर्ण :

सामग्री

·       10 ग्राम सेंधा नमक

·       10 ग्राम हींग

·       10 ग्राम सज्जीखार ( शुद्ध )

·       10 ग्राम हरड़ छोटी

·       10 ग्राम अजवायन

·       10 ग्राम काली मिर्च

चूर्ण बनाने की विधि

इस चूर्ण को बनाने के लिए उपर्युक्त  सामग्री को इक्कठा करें और अच्छी तरह से बारीक पीस लें। जब पाउडर बन जाए तो उसे किसी बारीक कपड़े या छन्‍नी से छान कर किसी कांच की शीशी में भरकर रख लें।

गैस और अपच के लिए :

सामग्री

·       जीरा 120 ग्राम 

·       सेंधानमक 100 ग्राम 

·       धनिया 80 ग्राम

·       कालीमिर्च 40 ग्राम 

·       सोंठ 40 ग्राम

·       छोटी इलायची 20 ग्राम

·       पीपर छोटी 20 ग्राम 

·       नींबू सत्व 15 ग्राम 

·       खाण्ड देशी 160 ग्राम

चूर्ण बनाने की विधि

नींबू और खाण्‍ड को छोड़ कर बाकी की सभी सामग्रियों को पीस कर चूर्ण तैयार करें।  फिर उसमें नींबू निचोड़े और खाण्‍ड मिलाएं। इस मिश्रण को 3 घंटे के लिये एक कांच के बरतन में रख दें।  फिर इसका सेवन खाना खाने के बाद 2 से 5 ग्राम करें।

कब्‍ज निवारक चूर्ण

सामाग्री

·       जीरा

·       अजवाइन

·       काला नमक

·       मेथी

·       सौंफ

·       हींग

चूर्ण बनाने की विधि

सबसे पहले जीराअजवाइनमेथी और सौंफ को अलग-अलग धीमी आंच पर भून लें। भूनने के बाद इन्‍हें अलग-अलग बारीक पीस लें। इसके बाद एक बर्तन में काला नमक और आधा चम्‍मच हींग लें। अब इसमें जीरासौंफअजवाइन का पाउडर डाल लें। इन तीनों से कम मात्रा में मेथी पाउडर डालें। इस मिश्रण को अच्‍छी तरह मिला लें। ध्‍यान ये रखना है कि जीराअजवाइन और सौंफा की मात्रा समान होनी चाहिए। इसको अच्‍छी तरह से मिक्‍स करने के बाद किसी डिब्‍बे में रख लें।

 

पेट के लिए रामबाण है यह चूर्ण

खाना खाने के बाद कई लोगों को बदहजमी हो जाती है। कभी-कभी तो पेट दर्द बर्दाशत से बाहर हो जाता है।इस चूर्ण से पाचन क्रिया ठीक रहती है।

सामग्री

·       अनारदाना 10 ग्राम

·       छोटी इलायची 10 ग्राम

·       दालचीनी 10 ग्राम

·       सौंठ 20 ग्राम

·       पीपल 20 ग्राम

·       कालीमिर्च 20 ग्राम

·       तेजपत्ता 20 ग्राम

·       पीपलामूल 20 ग्राम

·       नींबू का सत्व 20 ग्राम

·       धनिया 40 ग्राम

·       सेंधा नमक 50 ग्राम

·       काला नमक 50 ग्राम

·       सफेद नमक 50 ग्राम

·       मिश्री की डली 350 ग्राम

चूर्ण बनाने की विधि

सेंधा नमककाला नमकसफेद नमकमिश्री और नींबू का सत्व को छोड़कर सभी सामान को कड़ी धूप में 2-3 घण्टे सुखा लें। फिर इसे मिक्सी में डालकर बारीक पीस लें।

इसके बाद बाकी सामान को अलग से बारीक पीस लें और फिर सभी सामानों के इस पाउडर को अच्छे से मिला लें। अब इसे किसी कांच की शीशी भरकर रख लें।

 

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